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दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 20 सितंबर से पूरी तरह शुरू होगा तीसरा रनवेदिल्ली
19 सित॰ 2026, 2:49 pm (41 दिन पहले)· 0

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 20 सितंबर से पूरी तरह शुरू होगा तीसरा रनवे

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का तीसरा रनवे 11R/29L बड़े स्तर पर नवीनीकरण के बाद 20 सितंबर 2026 से दोबारा पूरी तरह चालू किया जा रहा है। नए रैपिड एग्जिट टैक्सीवे और आधुनिक ग्राउंड लाइटिंग से उड़ानों का संचालन तेज होगा।

देश की राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के तीसरे रनवे 11R/29L पर व्यापक स्तर पर चला नवीनीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है। करीब सत्रह वर्षों के लंबे इस्तेमाल के बाद कराए गए इस बड़े अपग्रेड के पश्चात यह रनवे 20 सितंबर 2026 से फिर से नियमित परिचालन में लौट रहा है। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने इस पूरे पुनरुद्धार कार्य के विधिवत समाप्त होने और रनवे को दोबारा सक्रिय करने के लिए आवश्यक सभी वैधानिक व विनियामक अनुमतियां मिलने की पुष्टि की है।

फरवरी से चल रहा था सघन आधुनिकीकरण का काम

इस तीसरे रनवे के कायाकल्प की योजना पर काम फरवरी 2026 के महीने में प्रारंभ किया गया था। इस परियोजना के अंतर्गत सिर्फ रनवे की ऊपरी सतह की मरम्मत अथवा री-सर्फेसिंग ही नहीं की गई, बल्कि विमानतल के एयरसाइड से जुड़े कई बेहद अहम आधारभूत ढांचों को पूरी तरह आधुनिक बनाया गया है। इस पूरे प्रयास का प्राथमिक लक्ष्य रनवे की समग्र सुरक्षा, परिचालन क्षमता तथा दैनिक कार्यकुशलता को नई ऊंचाई प्रदान करना है। नवीनीकरण के दौरान रनवे की सतह को नया रूप देकर उसके पेवमेंट को अत्यधिक सुदृढ़ बनाया गया है, जिससे भारी विमानों की आवाजाही को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सके।

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नए रैपिड एग्जिट टैक्सीवे और तकनीकी सुधारों की शुरुआत

हवाई पट्टी के एयरसाइड तंत्र में कई विशिष्ट तकनीकी बदलाव किए गए हैं। इनमें रनवे 29L के परमानेंट थ्रेशहोल्ड डिस्प्लेसमेंट का कार्य सफलतापूर्वक पूरा करना शामिल है। इसके अलावा, लैंडिंग करने वाले हवाई जहाजों को पट्टी से अत्यंत शीघ्रता से बाहर निकालने के उद्देश्य से एक नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे (आरईटी ज़ेड1) भी निर्मित किया गया है। रनवे की दृश्यता और सुरक्षा मानकों को सशक्त करने के लिए एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम को नए सिरे से अपग्रेड किया गया है, साथ ही उससे जुड़े सभी सिविल और इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के बुनियादी ढांचे में व्यापक तकनीकी सुधार किए गए हैं।

उड़ानों की आवाजाही में आएगी तेजी और घटेगा समय

डायल के अनुसार, इन ढांचागत उन्नयनों के फलस्वरूप विमानों के आवागमन की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सुव्यवस्थित और तीव्र हो सकेगी। नव-निर्मित रैपिड एग्जिट टैक्सीवे की सहायता से उतरने वाले विमान हवाई पट्टी को बेहद कम समय में खाली कर सकेंगे। इससे रनवे पर विमानों के व्यतीत होने वाले समय (रनवे ऑक्यूपेंसी टाइम) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होगी और पूरे एयरपोर्ट की परिचालन दक्षता में वृद्धि होगी। उन्नत ग्राउंड लाइटिंग और आधुनिक एयरफील्ड प्रणालियों के सक्रिय होने से प्रतिकूल या बदलती मौसम परिस्थितियों में भी रनवे की परिचालन विश्वसनीयता सुदृढ़ रहेगी।

कड़े सुरक्षा निरीक्षणों और मंजूरियों के बाद बहाली

रनवे 11R/29L पर वाणिज्यिक उड़ानों की पुनः शुरुआत करने से पूर्व नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी), संबंधित एयरलाइंस और अन्य आवश्यक वैधानिक प्राधिकरणों के साथ व्यापक तकनीकी निरीक्षण, प्रमाणीकरण और विनियामक औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। डायल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पाणिकर ने स्पष्ट किया कि तीसरे रनवे का पुनः संचालन दिल्ली हवाई अड्डे के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हुआ है। उन्होंने रेखांकित किया कि उन्नत रनवे, नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे तथा बेहतर नेविगेशन व लाइटिंग प्रणालियां मिलकर हवाई अड्डे की समग्र क्षमता और परिचालन मजबूती को विस्तार देंगे। ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो रनवे 11R/29L को वर्ष 2008 में पहली बार चालू किया गया था और यह करीब 17 वर्षों तक अनवरत सक्रिय रहा, जबकि वर्ष 2017 में इस पर सीमित स्तर का नवीनीकरण और रखरखाव कार्य किया गया था।

सवाल-जवाब

दिल्ली हवाई अड्डे का तीसरा रनवे कब से दोबारा शुरू हो रहा है?
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का तीसरा रनवे 11R/29L पुनर्वास कार्य पूरा होने के बाद 20 सितंबर 2026 से दोबारा परिचालन में आ रहा है।
इस रनवे का नवीनीकरण कार्य कब प्रारंभ हुआ था?
तीसरे रनवे के बुनियादी ढांचे और सतह के नवीनीकरण का काम फरवरी 2026 में शुरू किया गया था।
इस जीर्णोद्धार में कौन से प्रमुख तकनीकी बदलाव किए गए हैं?
रनवे की री-सर्फेसिंग और पेवमेंट मजबूती के साथ नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे (आरईटी ज़ेड1), थ्रेशहोल्ड डिस्प्लेसमेंट और आधुनिक ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम लगाया गया है।
नए रैपिड एग्जिट टैक्सीवे से उड़ानों को क्या फायदा होगा?
इसके जरिए लैंडिंग करने वाले विमान रनवे को कम समय में खाली कर सकेंगे, जिससे रनवे ऑक्यूपेंसी टाइम घटेगा और एयरपोर्ट की परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
रनवे को दोबारा शुरू करने से पहले किन एजेंसियों से अनुमति ली गई?
इसके लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) सहित संबंधित प्राधिकरणों से विनियामक मंजूरियां ली गईं।
यह तीसरा रनवे पहली बार कब शुरू किया गया था?
रनवे 11R/29L को मूल रूप से वर्ष 2008 में चालू किया गया था और इसने लगभग 17 वर्षों तक लगातार सेवाएं दी हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·40 दिन पहले

राजधानी के मुख्य विमानतल पर तीसरे रनवे के इस व्यापक कायाकल्प और रैपिड एग्जिट टैक्सीवे के जुड़ने से विमानों की आवाजाही में लगने वाला समय काफी कम होगा। सत्रह साल बाद हुए इस बड़े अपग्रेड और उन्नत ग्राउंड लाइटिंग प्रणालियों के सक्रिय होने से प्रतिकूल मौसम में भी उड़ानों के संचालन की दक्षता और सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी, जिससे भारी एयर ट्रैफिक दबाव वाले इस क्षेत्र में विमानन प्रबंधन को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 दिन पहले

राष्ट्रीय राजधानी के मुख्य विमानतल पर इस सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रनवे का पुनः संचालन ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब देश के भीतर नागरिक उड्डयन बाजार तीव्र गति से विस्तार पा रहा है। सत्रह वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात हुआ यह व्यापक कायाकल्प और इसके साथ जोड़े गए नए तकनीकी उपाय न केवल विमानों के आवागमन को सुगम बनाएंगे, बल्कि आने वाले समय में व्यस्त यात्रा सत्रों के दौरान हवाई यातायात प्रबंधन और सुरक्षा मानकों को भी सुदृढ़ आधार प्रदान करेंगे।

Tanvi Desai@tanvi-desai·40 दिन पहले

राष्ट्रीय राजधानी के मुख्य विमानतल पर बुनियादी ढांचे के इस बड़े उन्नयन का प्रभाव केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश की आर्थिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में दिल्ली की वैश्विक कनेक्टिविटी को भी मजबूती देगा। बढ़ते हवाई यातायात के बीच अत्याधुनिक ग्राउंड लाइटिंग और रैपिड एग्जिट टैक्सीवे जैसी तकनीकें न केवल परिचालन को निर्बाध बनाएंगी, बल्कि यात्रा के क्षेत्र में उच्च दक्षता के नए मानक स्थापित करेंगी, जिससे यात्रियों को भी बेहतर और समयबद्ध अनुभव प्राप्त होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·40 दिन पहले

यह बुनियादी ढांचा सुधार सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के यात्रियों के लिए भी बेहद अहम है, क्योंकि नोएडा और पश्चिमी यूपी से आने वाले लाखों लोग दिल्ली हवाई अड्डे का उपयोग करते हैं। रनवे की क्षमता बढ़ने और उतरने का समय घटने से फॉग या खराब मौसम में उड़ानों की लेट-लतीफी कम होगी, जिससे दिल्ली-NCR के साथ उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संपर्क और व्यापारिक आवागमन को भी सुचारू गति मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 दिन पहले

करण मल्होत्रा का मानना है कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा, नियामक अनुपालन और एटीसी समन्वय के दृष्टिकोण से यह तकनीकी उन्नयन बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। रनवे की क्षमता बढ़ने से सुरक्षा ऑडिट के मानकों को मजबूती मिलेगी और व्यस्त हवाई क्षेत्र में सुरक्षा जोखिमों को कम करने में सीधी मदद मिलेगी।

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