चक्रवात अर्नब का असर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन इसके बावजूद देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा हुआ है। इस चक्रवाती सिस्टम के कमजोर पड़ने के बाद भी लगातार हो रही भारी बारिश, तेज हवाओं और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं। इस प्राकृतिक बदलाव के कारण विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और भारी तबाही देखने को मिल रही है।
बिहार में नदियों का बढ़ता जलस्तर और बाढ़ का खतरा
बिहार में चक्रवात अर्नब का प्रभाव अब कमजोर पड़ने लगा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश का कहर अभी पूरी तरह थमा नहीं है। पिछले 72 घंटों से हो रही लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण राज्य में अधिकतम तापमान गिरकर लगभग 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, रविवार को भी कुछ जिलों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, 30 सितंबर तक बारिश के कमजोर होने की उम्मीद है, जिससे कई इलाकों में धूप खिलने के आसार हैं। दूसरी तरफ, नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश ने बिहार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस बारिश के कारण गंडक और कोसी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर काफी बढ़ गया है, जिससे राज्य के 17 जिलों के लगभग 6 हजार गांव प्रभावित हुए हैं और करीब 500 गांव पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से जनजीवन बेपटरी, 29 लोगों की मौत
उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अयोध्या और जौनपुर समेत राज्य के लगभग 45 शहरों में पिछले 65 घंटों से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल रही हैं, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम के इस आक्रामक रुख को देखते हुए प्रशासन ने 22 जिलों में अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की है। आंधी और बारिश के कारण कई जगहों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा और आंधी-तूफान की चपेट में आने से पिछले दो दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में 29 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
मध्य प्रदेश में सामान्य कोटे के करीब पहुंचा मानसून
मध्य प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में सक्रिय हुए मानसूनी सिस्टम के कारण विशेष रूप से पूर्वी हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश से राज्य का मानसूनी आंकड़ा काफी सुधरा है। मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 35.6 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि मानसून के कुल निर्धारित कोटे का लगभग 95.4 प्रतिशत है। हालांकि, इस सुधार के बावजूद राज्य अभी भी आधिकारिक तौर पर सामान्य बारिश की श्रेणी में नहीं आ पाया है। मौसम विज्ञान के नियमों के अनुसार, 96 से 104 प्रतिशत तक की बारिश को ही सामान्य मानसून माना जाता है। ऐसे में सामान्य बारिश का लक्ष्य हासिल करने के लिए मध्य प्रदेश को अभी कुछ और दौर की मानसूनी बारिश की जरूरत होगी।
राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ का असर, 16 जिलों में अलर्ट
राजस्थान में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है, जिसका मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती सिस्टम है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से राज्य के मौसम में बड़ा बदलाव आया है और मौसम विभाग ने रविवार को 16 जिलों के लिए बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इससे पहले शनिवार को कोटा के मंडाना और जैसलमेर के मोहनगढ़ सहित कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश हुई और ओले भी गिरे। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले कुछ घंटों में राज्य के कई अन्य हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

















