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चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की बाढ़ से भारी तबाही, 90 साल का रिकॉर्ड टूटा और तीन की मौतमध्य प्रदेश
31 अग॰ 2026, 12:28 am (13 दिन पहले)· 3

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की बाढ़ से भारी तबाही, 90 साल का रिकॉर्ड टूटा और तीन की मौत

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे मकानों की एक मंजिल डूब गई और तीन लोगों की जान चली गई।

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान पर आने से गंभीर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे पिछले 90 वर्षों के रिकॉर्ड टूट गए हैं। इस आपदा के कारण कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है और मकानों की एक-एक मंजिल तक जलमग्न हो गई है। प्रभावित घरों के भीतर पांच फीट तक कीचड़ और भारी गंदगी जमा हो गई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

मंदाकिनी नदी का रौद्र रूप और तबाही

प्रशासन और राहत एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से चित्रकूट के कई पुल, आश्रम, दुकानें और सड़कें पूरी तरह डूब गई हैं। राम घाट के आसपास का इलाका बुरी तरह प्रभावित हुआ है और बाढ़ के पानी के उतरने के बाद हर तरफ बर्बादी के निशान दिखाई दे रहे हैं। निचले इलाकों में स्थित तिरहार क्षेत्र भी बाढ़ के पानी से घिर गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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सेना और राहत दलों का रेस्क्यू ऑपरेशन

इस भीषण आपदा में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सेना को मैदान में उतारा गया है। राहत और बचाव कार्यों के तहत सेना ने बाढ़ के बीच फंसे करीब 800 से 1000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इसके अलावा, राहत कार्यों में हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है ताकि दुर्गम स्थानों पर फंसे लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके। इस जलप्रलय की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।

मुख्यमंत्री का दौरा और प्रशासनिक जायजा

हालात का जायजा लेने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थिति की समीक्षा की। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री बांटने और साफ-सफाई के काम में जुटी हुई हैं। हालांकि अब मंदाकिनी नदी का जलस्तर लाल निशान से नीचे पहुंच गया है, लेकिन घरों और दुकानों में जमी मोटी कीचड़ के कारण लोगों को सामान्य स्थिति में लौटने में काफी वक्त लगेगा।

सवाल-जवाब

चित्रकूट में बाढ़ किस नदी के कारण आई?
चित्रकूट में भीषण बाढ़ मंदाकिनी नदी के उफनाने के कारण आई है।
इस बाढ़ से कितना पुराना रिकॉर्ड टूटा है?
मंदाकिनी नदी की इस बाढ़ ने पिछले 90 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों से कितने लोगों को सुरक्षित निकाला गया?
सेना और राहत दलों ने बाढ़ में फंसे 800 से 1000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
इस आपदा में कितने लोगों की जान गई है?
बाढ़ और जलप्रलय की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
घरों के अंदर किस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है?
मकानों की एक मंजिल पानी में डूब गई और घरों के अंदर पांच फीट तक कीचड़ और गंदगी भर गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·12 दिन पहले

मंदाकिनी नदी का यह भीषण उफान केवल एक स्थानीय आपदा नहीं, बल्कि बदलते जलवायु पैटर्न और अत्यधिक मौसम की घटनाओं का गंभीर संकेत है। 90 साल का रिकॉर्ड टूटना यह बताता है कि हमारे पारंपरिक जल निकासी और नदी बेसिन प्रबंधन प्रणालियों में भारी खामियां हैं। हालांकि सेना और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर सैकड़ों लोगों को बचाया है, लेकिन जलस्तर घटने के बाद घरों में जमा पांच फीट तक कीचड़ और मलबे से निपटना एक बड़ी चुनौती है। यदि बुनियादी ढांचे को जलवायु-अनुकूल नहीं बनाया गया, तो भविष्य में ऐसे संकट क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और पुनर्वास प्रयासों पर भारी पड़ेंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 दिन पहले

चित्रकूट में 90 साल का रिकॉर्ड टूटना यह संकेत देता है कि हमारी जल निकासी और नदी प्रबंधन प्रणालियों में संरचनात्मक सुधार की तत्काल आवश्यकता है। मंदाकिनी नदी के उफान और पांच फीट तक जमी कीचड़ से हुए नुकसान के बाद, केवल फौरी राहत काफी नहीं होगी। भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए एक स्थायी जलवायु अनुकूल और वाटरशेड प्रबंधन नीति बनानी होगी, ताकि तटीय बस्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और पुनर्वास कार्य तेजी से हो सकें।

Ravikash Gupta@ravikash·12 दिन पहले

यह आपदा केवल स्थानीय भौगोलिक उथल-पुथल नहीं है, बल्कि देश के टियर-2 और धार्मिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ते आर्थिक और ढांचागत जोखिमों को उजागर करती है। पर्यटन और स्थानीय व्यापार का केंद्र होने के कारण, राम घाट और आसपास के बाजारों में हुआ भारी नुकसान अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डालता है। पर्यटन से होने वाली दैनिक आय रुकने और घरों-दुकानों में गाद जमने से छोटे कारोबारियों और दुकानदारों को बड़े वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में, बीमा दावों का त्वरित निस्तारण, सस्ते ऋण और वित्तीय सहायता पैकेज देना अनिवार्य होगा, अन्यथा यह तबाही स्थानीय स्तर पर एक गंभीर आर्थिक मंदी का रूप ले सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 दिन पहले

मंदाकिनी नदी की इस आपदा ने प्रशासनिक और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 90 साल का रिकॉर्ड टूटना यह संकेत देता है कि जलवायु परिवर्तन और जल निकासी प्रणालियों की अनदेखी भविष्य में और बड़े आपराधिक और मानवीय संकट पैदा कर सकती है। अब यह देखना होगा कि पुनर्वास और राहत सामग्री वितरण में कितनी पारदर्शिता बरती जाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·12 दिन पहले

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की इस अप्रत्याशित बाढ़ ने बुंदेलखंड क्षेत्र के बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। नब्बे साल का रिकॉर्ड टूटने का अर्थ है कि जल निकासी और तटबंधों के रखरखाव में गंभीर प्रशासनिक चूक रही है। सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन से तात्कालिक जान-माल की रक्षा तो हुई, किंतु अब सबसे बड़ी चुनौती पांच फीट तक जमी कीचड़ और मलबे को साफ कर संक्रामक रोगों को रोकना है। यदि समय पर पारदर्शिता के साथ राहत सामग्री नहीं पहुँची, तो विस्थापित परिवारों का पुनर्वास और व्यापारिक पटरियों पर लौटना बेहद कठिन हो जाएगा।

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