दिल्ली से पुणे जाने वाली स्पाइसजेट की एक उड़ान में 11 अगस्त 2026 की रात उस वक्त स्थिति बेकाबू हो गई, जब एयर-कंडीशनिंग सिस्टम खराब होने के कारण यात्री केबिन के भीतर भीषण गर्मी और उमस से तड़पने लगे. उड़ान संख्या SG-105 में टेकऑफ़ से ठीक पहले वेंटिलेशन बंद हो जाने और तापमान अत्यधिक बढ़ जाने से 100 से अधिक यात्रियों ने यात्रा करने से साफ इनकार कर दिया और विमान के भीतर उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. लंबे समय तक बंद केबिन में रहने के कारण कई यात्रियों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जबकि कुछ महिला यात्रियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें चक्कर आने लगे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विमान को टेकऑफ़ प्रक्रिया रोककर वापस पार्किंग बे में लाना पड़ा, जिसके बाद बीमार यात्रियों को व्हीलचेयर की मदद से टर्मिनल तक पहुंचाया गया.
विमान के पुननिर्धारण और केबिन में अचानक बढ़ी उमस की पूरी कहानी
यह दुखद घटना मंगलवार रात दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर घटित हुई. स्पाइसजेट की फ्लाइट SG-105 को मूल रूप से रात करीब 9:30 बजे पुणे के लिए रवाना होना था. हालांकि, एयरलाइन के परिचालन कारणों की वजह से उड़ान के समय में बदलाव किया गया और इसे रात लगभग 11:30 बजे रीशेड्यूल किया गया. जब यात्री लंबे इंतजार के बाद विमान में सवार हुए, तो उन्हें केबिन के अंदर का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा महसूस हुआ.
शुरुआत में यात्रियों ने इस उम्मीद में धैर्य बनाए रखा कि विमान का इंजन चालू होने और रनवे पर टैक्सी शुरू होने के बाद कूलिंग सिस्टम बेहतर तरीके से काम करने लगेगा. आमतौर पर व्यावसायिक उड़ानों में टेकऑफ़ की तैयारी के दौरान मुख्य इंजन की ताकत से केबिन में हवा का प्रवाह सामान्य होता है. इसी आस में सभी यात्री अपनी सीटों पर बैठे रहे और विमान ने अपनी पार्किंग जगह से निकलकर रनवे की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया.
40 मिनट की टैक्सी के दौरान बिगड़ते हालात और यात्रियों की शारीरिक परेशानी
विमान लगभग 40 से 45 मिनट तक एयरपोर्ट के रनवे और टैक्सीवे पर घूमता रहा, लेकिन केबिन के अंदर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. एसी काम न करने की वजह से बंद विमान के भीतर गर्मी और उमस का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ता चला गया. ताजा हवा का आवागमन पूरी तरह ठप्प होने से पूरे केबिन में घुटन का माहौल बन गया, जिससे यात्रियों का पसीना छूटने लगा और सांस लेना भी भारी होने लगा.
विमान में सवार यात्रियों में गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे, जिनके लिए ऐसी अत्यधिक गर्मी में बिना वेंटिलेशन के बैठना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बन गया. जब यात्रियों ने केबिन क्रू के सदस्यों से एसी चालू करने और स्थिति संभालने की गुहार लगाई, तो उन्हें केवल इंतजार करने की सलाह दी गई. क्रू ने यात्रियों को आश्वस्त करने की कोशिश की कि उड़ान भरते ही हवा का प्रवाह ठीक हो जाएगा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, यात्रियों का सब्र टूट गया.
टेकऑफ़ रोकने की मांग और केबिन के भीतर यात्रियों का जोरदार हंगामा
लगभग पौन घंटे तक बिना कूलिंग के बंद केबिन में फंसे रहने के बाद यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा. यह भांपते हुए कि ऐसी स्थिति में उड़ान भरना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक हो सकता है, 100 से अधिक यात्रियों ने एक साथ विरोध दर्ज कराया. यात्रियों ने अपनी बेल्ट खोल दी, अपनी सीटों से खड़े हो गए और विमान के भीतर ही टेकऑफ़ का विरोध शुरू कर दिया.
यात्रियों ने विमान चालक दल से तत्काल टेकऑफ़ रोकने की मांग की. घुटन महसूस कर रहे कई यात्रियों ने केबिन क्रू से विमान के दरवाजे तुरंत खोलने को कहा ताकि बाहर की ताजा हवा अंदर आ सके. केबिन में बढ़ते भारी हंगामे और यात्रियों के अड़े रहने के कारण विमान क्रू के लिए उड़ान प्रक्रिया को आगे बढ़ाना असंभव हो गया, जिसके बाद पायलट को मजबूरन टेकऑफ़ रद्द करने का फैसला लेना पड़ा.
टैक्सीवे से वापसी, टरमैक पर नारेबाज़ी और महिलाओं की बिगड़ी तबीयत
यात्रियों के भारी विरोध को देखते हुए विमान के पायलट ने फ्लाइट को रनवे से वापस घुमाया और बे की तरफ मोड़ लिया. पार्किंग बे में विमान के रुकते ही क्रू ने मुख्य दरवाजे खोले और यात्रियों को बाहर निकाला गया. हालांकि, बंद केबिन में भीषण गर्मी झेलने के बाद बाहर निकले यात्रियों का आक्रोश शांत नहीं हुआ. कई यात्रियों ने टरमैक पर एकत्र होकर एयरलाइन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया और स्पाइसजेट बंद करो जैसे नारे लगाए.
गर्मी और ऑक्सीजन की कमी के कारण कई यात्रियों को मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ा. कई महिला यात्रियों को तेज चक्कर आने, घबराहट और उल्टी की शिकायत हुई. टर्मिनल परिसर में मौजूद एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ और मेडिकल टीमों को तुरंत बुलाना पड़ा, जिन्होंने गंभीर रूप से प्रभावित महिलाओं को व्हीलचेयर पर बैठाकर टर्मिनल बिल्डिंग के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया.
वैकल्पिक विमान की व्यवस्था और एयरलाइन का आधिकारिक बयान
टरमैक पर हुए हंगामे और यात्रियों के यात्रा करने से मना करने के बाद स्पाइसजेट प्रबंधन हरकत में आया. एयरलाइन ने दिल्ली में फंसे यात्रियों को उनके गंतव्य पुणे भेजने के लिए एक वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की. यह दूसरा विमान बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे दिल्ली से रवाना हुआ और सुबह लगभग 7:00 बजे पुणे पहुंचा. इस पूरी अव्यवस्था की वजह से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कई अतिरिक्त घंटों का मानसिक और शारीरिक कष्ट सहना पड़ा.
मामले के बढ़ने के बाद स्पाइसजेट ने अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए घटना की पुष्टि की. एयरलाइन ने बताया कि टेकऑफ़ से ठीक पहले विमान में अचानक एक तकनीकी खराबी आ गई थी. स्पाइसजेट ने SG-105 के यात्रियों को हुई भारी असुविधा और परेशानी के लिए गहरा खेद व्यक्त किया. एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और खराबी का पता चलते ही यात्रियों को पुणे पहुंचाने के लिए तुरंत दूसरे विमान का प्रबंध किया गया था.
विमानन सुरक्षा नियमों और ग्राउंड हैंडलिंग प्रोटोकॉल पर उठे गंभीर सवाल
हालांकि उड़ानों में तकनीकी खराबी आना एक आम बात हो सकती है, लेकिन इस घटना ने एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों का मानना है कि जब केबिन का कूलिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा था, तब यात्रियों को 40 मिनट से अधिक समय तक बंद विमान के अंदर टैक्सी कराने की अनुमति क्यों दी गई.
यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि वेंटिलेशन या एसी फेल होने की स्थिति में यात्रियों को कितनी देर तक विमान में रखा जा सकता है. अत्यधिक गर्मी में बिना एसी के यात्रियों को लंबे समय तक रखना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है. इस पूरे मामले में यात्रियों के आरोपों और एयरलाइन की तकनीकी रिपोर्ट की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि ग्राउंड ऑपरेशन्स के दौरान सुरक्षा मानकों का सही ढंग से पालन किया गया था या नहीं.


















