उत्तराखंड राज्य सरकार ने देहरादून जिले में टोंस नदी पर निर्मित नई पुल परियोजना की एप्रोच सड़क ढहने के मामले में कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाया है। प्रेमनगर के समीप नंदा की चौकी क्षेत्र में हाल ही में चालू किए गए पुल की एप्रोच सड़क मानसून की पहली ही तेज बारिश में धंस गई, जिससे पूरी सड़क पर एक गहरा गड्ढा बन गया। इस गंभीर हादसे के बाद लोक निर्माण विभाग ने मामले की प्रारंभिक जांच कराई और निर्माण कार्य की निगरानी व गुणवत्ता में ढिलाई बरतने के आरोप में 7 अगस्त को तीन वरिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबित अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
विभागीय आदेश के अनुसार, गाज गिरने वाले अधिकारियों में अधिशासी अभियंता राजेश कुमार, सहायक अभियंता अमित कुमार त्यागी और कनिष्ठ अभियंता नवीन गैरोला शामिल हैं। अधिशासी अभियंता राजेश कुमार प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून के तहत इस निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे थे। राज्य शासन ने प्राथमिक पड़ताल में पाया कि इन अधिकारियों ने तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंधीय शर्तों का पालन कराने में गंभीर त्रुटि की है। अपने कर्तव्यों के प्रति इस ढिलाई से सार्वजनिक हित प्रभावित हुआ और प्रशासनिक छवि को नुकसान पहुंचा। निलंबन अवधि के दौरान तीनों अधिकारियों को जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा तथा वे नियमानुसार निर्धारित कार्यालयों से संबद्ध रहेंगे।
16 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था निर्माण
यह पुल पुराने देहरादून से पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग पर नंदा की चौकी के पास टोंस नदी पर बनाया गया है। लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस संरचना को हाल ही में आम जनता की आवाजाही के लिए खोला गया था। हालांकि, पहली बारिश में ही सड़क का हिस्सा धंस जाने से हड़कंप मच गया। हादसे के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर इस सड़क पर सभी तरह का यातायात रोक दिया गया। इस रास्ते के बंद हो जाने से आसपास के ग्रामीण इलाकों का राज्य की राजधानी देहरादून से सीधा संपर्क कट गया, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रारंभिक जांच में खुली तकनीकी खामियों की पोल
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय मुख्य अभियंता ने स्थल निरीक्षण कर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 3 अगस्त को शासन को सौंपी। जांच रिपोर्ट में परियोजना के डिजाइन और क्रियान्वयन के स्तर पर कई बुनियादी कमियां पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, डिजाइन कंसल्टेंट द्वारा नदी के बहाव को मोड़ने यानी रिवर डायवर्जन वर्क के लिए जरूरी डिजाइन उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इसके अलावा, टोंस नदी के तल के ढलान और उसके घुमावदार स्वभाव को ध्यान में रखते हुए नदी नियंत्रण संबंधी सुरक्षा उपाय दिए जाने चाहिए थे, जिनकी पूरी तरह अनदेखी की गई।
कटाव के कारण सड़क के नीचे बनी गहरी कैविटी
उचित तकनीकी उपाय न किए जाने का परिणाम यह हुआ कि नदी का जलप्रवाह एक ही स्पान की ओर केंद्रित हो गया। पानी का दबाव बढ़ने से एबटमेंट के ऊपरी हिस्से में तेज कटाव हुआ, जिससे सड़क के नीचे की मिट्टी बह गई और एक बड़ी कैविटी बन गई। इसी खोखलेपन की वजह से नवनिर्मित एप्रोच सड़क ढह गई। जांच में स्पष्ट किया गया कि संबंधित इंजीनियरों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरीके से नहीं किया। घटनाक्रम से जुड़ी अन्य जानकारियां सोशल मीडिया मंच X पर साझा की गई हैं।



















