आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की खोज से हिला कंप्यूटर साइंस, एक्सपोनेंशियल टाइम हाइपोथिसिस पर उठे सवाललाइव: चक्रवात अर्णब का ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी तांडव, 55 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्टहजारों साल पुराना है कंडोम का इतिहास, कभी भेड़ की आंत और कछुए के खोल से तैयार होते थे ये कवरपेरेंट्स की ये 5 गलतियां घर में बढ़ाती हैं भाई-बहनों के बीच मनमुटाव, ताउम्र रिश्तों में आ जाती है कड़वाहटरिवाइव हुआ समझौता: वोक्सवैगन ग्रुप के साथ एआई असिस्टेंट साझा करेगी रिवियनडोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कैसे बढ़ी ट्रांसजेंडर बच्चों के माता-पिता की मानसिक चिंता?स्पेन ट्रेन हादसा: 69 लोगों की मौत, युवा एथलीट और पूर्व मंत्री भी शामिलनीट-यूजी और नेट विवादों के साये में एनटीए का कायापलट, सीआईएसएफ को सौंपी गई सुरक्षा और हटाए गए 600 विशेषज्ञद डेविल्स रिव्यू (2026): कैसे आधी सदी पुराना कल्ट क्लासिक इस हेलोवीन सीजन का सबसे बड़ा सिनेमाई धमाका बन गयाराशिद खान ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में रचा नया इतिहास, बने 200 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज
चुनाव आयोग मार्च के दौरान राहुल गांधी को हिरासत में लेने पर बर्लिन से बोले शशि थरूर, सरकार के रवैये को बताया शर्मनाकदिल्ली
7 अक्तू॰ 2026, 6:33 am (23 दिन पहले)· 1

चुनाव आयोग मार्च के दौरान राहुल गांधी को हिरासत में लेने पर बर्लिन से बोले शशि थरूर, सरकार के रवैये को बताया शर्मनाक

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से चुनाव आयोग तक मार्च कर रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रोका। जर्मनी में मौजूद सांसद शशि थरूर ने इस पुलिस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई।

नई दिल्ली में संसद परिसर से निर्वाचन आयोग कार्यालय की तरफ बढ़ रहे विपक्षी सांसदों के काफिले को पुलिस ने आकाशवाणी भवन के पास रोककर कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 6 अक्टूबर 2026 को इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। मार्च के दौरान पुलिसकर्मियों और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। इस घटनाक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद जर्मनी की राजधानी बर्लिन में मौजूद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

विपक्ष का विरोध मार्च और पुलिस की कार्रवाई

इंडिया गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाते हुए संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक पैदल मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी जब आकाशवाणी भवन के समीप पहुंचे, तब सुरक्षा बलों ने बैरिकेड लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग मुख्यालय की तरफ जाने के लिए परिसर के गेट को धक्का देकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जो वहां से महज 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बाद आकाशवाणी भवन की तरफ से पुलिस नियंत्रण कक्ष यानी पीसीआर को सूचना दी गई कि नेता जबरन परिसर में दाखिल हुए हैं।

पुलिस के साथ हुई गहमागहमी के बाद राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा, पवन खेड़ा और इमरान प्रतापगढ़ी आकाशवाणी भवन परिसर के अंदर एक पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर बाद पुलिस ने नेताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें गाड़ियों में बैठाकर किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन ले जाया गया। देर रात राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत सभी विपक्षी नेताओं को किंग्सवे कैंप से रिहा कर दिया गया, जिसके बाद दोनों नेता वहां से रवाना हो गए।

सात समंदर पार बर्लिन से शशि थरूर की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह चार महीने पहले बर्लिन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने की तय प्रतिबद्धता के कारण दिल्ली में सांसदों के इस मार्च में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके। थरूर ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ हुई हाथापाई और उन्हें हिरासत में लिए जाने के दृश्यों ने उन्हें भीतर तक परेशान कर दिया है।

थरूर ने साफ किया कि भौगोलिक रूप से भले ही वह जर्मनी में बैठकर केवल अपनी एकजुटता दर्शा सकते हैं, लेकिन उनका दिल इस समय नई दिल्ली में अपने साथियों के साथ धड़क रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस लड़ाई में अंततः न्याय की जीत जरूर होगी। थरूर ने आगे कहा कि 13 करोड़ मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने के विरोध में उठाई गई आवाज पर सरकार का इस प्रकार का रवैया पूरी तरह शर्मनाक है।

राहुल गांधी और पवन खेड़ा ने दागे तीखे सवाल

हिरासत में लिए जाने से पूर्व मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने प्रशासन के इस रवैये पर भारी रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 300 सांसदों को आकाशवाणी भवन के पास रोक दिया गया, जबकि निर्वाचन आयोग का दफ्तर वहां से केवल 50 गज की दूरी पर स्थित है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराने की है, फिर भी ज्ञानेश कुमार चुने हुए जनप्रतिनिधियों से मिलने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब संसद के 300 प्रतिनिधि चुनाव आयोग से मिलकर अपनी बात नहीं रख सकते, तो देश में लोकतंत्र के मायने ही क्या रह जाते हैं।

राहुल गांधी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मतदाताओं के साथ जो किया गया है वह देशद्रोह के समान है और वोट चोरी के जरिए पूरे तंत्र को हाईजैक किया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग का दफ्तर बिल्कुल पास था, तब लोकसभा में नेता विपक्ष को वहां जाने से रोकना प्रशासनिक मनमानी को दर्शाता है।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

इंडिया गठबंधन के सांसदों ने यह विरोध मार्च कब और क्यों निकाला था?
यह विरोध मार्च 6 अक्टूबर 2026 को संसद से चुनाव आयोग तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित वोट चोरी के विरोध में निकाला गया था।
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को कहां से हिरासत में लिया गया?
नेताओं को निर्वाचन आयोग कार्यालय से कुछ मीटर पहले आकाशवाणी भवन परिसर से हिरासत में लिया गया था।
हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं को कहां ले जाया गया?
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत अन्य नेताओं को किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन ले जाया गया था, जहां से उन्हें देर रात रिहा कर दिया गया।
शशि थरूर इस विरोध मार्च में शामिल क्यों नहीं हो सके?
शशि थरूर चार महीने पहले तय एक सम्मेलन की प्रतिबद्धता के कारण जर्मनी के बर्लिन में थे, इसलिए वह व्यक्तिगत रूप से मार्च में शामिल नहीं हो पाए।
राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए क्या मुख्य आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने कहा कि 300 सांसदों को आयोग से मिलने नहीं दिया गया और आरोप लगाया कि वोट चोरी कर लोकतंत्र खत्म किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·22 दिन पहले

पेड़ के नीचे धरने पर बैठने वाला सीन एकदम फिल्मी लगा, पुलिस ने भी गजब ड्रामा किया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 दिन पहले

बर्लिन में बैठकर भी दिल दिल्ली में ही है, थरूर साहब का यह अंदाज़ बढ़िया लगा।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·23 दिन पहले

अरे अर्जुन जी, बर्लिन से बैठकर दिल धड़कने की बात तो ठीक है, पर किंग्सवे कैंप वाले थाने में जो ड्रामा हुआ, उस पर किसी का ध्यान नहीं गया!

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

बर्लिन में बैठकर सिर्फ संवेदना जताने से क्या होगा, जब देश में सड़क पर उतरने की असली बारी थी तब वे विदेश में थे।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

करन भाई, विदेश में पहले से तय कार्यक्रम होना मजबूरी हो सकती है, पर ज़मीन पर लड़ाई लड़ने वालों का साथ देना भी तो ज़रूरी है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp