वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से हाल ही में कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन इस प्रक्रिया से अलग एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर पूरी तरह से ध्यान खींच लिया। शुक्रवार शाम को नई दिल्ली के निर्वाचन सदन से सामने आई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की साझा बैठक की तस्वीर ने एक अलग ही बहस को जन्म दे दिया। बैठक के बाद आयोग की तरफ से फैसलों की जानकारी देने के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तस्वीरें भी साझा की गईं, जिन पर लोगों की नजरें तुरंत टिक गईं।
टेबल पर रखी बोतलों की कीमत पर टिकी लोगों की निगाहें
बैठक के एजेंडे और लिए गए फैसलों पर बात होने से पहले ही सोशल मीडिया यूजर्स की नजरें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारियों के सामने रखी पानी की बोतलों पर चली गईं। ये बोतलें आम प्लास्टिक की नहीं बल्कि कांच की थीं और उन पर ‘आवा’ ब्रांड का नाम साफ नजर आ रहा था। इन बोतलों की क्षमता 250 मिलीलीटर बताई जा रही है, जो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़न पर 8 बोतलों के एक पैक में 999 रुपए में उपलब्ध हैं। इस हिसाब से एक बोतल की कीमत लगभग 125 रुपए बैठती है, जिसका मतलब है कि एक लीटर पानी की कुल कीमत करीब 500 रुपए हो जाती है। इसी गणित के सामने आने के बाद इंटरनेट पर इन बोतलों की कीमत को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि, तस्वीर में इन बोतलों के होने मात्र से यह स्पष्ट नहीं होता कि आयोग ने इन्हें किस प्रकार या किस कीमत पर खरीदा था, क्योंकि प्रशासनिक बैठकों में अक्सर विभिन्न व्यवस्थाएं होती हैं।
क्या है ‘आवा’ नेचुरल मिनरल वॉटर की खासियत और इतिहास
चर्चा के केंद्र में आए इस ‘आवा नेचुरल मिनरल वॉटर’ ब्रांड की स्थापना साल 2005 में बेहराम मेहता द्वारा की गई थी, जो वर्तमान में कंपनी के प्रबंध निदेशक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस ब्रांड का दावा है कि उनका यह पानी पूरी तरह से प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त किया जाता है और इसमें शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और पोटेशियम स्वाभाविक रूप से मौजूद होते हैं। कंपनी का यह भी कहना है कि उनका यह विशेष मिनरल वाटर पश्चिमी भारत के अरावली क्षेत्र के प्राकृतिक स्रोतों से निकाला जाता है।
अरावली की पहाड़ियों से जुड़ा है स्रोत का दावा
कंपनी के आधिकारिक विवरण के अनुसार, अरावली पर्वतमाला की तरंगा पहाड़ियों में प्राकृतिक पानी के स्रोत की खोज करने के बाद इस ब्रांड को बाजार में उतारा गया था। कंपनी खुद को पश्चिमी भारत का पहला बोतलबंद प्राकृतिक मिनरल वॉटर ब्रांड होने का दावा करती है। निर्माताओं का कहना है कि इस पानी की अधिक कीमत केवल आकर्षक कांच की पैकेजिंग की वजह से नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्राकृतिक स्रोत और उसमें घुले हुए प्राकृतिक खनिजों की मौजूदगी मुख्य कारण है। बहरहाल, निर्वाचन आयोग की बैठक में इस ब्रांड की मौजूदगी ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और उपयोग की जाने वाली चीजों पर एक नई बहस छेड़ दी है, जो सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।



















