झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के मामलों को लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस जन आंदोलन को अब कला जगत से भी बड़ा समर्थन मिला है। प्रसिद्ध अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे और सत्याग्रह पर बैठे छात्रों के साथ खड़े नजर आए। उन्होंने रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर अनशन कर रहे युवाओं से सीधी बातचीत की और उनकी न्यायसंगत मांगों का खुलकर समर्थन किया।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में गूंजा 'आरंभ है प्रचंड'
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी इस आंदोलन के दौरान पीयूष मिश्रा ने अभ्यर्थियों के बीच अपना लोकप्रिय गीत 'आरंभ है प्रचंड' गाया। इस गीत को सुनते ही वहां उपस्थित सैकड़ों युवाओं में जबरदस्त जोश भर गया और पूरा मैदान नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारी छात्र अपनी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने और राज्य की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार लागू करने की मांग कर रहे हैं। यह अनशन और आंदोलन 29 जुलाई से लगातार चल रहा है, जहां युवा अपनी मांगों को लेकर टिके हुए हैं।
मुंबई फिल्म उद्योग की चुप्पी पर जताई शर्मिंदगी
छात्रों को संबोधित करते हुए पीयूष मिश्रा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में आंदोलनरत युवाओं के कई साक्षात्कार देखे थे। उन वीडियो में छात्रों की आंखों में झलकते दर्द और अनिश्चित भविष्य की परेशानी ने उन्हें भीतर तक हिला दिया। इसी पीड़ा को महसूस करते हुए उन्होंने तुरंत रांची जाने का निर्णय लिया। मिश्रा के पास केवल दो दिन का समय उपलब्ध था, जिसे उन्होंने बिना समय गंवाए छात्रों के साथ बिताने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा अफसोस और शर्मिंदगी है कि मुंबई फिल्म उद्योग से इतने बड़े मुद्दे पर नाममात्र के लोग ही बोल रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पूरे सिनेमा जगत को एक ही तराजू में नहीं तौला जाना चाहिए, क्योंकि वहां भी ऐसे संवेदनशील लोग मौजूद हैं जो इन अभ्यर्थियों के संघर्ष में उनके साथ खड़े हैं।
मर्यादा, अनुशासन और राजनीति से दूर रहने की नसीहत
अभ्यर्थियों को देश का असली निर्माता और उज्ज्वल भविष्य बताते हुए अभिनेता ने उनके जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवाओं का यह संघर्ष पूरी तरह प्रासंगिक है और उन्हें अपनी लोकतांत्रिक आवाज मजबूती से उठानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को आंदोलन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने का कड़ा संदेश भी दिया। पीयूष मिश्रा ने कहा कि विरोध प्रदर्शन पूरी तरह अनुशासित और शांतिपूर्ण होना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की अभद्र भाषा, गाली-गलौज या बदतमीजी का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने युवाओं को किसी भी राजनीतिक दल के हस्तक्षेप से दूर रहने की हिदायत दी ताकि उनके वास्तविक मुद्दे का भटकाव न हो।
प्रदर्शन स्थल पर राहत सामग्री और आर्थिक मदद की घोषणा
मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वे रांची केवल नैतिक समर्थन देने नहीं आए हैं, बल्कि धरातल पर छात्रों की व्यावहारिक समस्याओं को हल करने का प्रयास भी कर रहे हैं। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने आंदोलन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है। इसमें छात्रों के लिए समय पर भोजन व्यवस्था, आपातकालीन मेडिकल सहायता, आर्थिक सहयोग, गद्दे, दरियां और बारिश से बचाव के लिए तिरपाल उपलब्ध कराना शामिल है। पीयूष मिश्रा ने अपने अन्य साथियों और सक्षम नागरिकों से भी अपील की कि वे आगे आएं और सत्याग्रह कर रहे इन छात्रों की जरूरतों को पूरा करने में अपना योगदान दें।



















