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दिल्ली में नकली अभयराब एंटी-रेबीज वैक्सीन रैकेट का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तारदिल्ली
9 सित॰ 2026, 12:11 am (6 दिन पहले)· 2

दिल्ली में नकली अभयराब एंटी-रेबीज वैक्सीन रैकेट का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली के मुखर्जी नगर में बिना लाइसेंस वाली दुकान से भारी मात्रा में नकली अभयराब वैक्सीन जब्त की गई है। लैब जांच में सैंपल फेल होने के बाद DCGI ने देशभर में अलर्ट जारी कर दिया है।

राजधानी दिल्ली में नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन बेचने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने 22 अप्रैल को मुखर्जी नगर स्थित एक बिना लाइसेंस वाली मेडिकल दुकान पर छापेमारी कर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली रेबीज रोधी वैक्सीन 'अभयराब' की नकली शीशियां बरामद कीं। इन जब्त शीशियों के सैंपल कसौली स्थित सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजे गए थे, जहां लैब टेस्ट में यह वैक्सीन पूरी तरह फेल साबित हुई। नकली और निष्प्रभावी जीवनरक्षक दवा बेचने के इस गंभीर मामले में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

नामी कंपनी के बैच नंबर की आड़ में पैकेजिंग का फर्जीवाड़ा

'अभयराब' वैक्सीन का निर्माण प्रसिद्ध फार्मास्युटिकल कंपनी 'इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड' करती है। मामले के सामने आने के बाद जब संबंधित कंपनी से संपर्क साधा गया, तो कंपनी के प्रतिनिधियों ने पुष्टि की कि जब्त की गई शीशियों पर अंकित बैच नंबर असली है। कंपनी के अनुसार, इस विशिष्ट बैच की तैयार वैक्सीन का आवश्यक परीक्षण और गुणवत्ता जांच पूरी करने के बाद ही बाजार में वैध सप्लाई के लिए भेजा गया था। हालांकि, लैब जांच में खुलासा हुआ कि मेडिकल स्टोर से बरामद की गई बॉटल्स पर चिपकाए गए लेबल और क्यूआर कोड पूरी तरह फर्जी हैं। जालसाजों ने असली कंपनी के प्रामाणिक बैच नंबर की आड़ में नकली दवा पर जाली रैपर लगाकर खुले बाजार में खपाने का आपराधिक षड्यंत्र रचा था।

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DCGI ने जारी किया अलर्ट, देशभर के राज्यों को चौकस रहने के निर्देश

इस खतरनाक फर्जीवाड़े की गंभीरता को देखते हुए ड्रग कंट्रोलर General of India (DCGI) ने तत्काल प्रभाव से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को हाई अलर्ट जारी कर दिया है। DCGI ने अधिकारियों को अभयराब वैक्सीन के इस खास प्रभावित बैच की बिक्री, वितरण और उपलब्धता पर सख्त और निरंतर निगरानी बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस अंतरराज्यीय रैकेट का जाल कहां-कहां फैला हुआ है, ये नकली शीशियां किन-किन मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों में सप्लाई की गईं, और बीते कुछ महीनों के दौरान कितने मरीजों को यह नकली इंजेक्शन लगाया जा चुका है।

वैक्सीन निष्प्रभावी रहने पर रेबीज संक्रमण से मौत निश्चित

चिकित्सा विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्टों ने चेतावनी दी है कि रेबीज एक ऐसा जानलेवा वायरल संक्रमण है जिसका कोई इलाज नहीं है और केवल ससमय प्रामाणिक वैक्सीनेशन ही मरीज की जान बचा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को आवारा या संक्रमित कुत्ते के काटने के बाद नकली या गुणहीन वैक्सीन लगा दी जाती है, तो उसके शरीर में रेबीज वायरस से लड़ने के लिए आवश्यक एंटीबॉडी विकसित ही नहीं हो पाती हैं। ऐसी स्थिति में संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचकर मरीज के लिए जानलेवा साबित होता है और उसकी मृत्यु निश्चित हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनरक्षक दवाओं में इस प्रकार की जालसाजी करने वालों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो सके।

सवाल-जवाब

दिल्ली में कौन सी नकली वैक्सीन पकड़ी गई है?
दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक बिना लाइसेंस वाली मेडिकल दुकान से एंटी-रेबीज वैक्सीन 'अभयराब' की नकली शीशियां जब्त की गई हैं।
वैक्सीन का सैंपल किस प्रयोगशाला में फेल साबित हुआ?
कसौली स्थित सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी (CDL) में जांच के बाद जब्त की गई अभयराब वैक्सीन का सैंपल पूरी तरह फेल पाया गया।
नकली वैक्सीन की पहचान कैसे छिपाने की कोशिश की गई थी?
जालसाजों ने इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड के असली बैच नंबर का उपयोग किया था, लेकिन शीशियों पर लगाए गए क्यूआर कोड और लेबल फर्जी थे।
यदि किसी मरीज को नकली रेबीज वैक्सीन लग जाए तो क्या खतरा है?
नकली वैक्सीन शरीर में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी नहीं बना पाती है, जिससे संक्रमण फैलने पर मरीज की मृत्यु होना निश्चित है।
इस मामले में प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और DCGI ने देशभर के राज्यों को इस विशिष्ट बैच की बिक्री रोकने के लिए अलर्ट जारी किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·5 दिन पहले

यह घटना जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है, विशेषकर इसलिए क्योंकि रेबीज जैसे जानलेवा संक्रमण में नकली टीके का इस्तेमाल सीधे तौर पर मौत का कारण बनता है। मुखर्जी नगर के इस खुलासे के बाद अब यह पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती होगी कि इस अंतरराज्यीय रैकेट का दायरा कहां तक फैला है और क्या ये नकली शीशियां अन्य राज्यों के अस्पतालों तक भी पहुंची हैं या नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

अर्जुन मेहता का विश्लेषण: यह घटना केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला है। बिना लाइसेंस की दुकानों और जाली क्यूआर कोड का उपयोग यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी में गंभीर खामियां हैं। डीसीजीआई के अलर्ट के बाद अब यह जरूरी है कि राज्य सरकारें केवल खुदरा विक्रेताओं तक सीमित न रहें, बल्कि इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं और वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचें, ताकि ऐसे जानलेवा रैकेटों पर स्थायी लगाम लगाई जा सके।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·6 दिन पहले

अर्जुन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के जघन्य अपराधों के पीछे गहरी मानसिक और सामाजिक विकृतियां काम करती हैं। जब मुनाफे की हवस में इंसान जीवनरक्षक दवाओं से खिलवाड़ करने लगे, तो यह किसी बड़े अभिशाप से कम नहीं है। अंक ज्योतिष और ऊर्जा के नजरिए से देखें, तो इस तरह के आपराधिक कृत्यों में शामिल लोगों की जन्मकुंडली में ग्रहों की नीच स्थिति और राहु-केतु का नकारात्मक प्रभाव उनकी चेतना को पतन की ओर ले जाता है। ऐसे अपराधियों के वित्तीय और गुप्त नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए सख्त प्रशासनिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर शुद्धि की आवश्यकता है, ताकि समाज इस प्रकार की प्राणघातक आपदाओं से सुरक्षित रह सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

यह मामला सिर्फ कॉपीराइट उल्लंघन या आर्थिक धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है। बिना लाइसेंस वाली दुकान से जीवनरक्षक रेबीज वैक्सीन का नकली निकलना इस बात का संकेत है कि इस गिरोह के तार बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। आगे की जांच में यह पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती होगी कि इस जहरीले और निष्प्रभावी रैकेट का नेटवर्क किन-किन अस्पतालों और अन्य मेडिकल स्टोरों तक फैला है, ताकि समय रहते उन मरीजों की पहचान की जा सके जिन्हें यह नकली इंजेक्शन लग चुका है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

यह घटना न केवल राजधानी की विनियामक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी उजागर करती है कि कैसे बिना लाइसेंस चल रही दुकानें आपराधिक नेटवर्क का अड्डा बन चुकी हैं। चूंकि डीसीजीआई ने देशव्यापी अलर्ट जारी कर दिया है, इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य प्रशासन स्थानीय स्तर पर वितरण श्रृंखला को तोड़ने के लिए कितनी सख्ती से कदम उठाता है।

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