लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की चुनावी व्यवस्था और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है। ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि बांग्लादेश युद्ध में विजय हासिल करने के ठीक एक वर्ष बाद भी तत्कालीन सरकार और इंदिरा गांधी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर देखने को मिली थी। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में जनभावनाओं और सत्ता विरोधी माहौल का चुनावी नतीजों में न दिखना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
चुनावी प्रक्रिया और नतीजों पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखते हुए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश के कई हिस्सों में मौजूदा सरकार के खिलाफ असंतोष होने के बाद भी परिणाम लगातार एक ही राजनीतिक दल के पक्ष में आ रहे हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया और उन पर व्यवस्था में धांधली करने का आरोप लगाते हुए उन्हें देशद्रोही करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। दूसरी तरफ, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आयोग में मौजूद अन्य दो सदस्यों ने सराहनीय काम किया है और संस्था के भीतर से भी चिंताएं सामने आई हैं।
हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात के नतीजों का उल्लेख
चुनावी रुझानों का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि हर लोकतांत्रिक समाज में एंटी-इंकंबेंसी स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि जनता एक निश्चित समयावधि के बाद सत्ता के खिलाफ खड़ी होती है और यह प्रभाव विभिन्न राज्यों तथा सभी दलों पर लागू होता रहा है। हालांकि, उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी के दौर में हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों के भीतर यह सत्ता विरोधी लहर परिणामों से बिल्कुल नदारद दिखती है। उन्होंने सवाल किया कि जमीनी असंतोष के बावजूद इन राज्यों में सत्ता विरोधी रुझान अचानक कैसे गायब हो जाता है।
संविधान और लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रहार का आरोप
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि यह विवाद केवल किसी एक सीट की हार-जीत या कुछ वोटों के नुकसान का नहीं है, बल्कि देश के पूरे लोकतांत्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर और संविधान की बुनियाद पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईवीएम और मतदाता सूचियों में हेरफेर के जरिए चुनावी खेल को प्रभावित किया जा रहा है और 2024 के आम चुनावों में भी वोटों की हेराफेरी हुई। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि यदि इस संस्थागत धांधली और गड़बड़ी पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो मतदाता इस तंत्र को कभी माफ नहीं करेगा क्योंकि संविधान ने नागरिकों को मतदान की जो शक्ति दी है, उसी पर सीधा आघात किया जा रहा है।


















