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दिल्ली के जसोला में खुला नाला बना काल, आठवीं का छात्र बहा, तलाश बंद होने पर सड़क पर उतरे लोगदिल्ली
23 अग॰ 2026, 11:39 pm (22 दिन पहले)· 4

दिल्ली के जसोला में खुला नाला बना काल, आठवीं का छात्र बहा, तलाश बंद होने पर सड़क पर उतरे लोग

दिल्ली के जसोला गांव में आठवीं कक्षा का 14 वर्षीय छात्र मिथुन खुला नाला पार करते समय पानी में बह गया। दो दिन तक तलाश के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन रोके जाने पर भड़के परिजनों ने सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया।

राजधानी दिल्ली के जसोला गांव में एक बार फिर प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां एक खुले नाले में गिरने से मासूम की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। शनिवार सुबह करीब 11 बजे आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला 14 वर्षीय छात्र मिथुन खुले नाले में जा गिरा और पानी के तेज बहाव में बह गया। इस घटना के बाद से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लगातार दो दिनों तक चले तलाश अभियान के बावजूद जब बच्चे का कोई सुराग हाथ नहीं लगा, तो प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन बंद करने का फैसला किया, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।

माता-पिता गए थे काम पर, पीछे से हुआ हादसा

हादसे के वक्त मिथुन के माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। बच्चे के पिता अवधेश ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वह और उनकी पत्नी दोनों ही अपने-अपने काम पर गए हुए थे। जब उन्हें इस भयंकर दुर्घटना की जानकारी मिली, तो वे सब कुछ छोड़कर तुरंत घर भागे। माता-पिता ने स्थानीय निवासियों की सहायता से खुद ही बच्चे की तलाश शुरू की। जब काफी मशक्कत के बाद भी मिथुन का कहीं पता नहीं चल सका, तब पुलिस और दमकल विभाग को इस पूरी घटना की सूचना दी गई।

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सर्च ऑपरेशन बंद होने पर फूटा गुस्सा

खबर मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और गोताखोरों का दल मौके पर पहुंच गया और नाले में बच्चे को खोजने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। लगातार दो दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद भी जब मासूम मिथुन का कुछ पता नहीं चला, तो रविवार दोपहर के बाद अधिकारियों ने सर्च ऑपरेशन को रोकने का निर्णय लिया। इसके विरोध में भड़के परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने जसोला मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया और जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रशासन ने दोबारा शुरू किया अभियान

सड़क पर उतरे परिजनों के भारी विरोध और बढ़ते जनआक्रोश को देखकर पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। स्थिति को बेकाबू होते देख पुलिस ने दोबारा से सर्च ऑपरेशन शुरू करने का निर्देश दिया। इसके लिए मौके पर जेसीबी मशीन को बुलवाया गया है, ताकि नाले के अंदर जमी दलदल और मिट्टी को निकालकर बच्चे की तलाश का काम फिर से तेजी से चलाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे को ढूंढने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

आपको बता दें कि राजधानी दिल्ली में खुले नालों के कारण हादसों का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ ही समय पहले दिल्ली के जगतपुर गांव में भी ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया था, जहां स्कूल से अपने घर लौट रहे तीन बच्चे अचानक नाले में जा गिरे थे। हालांकि उस समय गनीमत यह रही कि मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत अपनी सूझबूझ और सतर्कता दिखाई, जिससे बच्चों के हाथ पकड़कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। बारिश के मौसम में नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं और जलभराव के कारण राहगीरों को नालों का सही अंदाजा नहीं मिल पाता है, जिसके चलते वे इनका शिकार बन जाते हैं।

सवाल-जवाब

जसोला नाले में कौन गिरा था?
जसोला गांव में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला 14 वर्षीय छात्र मिथुन खुले नाले में गिर गया था।
यह हादसा कब हुआ था?
यह दुर्घटना शनिवार सुबह करीब 11 बजे हुई थी।
परिजनों ने प्रदर्शन क्यों किया?
दो दिन तक लगातार तलाश के बाद जब प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन बंद कर दिया, तो गुस्से में परिजनों ने सड़क पर जाम लगा दिया।
तलाश के लिए क्या कदम उठाए गए?
विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मौके पर जेसीबी मशीन बुलवाकर नाले की दलदल और मिट्टी निकालने का काम फिर से शुरू कराया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·22 दिन पहले

राष्ट्रीय राजधानी में खुले नालों के कारण होने वाले ये हादसे केवल स्थानीय नागरिकों की असुविधा का विषय नहीं हैं, बल्कि यह शहरी बुनियादी ढांचे की गंभीर विफलता को दर्शाते हैं। बार-बार चेतावनी मिलने और पहले भी ऐसी दुर्घटनाएं होने के बावजूद प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। यदि समय रहते इन खतरनाक नालों को ढकने और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो ऐसे जानलेवा हादसे भविष्य में भी दोहराए जाते रहेंगे, जिससे जनता का व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 दिन पहले

यह घटना प्रशासनिक विफलता और नगरीय शासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। खुले नाले और उनपर सुरक्षा इंतजामों की कमी राजधानी में नागरिक सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़े करती है। इस तरह के हादसे केवल दुर्घटना नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी का परिणाम हैं, जिसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए और नीतिगत स्तर पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा भूलों को रोका जा सके।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·22 दिन पहले

राजधानी में बुनियादी नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर की यह बदहाली सिर्फ प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि खेल और बाहरी गतिविधियों के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। जब तक हर खुले नाले पर स्थायी जाली और बैरिकेडिंग जैसी बुनियादी सुरक्षा नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे नहीं रुकेंगे। अधिकारियों को सिर्फ विरोध प्रदर्शन के बाद ही एक्शन मोड में आने की आदत छोड़नी होगी और जवाबदेही तय करनी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

यह घटना प्रशासनिक संवेदनहीनता और लचर बुनियादी ढांचे का जीता-जागता प्रमाण है। राजधानी में खुले नाले मौत का कुआं बन चुके हैं, जहाँ अधिकारियों की जवाबदेही सिर्फ विरोध प्रदर्शन के बाद ही जागती है। जब तक सुरक्षा ऑडिट और कवर निर्माण जैसे स्थायी कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ऐसे हादसों में मासूमों की जानें जाती रहेंगी और जनता का आक्रोश सड़कों पर फूटता रहेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही का मामला है। जब तक दिल्ली के इन खुले और जानलेवा नालों की जवाबदेही तय कर संबंधित विभागों और ठेकेदारों पर गैर-इरादतन हत्या या सख्त कानूनी धाराओं में मुकदमे दर्ज नहीं किए जाते, तब तक सिस्टम की नींद नहीं खुलेगी। केवल सड़क पर प्रदर्शन के बाद रेस्क्यू दोबारा शुरू करना प्रशासनिक विफलता पर पर्दा डालने जैसा है, जबकि जरूरत सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की है।

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