राजस्थान के टोंक में 60 वर्षीय संतोष देवी पर डायन बताकर हमला, रिश्तेदारों सहित 8-9 लोगों पर आरोपमूलांक 6 राशिफल 8 अगस्त 2026: संयम और विनम्र भाषा से बनेंगे काम, जल्दबाजी और गुस्से पर रखें काबूकम समय में रिकॉर्ड पैदावार और ₹4000 क्विंटल भाव, रामपुर के किसानों को रास आई पूसा बासमती 1509 धानमौसम विभाग की 15 राज्यों को बड़ी चेतावनी, दिल्ली एनसीआर समेत कई इलाकों में मूसलाधार बारिश का अलर्टमूलांक 4 राशिफल 8 अगस्त 2026: रुके काम पाएंगे गति और योजनाएं होंगी सफलमूलांक 5 अंकज्योतिष राशिफल 8 अगस्त 2026: जल्दबाजी से बचें, छोटी सी भूल बिगाड़ सकती है बड़ा काममेष साप्ताहिक राशिफल 9 से 15 अगस्त: जानिए करियर, वित्त, प्रेम और स्वास्थ्य का पूरा विस्तृत भविष्यफलसिंह राशि का साप्ताहिक राशिफल 9-15 अगस्त 2026 जिसमें जानिए अमावस्या के भय और गुरुवार के शानदार बदलाव की पूरी रिपोर्टआज का राशिफल 8 अगस्त 2026: मेष राशि को मिलेगा धन का लाभ और वृश्चिक की चमकेगी लव लाइफ, जानें सभी 12 राशियों का सटीक भविष्यफल12 अगस्त 2026 के पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव, मेष, कर्क, सिंह और कुंभ राशि वालों के लिए सतर्कता के निर्देश
दस साल से सूखी टंकी और ताले में बंद शौचालय, कांशीराम आवास चंदौली में चापाकल के भरोसे रहने को मजबूर लोगभारत
6 अग॰ 2026, 10:11 am (2 दिन पहले)· 0

दस साल से सूखी टंकी और ताले में बंद शौचालय, कांशीराम आवास चंदौली में चापाकल के भरोसे रहने को मजबूर लोग

चंदौली जिला मुख्यालय पर स्थित कांशीराम शहरी आवास परिसर में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। पानी की टंकी बनने के बाद से सूखी पड़ी है और सार्वजनिक शौचालय पर ताला लगा है, जिससे निवासी हैंडपंप से पानी ढोने को मजबूर हैं।

चंदौली जिला मुख्यालय में बने कांशीराम शहरी आवास परिसर के बाहर लगे विकास योजनाओं के रंग-बिरंगे बोर्ड और ऊंची इमारतें दूर से प्रगति का अहसास कराती हैं, लेकिन इस कॉलोनी के भीतर की असलियत बेहद चिंताजनक है। सरकारी दावों के विपरीत, यहां रहने वाले सैकड़ों परिवार पिछले एक दशक से बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए रोजाना संघर्ष कर रहे हैं। योजनाएं कागजों पर पूरी हो चुकी हैं और शिलान्यास पट्टिकाओं पर जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज हैं, परंतु धरातल पर स्थानीय लोगों को पीने के साफ पानी जैसी प्राथमिक आवश्यकता के लिए भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सूखी पड़ी पानी की टंकी और दरकती दीवारें

कांशीराम शहरी आवास परिसर के निकट जलापूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशाल पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। यह ढांचा दूर से देखने पर बिल्कुल नया प्रतीत होता है, परंतु निकट जाने पर इसकी दीवारों पर गहरी दरारें साफ दिखाई देती हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, जब से यह टंकी बनी है, तब से आज तक इसमें जल आपूर्ति शुरू ही नहीं की जा सकी है। लाखों रुपये की लागत से तैयार हुआ यह ढांचा अब केवल एक शोपीस बनकर रह गया है। समय-समय पर इसके रखरखाव के नाम पर रंगाई-पुताई जरूर कराई जाती है, लेकिन नलों तक पानी कभी नहीं पहुंचा। इसके ठीक बगल में बना सरकारी सार्वजनिक शौचालय भी अधिकारियों की अनदेखी का शिकार है। शौचालय के दरवाजों पर लगातार ताला जड़ा रहता है, जिससे परिसर के निवासियों और राहगीरों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ये भी पढ़ें

भीषण गर्मी में 50 डिग्री तापमान और चापाकल का सहारा

आवास परिसर में पिछले 10 वर्षों से रह रही नीलम देवी बताती हैं कि सरकार की ओर से उन्हें रहने के लिए पक्का मकान तो मिल गया, लेकिन पानी की व्यवस्था न होना उनके जीवन की सबसे बड़ी मुसीबत बन चुका है। उनके घर में कमरा, रसोई और शौचालय सब बना है, परंतु नलों में पानी की एक बूंद नहीं आती। पूरे परिवार को पानी की जरूरत पूरी करने के लिए परिसर में लगे चापाकल पर निर्भर रहना पड़ता है। अगस्त के महीने में मानसूनी बारिश के कारण थोड़ी राहत मिल जाती है, लेकिन अप्रैल, मई और जून के महीनों में स्थिति भयानक रूप ले लेती है। गर्मी के मौसम में चंदौली का तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसे प्रचंड तापमान में चापाकल से बाल्टियां भर-भरकर बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों तक ले जाना बेहद कष्टदायक साबित होता है। इस कठिन प्रक्रिया में सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ती है।

चुनावी वादों और जमीनी हकीकत के बीच पिसते निवासी

स्थानीय निवासी माधवेंद्र मूर्ति ओझा का कहना है कि सरकार ने कांशीराम शहरी आवास बनाकर गरीबों को छत तो दे दी, लेकिन बुनियादी ढांचे का विकास अधूरा छोड़ दिया। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि हर चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। यदि टंकी से नियमित जल आपूर्ति शुरू कर दी जाती, तो लोगों को रोजाना भारी बाल्टियां ढोने की मजबूरी से मुक्ति मिल जाती। वहीं, पूर्व प्रधान संजय सिंह ने भी जल संकट और बंद पड़े शौचालय को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी शौचालय चालू रहता, तो विशेष रूप से महिलाओं और नवयुवतियों को काफी सहूलियत मिलती। उनका मानना है कि केवल इमारतें खड़ी कर देना विकास नहीं है, बल्कि लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना ही वास्तविक विकास कहलाता है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

जल निकासी की बदहाली और कचरा प्रबंधन पर सवाल

कांशीराम आवास परिसर में केवल पानी की किल्लत ही अकेली समस्या नहीं है, बल्कि जल निकासी और साफ-सफाई की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है। कॉलोनी की नालियों के गंदे पानी की निकासी के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं किया गया है। नालियों का दूषित जल पास ही स्थित एक गड्ढे और नहरनुमा खाली स्थान में एकत्रित होता रहता है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बना रहता है। हालांकि परिसर में सूखे और गीले कचरे के निस्तारण के लिए डस्टबिन स्थापित किए गए हैं, लेकिन उनके नियमित रखरखाव और सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे कचरा प्रबंधन के दावे भी हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।

प्रशासन से बुनियादी सुविधाओं की स्थायी बहाली की मांग

परिसर के निवासियों की स्पष्ट मांग है कि वर्षों से निष्प्रयोज्य पड़ी पानी की टंकी को तत्काल मरम्मत कराकर चालू किया जाए और सरकारी शौचालय का ताला खोलकर उसे नियमित रूप से संचालित किया जाए। इसके साथ ही गंदे पानी की निकासी के लिए पक्की नालियों का निर्माण कराया जाए। निवासियों का कहना है कि जब तक पीने का पानी, स्वच्छता और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक विकास के तमाम सरकारी दावे अधूरे ही रहेंगे। करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद हैंडपंप पर टिकी यह आबादी अब स्थानीय प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की गुहार लगा रही है।

सवाल-जवाब

चंदौली के कांशीराम आवास परिसर में पानी की क्या समस्या है?
यहां पानी की विशाल टंकी का निर्माण तो किया गया है, लेकिन 10 साल से उसमें पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई है। निवासियों को चापाकल से पानी भरना पड़ता है।
भीषण गर्मी में निवासियों को क्या परेशानियां उठानी पड़ती हैं?
गर्मी में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे चापाकल से पानी भरकर बाल्टियों द्वारा ऊपरी मंजिलों तक ले जाना बहुत कठिन हो जाता है।
सरकारी शौचालय की क्या स्थिति है?
पानी की टंकी के पास बना सरकारी शौचालय लगातार बंद पड़ा है और उसके दरवाजों पर ताला लगा रहता है, जिससे लोग इसका उपयोग नहीं कर पाते।
कांशीराम आवास परिसर में जल निकासी की क्या समस्या है?
परिसर में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे गंदा पानी पास के गड्ढे में जमा होता है और गंदगी व बदबू फैलती है।
स्थानीय निवासियों और पूर्व प्रधान की मुख्य मांगें क्या हैं?
स्थानीय लोगों और पूर्व प्रधान संजय सिंह ने बंद पड़ी टंकी को तुरंत चालू करने, शौचालय का ताला खोलने और स्थायी जलापूर्ति व जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR