अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैठकर संगठित आपराधिक सिंडिकेट चलाने वाले गैंगस्टरों के नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कसते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। स्पेशल सेल ने कुख्यात हिमांशु भाऊ गिरोह के दो सक्रिय गुर्गों को दबोच लिया है। पकड़े गए दोनों आरोपी विदेशों में बैठे गैंग सरगना के सीधे संपर्क में थे और भारत में वारदातों को अंजाम देने वाले शूटरों तक नकदी, अवैध हथियार तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पकड़े गए आरोपियों की शिनाख्त गाजियाबाद स्थित पसौंडा निवासी 25 वर्षीय मुर्सलीन उर्फ गुल्लू और हरियाणा के भिवानी जिले के रहने वाले 20 वर्षीय नवीन के तौर पर हुई है। पुलिस टीम ने आरोपियों की निशानदेही पर एक अवैध पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।
स्पेशल सेल की नॉर्दर्न रेंज का सुनियोजित ऑपरेशन
इस पूरे ऑपरेशन को स्पेशल सेल की नॉर्दर्न रेंज की विशेष टीम ने अंजाम दिया। यह कार्रवाई इंस्पेक्टर अनुज नौटियाल तथा इंस्पेक्टर चंदन कुमार के सीधे नेतृत्व में और एसीपी राहुल कुमार सिंह की सघन निगरानी में पूरी की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान तकनीकी और जमीनी इनपुट से पता चला था कि विदेश में शरण लिए बैठा हिमांशु भाऊ अपने स्थानीय संपर्कों के जरिए भारत के अलग-अलग हिस्सों में नए लड़कों को जोड़कर गिरोह के भूमिगत शूटरों को रसद सहायता पहुंचा रहा है। इसी सूचना के आधार पर जाल बिछाकर पहले मुर्सलीन को पकड़ा गया और फिर उससे मिले सुरागों के आधार पर नवीन को भिवानी से हिरासत में लिया गया।
विशाखापत्तनम में शूटरों से जुड़ा था मुर्सलीन, संभाल रहा था फंडिंग
पुलिस जांच में मुर्सलीन के अपराध की दुनिया में प्रवेश करने के सिलसिलेवार ब्योरे सामने आए हैं। मुर्सलीन जनवरी 2026 में विशाखापत्तनम में था, जहां उसकी मुलाकात हिमांशु भाऊ गिरोह के दो ऐसे शूटरों से हुई जो दिल्ली और एनसीआर में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के बाद पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए वहां छिपकर रह रहे थे। शूटरों के संपर्क में आने के बाद मुर्सलीन गिरोह के नेटवर्क में पूरी तरह शामिल हो गया। उसका मुख्य काम विदेश से हिमांशु भाऊ द्वारा भेजे गए पैसों को शूटरों तक पहुंचाना और उनके ठहरने के लिए फर्जी पहचान पत्रों की व्यवस्था करना था। इसके जरिए शूटर बिना अपनी पहचान उजागर किए विभिन्न होटलों और किराए के ठिकानों पर आराम से रुकते थे।
टारगेट किलिंग के लिए शूटर के रूप में मुर्सलीन की तैयारी
अगस्त 2026 में जब गिरोह के पुराने सक्रिय शूटरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, तब विदेश में बैठे हिमांशु भाऊ ने मुर्सलीन को सीधे शूटर की भूमिका में उतारने की तैयारी शुरू कर दी थी। गिरोह की तरफ से उसे आधुनिक हथियार और गोलियां मुहैया करा दी गई थीं। पुलिस पूछताछ में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि गिरफ्तारी के समय मुर्सलीन किसी बड़ी टारगेट किलिंग को अंजाम देने अथवा किसी संभावित निशाने की रेकी करने के लिए अपने विदेशी आका के अंतिम निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहा था। समय रहते हुई इस गिरफ्तारी से एक संभावित सनसनीखेज वारदात टल गई।
बैंक खातों से लेन-देन और हथियार सप्लायर बना नवीन
मुर्सलीन की गिरफ्तारी के बाद जब उससे गहन पूछताछ की गई, तो हरियाणा के भिवानी से नवीन की संलिप्तता की पुष्टि हुई। इसके तुरंत बाद एक टीम ने भिवानी में छापेमारी कर नवीन को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती दिनों में नवीन का मुख्य काम अपने बैंक खाते का इस्तेमाल कर विदेश से हिमांशु भाऊ द्वारा भेजी जाने वाली अवैध रकम को रिसीव करना और फिर उसे आगे शूटरों और मददगारों तक ट्रांसफर करना था। समय बीतने के साथ गिरोह ने उसका दायरा बढ़ा दिया और वह सीधे हथियार पहुंचाने के काम में भी सक्रिय हो गया। दोनों आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए सामान्य फोन कॉल के बजाय इंटरनेट आधारित सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ऐप्स का इस्तेमाल कर विदेश में बैठे गैंगस्टर से लगातार दिशा-निर्देश ले रहे थे।
कम उम्र के युवाओं को अपराध में फंसाने का खतरनाक तरीका
स्पेशल सेल की तफ्तीश में यह चिंताजनक पहलू सामने आया है कि विदेश में बैठे सिंडिकेट संचालक भारतीय युवाओं को बरगलाकर अपने नेटवर्क का हिस्सा बना रहे हैं। गिरोह कुछ युवाओं को सीधे शूटर के तौर पर प्रशिक्षित करता है, जबकि अन्य युवकों का उपयोग हथियार पहुंचाने, बैंक खातों से धन अंतरण कराने और वारदात के बाद फरार शूटरों के लिए गुप्त पनाहगाहों का बंदोबस्त करने के लिए किया जा रहा है। जांचकर्ताओं का मानना है कि मुर्सलीन और नवीन की गिरफ्तारी से हिमांशु भाऊ गिरोह के वित्तीय लेनदेन और लॉजिस्टिक्स रीढ़ को गहरा आघात पहुंचा है।
मजबूरी और भटकाव से अपराध के दलदल में उतरे आरोपी
दोनों आरोपियों की पारिवारिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि की जांच से पता चला है कि मुर्सलीन ने कक्षा दो के बाद ही स्कूल छोड़ दिया था। परिवार का भरण-पोषण करने और सीमित कमाई के दबाव में वह पेंटर का काम करने लगा। विशाखापत्तनम में काम करते हुए जब वह गिरोह के शूटरों की तड़क-भड़क भरी जीवनशैली के संपर्क में आया, तो जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपराध के रास्ते पर चल पड़ा। दूसरी ओर, भिवानी निवासी नवीन ने नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और बढ़ई का काम सीख रहा था। स्कूल के दिनों से ही गलत संगत में रहने वाला नवीन पहले भी हत्या के प्रयास के एक आपराधिक मामले में शामिल रह चुका था। उसकी मुलाकात भी मैसूर में गिरोह के शूटरों से हुई थी, जिसके बाद वह इस सिंडिकेट का पक्का जरिया बन गया।
हथियार नेटवर्क और मनी ट्रेल की पड़ताल में जुटी पुलिस
स्पेशल सेल के अधिकारी अब दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ कर रहे हैं। जांच का मुख्य केंद्र गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों, हथियारों की अवैध आपूर्ति श्रृंखला और हवाला या डिजिटल माध्यमों से हुए पैसों के संपूर्ण लेन-देन का पता लगाना है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि हाल के महीनों में इन दोनों ने किन-किन शूटरों को हथियार अथवा पैसे पहुंचाए थे और इनके बैंक खातों में किन-किन माध्यमों से रकम जमा कराई गई थी। मामले में आगे की कानूनी और तकनीकी जांच जारी है।























