रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पूरे देश के बाजारों में रौनक छा जाती है और बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की तैयारियों में जुट जाती हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सगी बहन शशि का जीवन एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है, जो सादगी और कर्तव्यनिष्ठा की एक अनोखी मिसाल पेश करता है। खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी की बहन शशि उत्तराखंड के एक छोटे से इलाके में साधारण जीवन व्यतीत करती हैं और अपना गुजारा चलाने के लिए चाय की दुकान चलाती हैं। वीवीआईपी परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उनका यह संघर्षपूर्ण जीवन लोगों के बीच हमेशा से कौतूहल और सम्मान का विषय रहा है।
रक्षाबंधन और भाई-बहन का नाता
हर साल जब पूरा देश भाई-बहन के इस प्रेम के प्रतीक पर्व को धूमधाम से मनाता है, तब योगी आदित्यनाथ और उनकी बहन के मिलने की खबरें बेहद खास होती हैं। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश की सत्ता की कमान उनके हाथों में है और वह राज्य के विकास कार्यों, कानून व्यवस्था और लखनऊ में टाटा ग्रुप के ताज पैलेस के उद्घाटन जैसे बड़े आयोजनों में व्यस्त रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी बहन अपनी आम जिंदगी में व्यस्त रहती हैं। राजनीतिक जिम्मेदारियों और व्यस्त दिनचर्या के चलते दोनों की मुलाकातें बेहद सीमित होती हैं, लेकिन त्योहार के मौके पर बहनों का प्यार किसी न किसी रूप में भाई तक पहुंच ही जाता है।
राजनीतिक जीवन और परिवार से दूरी
उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले नेताओं में शुमार योगी आदित्यनाथ ने बहुत कम उम्र में अपना घर-परिवार छोड़ दिया था और संन्यास का मार्ग चुन लिया था। गोरक्षपीठ से जुड़ने के बाद उनका पूरा जीवन जनसेवा को समर्पित हो गया। यही कारण है कि उनके पारिवारिक रिश्ते सामान्य राजनेताओं से काफी अलग हैं। उनकी बहन शशि ने मीडिया से बातचीत में कई बार इस बात का जिक्र किया है कि उन्हें अपने भाई के देश और प्रदेश की सेवा करने पर गर्व है, भले ही वे व्यक्तिगत जीवन में एक आम नागरिक की तरह कठिनाइयों का सामना कर रही हों और अपनी मेहनत से परिवार चला रही हों।
सादगी की मिसाल
मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए भी योगी आदित्यनाथ ने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि को कभी भी अपने राजनीतिक रसूख का जरिया नहीं बनने दिया। उनकी बहन का चाय बेचना और साधारण जीवन जीना इस बात का प्रमाण है कि सत्ता और परिवार के बीच की दूरी किस तरह सिद्धांतों पर टिकी होती है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के समय यह कहानी लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि कैसे एक तरफ देश का सबसे बड़ा सूबे का मुखिया प्रदेश की जनता की रक्षा और देखभाल में दिन-रात एक किए हुए है, तो वहीं उनकी अपनी सगी बहन आम इंसान की तरह अपनी आजीविका कमाने के लिए संघर्ष कर रही है।


















