दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत गिरने से हुए दुखद हादसे के सम्मान में 'मनोज तिवारी लाइव इन कॉन्सर्ट – हिंद के सितारा' को स्थगित कर दिया गया है। आयोजकों की टीम ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि सितंबर में होने वाले इस संगीतमय कार्यक्रम को फिलहाल रोक दिया गया है। हादसे से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि टिकट खरीदने वाले सभी लोगों को पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा, जबकि कॉन्सर्ट की नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी।
हिंद के सितारा कॉन्सर्ट स्थगित, दर्शकों को मिलेगा रिफंड
मनोज तिवारी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी संदेश के अनुसार, सत्य निकेतन की दर्दनाक घटना की वजह से सितंबर महीने का शो आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति जताई और कहा कि इस कठिन समय में सभी की प्रार्थनाएं उनके साथ हैं। जिन दर्शकों ने इस लाइव शो के लिए पहले ही टिकट ले लिए थे, उन्हें उनके पैसों का शत-प्रतिशत भुगतान लौटाया जाएगा।
सत्य निकेतन में हॉस्टल इमारत ढहने से बड़ा हादसा
यह भयावह हादसा 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में हुआ, जहाँ 'हॉस्टल डेज़' नामक लड़कों का पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (पीजी) हॉस्टल अचानक भरभराकर गिर गया। इस ढांचागत विफलता के कारण कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हॉस्टल में आसपास के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले कई छात्र निवास कर रहे थे।
छात्रों का प्रदर्शन और हाई कोर्ट की सख्ती
हादसे के तुरंत बाद राजधानी में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। प्रदर्शनकारियों ने निजी छात्रावासों की सुरक्षा जांच कराने और छात्रों को बुनियादी सुविधाएं देने की मांग उठाई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के अनुपालन को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से विस्तृत जवाब मांगा है।
सोनू सूद ने उठाए छात्रों के आवास पर गंभीर सवाल
इस दुखद घटना पर बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने देश भर से पढ़ाई के लिए आने वाले युवाओं की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए बुनियादी ढांचे की कमियों को उजागर किया। उन्होंने सवाल उठाया कि हर साल लाखों युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए बड़े शहरों का रुख करते हैं, लेकिन क्या समाज उन्हें रहने योग्य सुरक्षित माहौल दे पा रहा है।
आंकड़े पेश करते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली में लगभग 7 लाख छात्र नामांकित हैं, जबकि विश्वविद्यालयों के पास हॉस्टल की क्षमता केवल 30 हजार के करीब है। इसका सीधा मतलब यह है कि 31 में से सिर्फ 1 छात्र को ही सुरक्षित हॉस्टल मिल पाता है। इस समस्या के समाधान के रूप में उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों के पास मौजूद खाली सरकारी जमीन की पहचान करके वहां किफायती हॉस्टल बनाए जाने चाहिए और परिसरों के भीतर अतिरिक्त हॉस्टल निर्माण की अनुमति तुरंत दी जानी चाहिए।



















