नीट पीजी 2026 एडमिट कार्ड आज होंगे जारी, परीक्षा हॉल में तकनीकी खराबी आने पर लागू हैं खास नियमप्राइवेट कॉलेजों में मैनेजमेंट और एनआरआई कोटा: जानिए क्या है दोनों में अंतर और एडमिशन का तरीकाजयपुर के रामपुर कंवरपुरा में स्कूल निरीक्षण विवाद के बाद CJP नेताओं पर SC ST एक्ट दर्ज, जानिए कानून में सजा और बचाव के प्रावधानभरतपुर में भारी वाहन चालकों के लिए मुफ्त ड्राइविंग ट्रेनिंग शुरू, एनएसक्यूएफ लेवल-4 सर्टिफिकेट के साथ विदेश में भी मिलेंगे रोजगार के अवसरराजस्थान की 25 महिला पुलिस कर्मी बनेंगी ब्लैक कैट कमांडो, मानेसर में शुरू होगा कड़ा एनएसजी प्रशिक्षणदिल्ली प्रीमियर लीग 2026: नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स ने आउटर दिल्ली को हराकर विजयी विदाई लीमौलाना फजलुर रहमान का आसिम मुनीर पर बड़ा हमला, कहा- 1971 के सरेंडर जैसा दोहराया जा रहा इतिहासअमेरिकी डॉलर में गिरावट के बाद स्विस फ्रैंक मजबूत, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने की तैयारीफर्जी सिम और साइबर ठगी पर लगाम, देश में कड़े हुए नए टेलीकॉम नियम और बायोमेट्रिक अनिवार्यताअमेरिका में नेवाडा-कैलिफोर्निया सीमा पर लगी भयंकर जंगल की आग, छह घायल और बयालीस हजार लोग विस्थापित
कूनो नेशनल पार्क से निकलकर फिर बारां पहुंची मादा चीता वीरा, शाहाबाद जंगल में डेराराजस्थान
24 अग॰ 2026, 8:57 am (2 घंटे पहले)· 2

कूनो नेशनल पार्क से निकलकर फिर बारां पहुंची मादा चीता वीरा, शाहाबाद जंगल में डेरा

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से भटककर मादा चीता वीरा तीसरी बार राजस्थान के बारां जिले के जंगलों में पहुंच गई है। वन विभाग और ट्रैकिंग टीम उसकी हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर जंगली जानवरों के इस पार से उस पार जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में मादा चीता वीरा एक बार फिर राजस्थान के बारां जिले की सीमा में दाखिल हो गई है। यह तीसरा मौका है जब वीरा ने कूनो से लंबा सफर तय करते हुए बारां के जंगलों का रुख किया है। इस बार उसने शाहाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोटरा माताजी के आसपास के जंगलों और खेतों में अपना डेरा जमाया हुआ है। वीरा के इस इलाके में दोबारा प्रवेश करने की भनक लगते ही बारां वन विभाग के साथ-साथ कूनो नेशनल पार्क से आई स्पेशल ट्रैकिंग टीम भी पूरी तरह से मुस्तैद और सक्रिय हो गई है।

विशेष उपकरणों और मैदानी अमले की मदद से चीता की पल-पल की खबर रखी जा रही है। जीपीएस कॉलर आईडी और ग्राउंड ट्रैकिंग के जरिए अधिकारी वीरा की हर हरकत पर लगातार शिकंजा कसे हुए हैं। वन विभाग के अधिकारी इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि यदि यह वन्यजीव किसी तरह आबादी वाले इलाकों की तरफ रुख करता है, तो तुरंत जरूरी कदम उठाए जा सकें। विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों के लिए चेतावनी जारी करते हुए उन्हें चीते की मौजूदगी वाले क्षेत्र से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सख्त सलाह दी है। इसके अलावा लोगों से यह अपील भी की गई है कि वे फिलहाल जंगल या अपने खेतों की तरफ बेवजह जाने से बचें और पूरी तरह से सतर्कता बरतें। जिम्मेदारों का कहना है कि वीरा की सुरक्षा और आम जनता की हिफाजत के लिए उसकी लोकेशन को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

इससे पहले भी दो बार बारां आ चुकी है वीरा

मादा चीता वीरा के लिए बारां के जंगल नए नहीं हैं, क्योंकि वह इससे पहले भी दो बार यहां का दौरा कर चुकी है। आधिकारिक रिकॉर्ड और जानकारी के मुताबिक वीरा ने सबसे पहले फरवरी 2024 में कूनो नेशनल पार्क की सीमा लांघी थी और बारां के जंगलों में आ गई थी। उस शुरुआती दौरे के दौरान वह लगभग दो दिनों तक शाहाबाद के जंगली इलाके में ठहरी थी और उसके बाद खुद ही वापस कूनो लौट गई थी। इसके बाद दूसरा मौका 8 जून 2026 को आया, जब वीरा दोबारा बारां पहुंच गई। इस दूसरी यात्रा में वह करीब चार दिनों तक बारां के जंगलों में ही घूमती रही और अंततः 12 जून को खुद ही जंगल के रास्तों से होते हुए कूनो नेशनल पार्क वापस लौट गई थी। अब यह तीसरी दफा है जब उसने शाहाबाद के जंगलों को अपना आशियाना बनाया है।

क्यों बार-बार बारां का रुख कर रहे हैं चीते?

चीतों का बार-बार मध्य प्रदेश के कूनो से निकलकर राजस्थान के बारां के जंगलों की तरफ खिंचे चले आना वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के अधिकारियों के बीच चर्चा और अध्ययन का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बारां का शाहाबाद क्षेत्र और उससे लगा हुआ पूरा वन आंचल प्राकृतिक आवास, घने जंगलों और शाकाहारी वन्यजीवों की पर्याप्त उपलब्धता के मामले में चीतों के लिए बेहद मुफीद और अनुकूल है। इसके अलावा, कूनो नेशनल पार्क और बारां के बीच की भौगोलिक नजदीकियां भी इन वन्यजीवों को आसानी से इस ओर आकर्षित करती हैं। वीरा का बार-बार इस क्षेत्र में लौटना इस बात की ओर इशारा करता है कि उसे यहां का परिवेश रास आ रहा है। हालांकि, इन तमाम बातों के बीच वन विभाग की सबसे पहली और बड़ी प्राथमिकता यही है कि चीते की सुरक्षित निगरानी हो सके और ग्रामीण इलाकों में किसी भी तरह का खतरा पैदा न हो। अधिकारियों की विशेष टीमें लगातार वीरा की हरकतों पर नजर टिकाए बैठी हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

सवाल-जवाब

मादा चीता वीरा ने कूनो नेशनल पार्क से निकलकर किस जिले के जंगलों का रुख किया है?
मादा चीता वीरा ने कूनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान के बारां जिले के शाहाबाद क्षेत्र का रुख किया है।
वीरा इससे पहले कितनी बार बारां आ चुकी है?
वीरा इससे पहले फरवरी 2024 और जून 2026 में दो बार बारां के जंगलों में आ चुकी है।
वन विभाग चीता वीरा की निगरानी कैसे कर रहा है?
वन विभाग जीपीएस कॉलर और ग्राउंड ट्रैकिंग के जरिए वीरा की लोकेशन और हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए है।
स्थानीय ग्रामीणों के लिए वन विभाग ने क्या निर्देश दिए हैं?
विभाग ने ग्रामीणों को चीते की गतिविधियों वाले क्षेत्र से दूर रहने तथा जंगल और खेतों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·59 मिनट पहले

कूनो नेशनल पार्क से निकलकर मादा चीता वीरा का तीसरी बार राजस्थान के बारां जिले के शाहाबाद क्षेत्र में पहुंचना यह साबित करता है कि कूनो और बारां का यह पूरा अंतर-राज्यीय वन गलियारा चीतों की प्राकृतिक आवाजाही के लिए कितना उपयुक्त है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के वन विभागों के बीच इस निरंतर आवाजाही को देखते हुए अंतर-राज्यीय समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि वन्यजीव सुरक्षा और मानव बस्तियों की हिफाजत एक साथ सुनिश्चित की जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·58 मिनट पहले

मादा चीता वीरा का शाहाबाद क्षेत्र में बार-बार आना केवल एक वन्यजीव की सामान्य आवाजाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है। जब कोई संरक्षित वन्यजीव मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों के इतने करीब डेरा डालता है, तो वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। यदि दोनों राज्यों के बीच त्वरित सूचना तंत्र और पुलिस-वन प्रशासन का संयुक्त गश्त अभियान समय रहते और अधिक प्रभावी नहीं किया गया, तो किसी भी आपात स्थिति में जनहानि या संघर्ष का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR