भारत के बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हवाई संपर्क को नया विस्तार देने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के अत्यंत करीब स्थित थॉइस एयरफील्ड को अब आम यात्री उड़ानों के संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। लंबे समय तक केवल भारतीय वायुसेना के रणनीतिक सैन्य ऑपरेशन्स और रसद आपूर्ति केंद्र के रूप में उपयोग में लाया जाने वाला यह हवाई अड्डा जल्द ही आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए भी खुल सकता है। इस दूरगामी योजना का मकसद सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों की आवाजाही को सुगम बनाना और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देना है, जबकि थॉइस एयरफील्ड की प्राथमिक सैन्य और रणनीतिक भूमिका पूरी तरह से सुरक्षित और बरकरार रखी जाएगी।
संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में नागरिक उड़ानों की तैयारी
थॉइस एयरफील्ड की भौगोलिक स्थिति इसे सुरक्षा और कनेक्टिविटी दोनों लिहाज से असाधारण बनाती है। यह हवाई पट्टी लद्दाख की प्रसिद्ध नुब्रा घाटी के निकट और चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बेहद करीब स्थित है। यही वजह है कि यहां से नागरिक उड़ानों की शुरुआत को महज एक सामान्य परिवहन व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जा रहा है। सैन्य रणनीतिकारों का मानना है कि इस कदम से सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक उपस्थिति और प्रशासनिक बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। हालांकि प्रशासन ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि प्रस्तावित वाणिज्यिक उड़ानों से सैन्य अभियानों की प्राथमिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। थॉइस की मूल पहचान एक अग्रिम रक्षा आधार शिविर की ही रहेगी, लेकिन इसके रनवे का उपयोग नागरिक विमान भी कर सकेंगे।
उच्चस्तरीय समीक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर की रूपरेखा
हाल ही में लद्दाख में आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रशासनिक समीक्षा बैठक में थॉइस से सिविल फ्लाइट्स शुरू करने की तैयारियों की व्यापक जांच की गई। इस बैठक की अध्यक्षता लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने की, जिसमें नागरिक उड्डयन सचिव निधि मलिक तथा एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान अधिकारियों ने सैन्य एयरफील्ड के परिसर में ही नागरिक यात्रियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने की विस्तृत योजना पर विचार-विमर्श किया। इसमें भूमि आवंटन, रनवे के साझा इस्तेमाल के नियम, यात्रियों के लिए अस्थायी परिचालन व्यवस्था, टर्मिनलों का प्रस्तावित लेआउट और जरूरी निर्माण कार्यों की रूपरेखा शामिल थी। AAI को निर्देश दिया गया है कि वह सभी आवश्यक सिविल कार्यों के लिए तुरंत लागत अनुमान तैयार करे ताकि प्रशासनिक और रक्षा मंजूरियां मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सके। मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और जिम्मेदारियां तय करते हुए काम को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया है।
नुब्रा घाटी के लिए वरदान साबित होगी एयर कनेक्टिविटी
इस पूरी परियोजना का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ लद्दाख की दूरदराज नुब्रा घाटी को मिलने वाला है। वर्तमान समय में नुब्रा का शेष भारत से संपर्क लगभग पूरी तरह से घुमावदार और दुर्गम पहाड़ी सड़कों पर निर्भर है। अत्यधिक ऊंचाई, कठिन भौगोलिक बनावट और सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी के कारण यह सड़क संपर्क कई दिनों तक पूरी तरह ठप हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में थॉइस से नियमित नागरिक उड़ानें शुरू होने पर स्थानीय आबादी को एक तेज, सुरक्षित और बारहमासी वैकल्पिक हवाई मार्ग उपलब्ध हो जाएगा। इससे न केवल स्थानीय निवासियों को आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत सुविधा मिलेगी, बल्कि लद्दाख आने वाले पर्यटकों को भी नुब्रा घाटी तक सीधे पहुंचने में आसानी होगी। इस पहल से स्थानीय पर्यटन उद्योग, होटल व्यवसाय, टैक्सी ऑपरेटरों और अन्य छोटे कारोबारियों की आय में भारी बढ़ोतरी की संभावना व्यक्त की जा रही है। केंद्र सरकार थॉइस को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना यानी UDAN के तहत जोड़ने की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार कर रही है, जिससे देश के अन्य प्रमुख शहरों से नुब्रा के लिए सस्ती उड़ानें संचालित की जा सकें।
जमीन आवंटन की चुनौती और सैन्य सुरक्षा के नियम
थॉइस में वाणिज्यिक विमानन सेवाएं शुरू करने की योजना कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से इस पर काम चल रहा था। बुनियादी ढांचे की जटिलताओं, जमीन के अधिग्रहण, रक्षा मंत्रालय की स्वीकृतियों और एयरलाइंस के परिचालन से जुड़ी बाधाओं के कारण इस परियोजना को कई चरणों में देरी का सामना करना पड़ा। नवंबर 2022 में लद्दाख प्रशासन ने जानकारी दी थी कि नागरिक विमानन गतिविधियों के लिए थॉइस में 28 कनाल भूमि आवंटित की जा चुकी है। उस दौरान वायुसेना, नागरिक प्रशासन, डिफेंस एस्टेट ऑफिस और AAI की संयुक्त टीम ने विस्तृत स्थल सर्वेक्षण भी किया था। हालांकि, बाद में नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के विस्तार को देखते हुए AAI की तरफ से अतिरिक्त जमीन की मांग रखी गई। प्रशासनिक विवरणों के अनुसार, सिविल एयरपोर्ट के बेहतर निर्माण के लिए वायुसेना से 1.5 एकड़ अतिरिक्त भूमि मांगी गई थी। वहीं, एक संसदीय प्रश्न के उत्तर में भी थॉइस में सिविल एनक्लेव के निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है।
चूंकि थॉइस मूल रूप से एक पूर्णतः सक्रिय सैन्य हवाई अड्डा है, इसलिए यहां स्वतंत्र नागरिक हवाई अड्डे जैसी सामान्य व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है। सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नागरिक यात्रियों के लिए अलग टर्मिनल, सुरक्षा जांच क्षेत्र, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) प्रोटोकॉल और आवाजाही के कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना की ओर से अंतिम अनापत्ति प्रमाण पत्र और परिचालन गाइडलाइंस जारी होना इस दिशा में सबसे अहम चरण होगा। हालिया उच्चस्तरीय बैठक में जिस तरह से निर्माण कार्यों और विभागीय जिम्मेदारियों को अंतिम रूप दिया गया है, उससे यह स्पष्ट है कि यह योजना अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर उतरने के लिए तैयार है।
चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर रणनीतिक संतुलन
लद्दाख क्षेत्र में भारत की रणनीतिक चौकसी किसी एक मोर्चे तक सीमित नहीं है। भारत को पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तरी मोर्चे पर चीन के साथ संवेदनशील वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की निगरानी करनी पड़ती है। ऐसे अत्यधिक संवेदनशील और ऊंचाई वाले इलाकों में मजबूत एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर का होना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है। LAC पर चीन के साथ जारी गतिरोध के बीच थॉइस एयरफील्ड की भूमिका भारतीय वायुसेना के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि यहां से सीमा पर तैनात सैनिकों को आवश्यक रसद, हथियार और त्वरित बैकअप सहायता पहुंचाई जाती है। थॉइस में नागरिक विमानन सुविधाओं का विकास होने से न केवल आम जनता को लाभ मिलेगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों और आपदा प्रबंधन के दौरान भी भारतीय सुरक्षा बलों की त्वरित पहुंच क्षमता में अभूतपूर्व सुधार होगा। इस तरह थॉइस एयरफील्ड का दोहरे उपयोग (Dual-Use) वाला यह मॉडल भारत के सीमावर्ती विकास और सैन्य तैयारियों का एक नया उदाहरण पेश करने जा रहा है।




















