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चंद्रपुर की सरकारी आश्रमशाला में छात्रों के आधे सिर मुंडे, तस्वीरें फैलीं तो रात में जगाकर काटे बालमहाराष्ट्र
5 अक्तू॰ 2026, 2:16 pm (22 दिन पहले)· 1

चंद्रपुर की सरकारी आश्रमशाला में छात्रों के आधे सिर मुंडे, तस्वीरें फैलीं तो रात में जगाकर काटे बाल

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में जांभुलघाट आश्रमशाला के करीब 100 छात्रों के आधे सिर ट्रिमर से काट दिए गए। तस्वीरें सामने आने के बाद रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक बच्चों को जगाकर बाकी बाल काटे गए।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित एक सरकारी आश्रमशाला से बेहद हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है। चिमूर तहसील के जांभुलघाट स्थित सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक आश्रमशाला में शनिवार दोपहर करीब सौ छात्रों के सिर के आधे बाल ट्रिमर से काट दिए गए और बाकी हिस्से को अगले दिन काटने की बात कहकर उन्हें वैसे ही छोड़ दिया गया। आधे मुंडे सिर वाले असहाय बच्चों की तस्वीरें जैसे ही सामने आईं, आश्रमशाला प्रशासन में अफरातफरी मच गई। अपनी फजीहत से बचने के लिए अधिकारियों ने सो रहे छात्रों को रात में जगाया और सुबह चार बजे तक दोबारा बाल कटवाने का अजीबोगरीब अभियान चलाया।

जांभुलघाट आश्रमशाला में दोपहर तीन बजे शुरू हुआ अजीबोगरीब घटनाक्रम

जांभुलघाट स्थित इस सरकारी आवासीय विद्यालय में पहली कक्षा से लेकर ग्यारहवीं कक्षा तक के लगभग 572 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई करते हैं। आश्रमशाला प्रशासन ने दावा किया कि बच्चों के सिर में रूसी यानी डैंड्रफ की गंभीर समस्या हो गई थी, जिसके चलते उनके बाल काटने का फैसला लिया गया। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे नाई को बुलाकर बाल काटने का काम शुरू कराया गया था। आरोप है कि छात्र कतार से भाग न जाएं या इधर-उधर न भटकें, इसके लिए कर्मचारियों ने अजीब तरीका निकाला और ट्रिमर से कई बच्चों के सिर का केवल आधा हिस्सा ही मूंड दिया। आधा सिर मुंडवाने के बाद छात्रों को यह कहकर छोड़ दिया गया कि बाकी हिस्से की कटिंग अगले दिन पूरी की जाएगी।

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रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक चला कटिंग का सिलसिला

आधे मुंडे सिर के साथ घूमते मासूम छात्रों की तस्वीरें जैसे ही बाहर निकलीं, आश्रमशाला प्रबंधन की इस क्रूर व्यवस्था पर आक्रोश फैल गया। बात उच्च अधिकारियों तक पहुंची तो आनन-फानन में रात करीब 11 बजे बाल काटने की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई। उस वक्त कई बच्चे सोने की तैयारी में थे, जबकि बड़ी संख्या में छात्र गहरी नींद में सो चुके थे। कर्मचारियों ने सोते हुए बच्चों को नींद से जगाया और कुर्सी पर बैठा दिया। रात 11 बजे शुरू हुआ यह सिलसिला रविवार तड़के सुबह करीब 4 बजे तक लगातार चलता रहा। इस दौरान करीब 80 से 100 विद्यार्थियों के बाल काटकर दोनों तरफ बराबर किए गए। अब स्थानीय लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि स्वच्छता के लिए बाल काटना इतना जरूरी था, तो यह काम दिन के उजाले में गरिमापूर्ण तरीके से क्यों नहीं किया गया और आधी रात को बच्चों की नींद खराब कर यह तमाशा क्यों खड़ा किया गया।

अधीक्षक प्रशांत मेश्राम की दलील और बैटरी खत्म होने का बहाना

चौतरफा आलोचनाओं के बीच आश्रम स्कूल के अधीक्षक प्रशांत मेश्राम ने सफाई दी, जिसने प्रशासनिक लापरवाही को और उजागर कर दिया। अधीक्षक ने बताया कि हर दो महीने में बच्चों के बाल काटे जाते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में ध्यान नहीं दिया गया था। अब गर्मी शुरू होने के कारण मैदान में खेलने वाले बच्चे नियमित रूप से सिर नहीं धोते, जिससे रूसी और खुजली की शिकायत बढ़ रही थी।

"छात्र इधर-उधर न भटकें इसलिए आधी कटिंग की गई। बाकी बच्चों को भी ट्रिमर लगाने का काम जारी था, लेकिन ट्रिमर की चार्जिंग खत्म हो गई। नाई ने कहा कि बाकी बाद में करेंगे, लेकिन आधे मुंडन किए बच्चों के फोटो वायरल हो गए। मुझे ऑफिस से कॉल आया की तुरंत बच्चों के बाल लेवल कर दो, इसीलिए रात को बाल काटने पड़े। मेरा कोई गलत मकसद नहीं था।"

अधीक्षक के अनुसार कार्यालय से फोन आने के बाद उन्हें तुरंत बाल बराबर करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके कारण रात में ही बाल काटने पड़े। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी आश्रमशाला में कुछ समय पहले छात्रों को बासी भोजन परोसने का मामला भी गरमाया था, जिसके बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी। अब इस नए मामले ने आश्रमशाला की कार्यप्रणाली, बच्चों की सुरक्षा और उनके आत्मसम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभिभावकों ने की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

इस अमानवीय बर्ताव के बाद छात्रों के अभिभावकों में गहरा रोष है। अभिभावकों ने आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तुरंत जांभुलघाट आश्रमशाला का दौरा करने का अनुरोध किया है। उन्होंने मांग की है कि किसी बाहरी दबाव के बिना विद्यार्थियों के बयान स्वतंत्र रूप से दर्ज किए जाएं। साथ ही बच्चों को इस तरह आधा मूंडने का आदेश देने वाले कर्मचारियों, बाल काटने वाले नाई और लापरवाही बरतने वाले उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

सवाल-जवाब

यह घटना महाराष्ट्र के किस जिले और स्कूल में हुई?
यह घटना महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की चिमूर तहसील स्थित जांभुलघाट सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक आश्रमशाला में हुई।
आश्रमशाला में कितने छात्र पढ़ते हैं और कितनों के बाल काटे गए?
इस आश्रमशाला में पहली से ग्यारहवीं कक्षा तक के करीब 572 विद्यार्थी रहते हैं, जिनमें से 80 से 100 छात्रों के बाल काटे गए थे।
छात्रों के आधे सिर क्यों मुंडवाए गए थे?
अधीक्षक के अनुसार छात्र कटिंग छोड़कर इधर-उधर न भागें इसलिए पहले आधा सिर ट्रिम किया गया, जिसके बाद ट्रिमर की बैटरी खत्म हो गई थी।
आधी रात को बाल काटने का अभियान कब से कब तक चला?
तस्वीरें सामने आने के बाद रात करीब 11 बजे से तड़के सुबह 4 बजे तक सो रहे छात्रों को जगाकर बाल काटे गए।
अधीक्षक प्रशांत मेश्राम ने इस मामले में क्या सफाई दी?
प्रशांत मेश्राम ने कहा कि बच्चों में डैंड्रफ की समस्या थी और ट्रिमर चार्ज न होने से काम रुका था, बाद में ऑफिस के निर्देश पर रात में बाल बराबर किए गए।
अभिभावक अब प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?
अभिभावकों ने आदिवासी विकास विभाग से निष्पक्ष जांच कराने, बच्चों के स्वतंत्र बयान दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·21 दिन पहले

बच्चों के साथ ऐसा मज़ाक कौन करता है? डैंड्रफ की दिक्कत थी तो ढंग से बाल कटवाते, ये आधे सिर मुंडवाकर तमाशा बनाने की क्या ज़रूरत थी। रात को नींद से जगाकर बाल काटना कौन सा इंसाफ है।

Ravikash Gupta@ravikash·21 दिन पहले

बैटरी खत्म होने का बहाना देकर बच्चों की आधी रात की नींद खराब करना और उनका मज़ाक बनवाना कौन सी समझदारी है?

Neha Verma@neha-verma·21 दिन पहले

रविकश जी, आपकी बात ठीक है पर हो सकता है बैटरी सच में खत्म हो गई हो और उनका मकसद बच्चों को डराना न रहा हो।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

बच्चों के साथ इतनी बेरुखी क्यों? डैंड्रफ का इलाज करने का यह कौन सा तरीका है कि आधे सिर के बाल काटकर रात भर उन्हें तड़पाया जाए? ऐसे लापरवाह प्रिंसिपल पर क्या कार्रवाई होगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने! वो अधीक्षक प्रशांत मेश्राम तो अजीब सी दलील दे रहा है कि बैटरी खत्म हो गई थी, जैसे कोई मोबाइल चार्ज कर रहा हो बच्चों के सिर पर।

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