17 अगस्त राशिफल: नाग पंचमी पर 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें सभी 12 राशियों का आज का भविष्यफलसुस्त अमेरिकी खुदरा बिक्री आंकड़ों से डॉलर पर दबाव, 0.7100 के स्तर के पास पहुंचा ऑस्ट्रेलियाई डॉलरझारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा विवाद के बीच अभ्यर्थियों से मिलीं कुनिका सदानंदउत्तर प्रदेश में युवाओं को गो सेवा अभियान से जोड़ेगी सरकार, 10 हजार गो मित्र संभालेंगे जिम्मेदारीफिल्म 'घोस्ट' फेम अनन्या राज का निधन, 27 साल की उम्र में सोते समय थमीं सांसेंश्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 167 रनों की धमाकेदार पारी खेलने के बाद देवदत्त पडिक्कल ने खोले अपनी शानदार बल्लेबाजी के राजसाधारण तोरई को बनाएं खास, इस मसालेदार ग्रेवी रेसिपी के साथ हर कोई चाव से खाएगालॉर्ड्स के मैदान पर एश्ले गार्डनर की ट्रент रॉकेट्स ने रचा इतिहास, सनराइजर्स लीड्स को 8 विकेट से हराकर महिला हंड्रेड ट्रॉफी पर किया कब्जाप्यू रिसर्च सर्वे में अमेरिका में भारत पर बंटा जनमत, ब्रिटेन और जर्मनी में सुधरी साखफिल्म रोजा का गाना 'ये हसीन वादियां' कैसे बना ऑल टाइम क्लासिक, जानिए एआर रहमान के डेब्यू प्रोजेक्ट से जुड़े खास किस्से
देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार की तैयारी, केंद्र सरकार ने जारी किए नए लाइसेंसिंग और सुरक्षा नियमभारत
15 अग॰ 2026, 9:31 pm (1 दिन पहले)· 3

देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार की तैयारी, केंद्र सरकार ने जारी किए नए लाइसेंसिंग और सुरक्षा नियम

परमाणु ऊर्जा विभाग ने नए मसौदा नियम जारी करके देश में न्यूक्लियर प्लांट के निर्माण, संचालन और लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने का खाका तैयार किया है।

देश में स्वच्छ और निरंतर बिजली आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार करने की योजना बनाई जा रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए परमाणु ऊर्जा विभाग ने परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास कानून 2025 के अंतर्गत एक विस्तृत मसौदा तैयार किया है। इन नए नियमों का मुख्य ध्येय संयंत्रों के संचालन को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है। इसके साथ ही किसी भी अप्रत्याशित परमाणु हादसे की स्थिति में पीड़ितों को वित्तीय मुआवजा और राहत सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानूनी ढांचा निर्धारित किया जा रहा है।

नागरिक दायित्व और वित्तीय सुरक्षा की समीक्षा

नियमों के मसौदे में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार प्रत्येक पांच वर्ष में विशेषज्ञों की एक विशेष समिति का गठन करेगी। यह समिति परमाणु नुकसान के लिए संयंत्र संचालक के नागरिक दायित्व की अधिकतम वित्तीय सीमा का पुनर्मूल्यांकन करेगी। समय-समय पर इस सीमा की समीक्षा होने से यह सुनिश्चित होगा कि मुद्रास्फीति और नए जोखिमों के अनुसार क्षतिपूर्ति की राशि हमेशा पर्याप्त रहे। इससे आम जनता और पर्यावरण की सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा और संचालकों पर भी वित्तीय अनुशासन बना रहेगा।

ये भी पढ़ें

विदेशी तकनीक और रिएक्टरों के लिए कड़े मानक

भारत में उपयोग की जाने वाली विदेशी रिएक्टर तकनीक के संबंध में मसौदे में स्पष्ट शर्तें रखी गई हैं। यदि कोई परमाणु संयंत्र विदेशी डिजाइन पर आधारित है, तो उस डिजाइन को उसके मूल देश की नियामक संस्था से आधिकारिक मंजूरी मिलना अनिवार्य होगा। केवल स्वीकृत होना ही काफी नहीं होगा, बल्कि वह रिएक्टर मॉडल मूल देश में या किसी अन्य विदेशी राष्ट्र में पहले से सफलतापूर्वक चालू अवस्था में होना चाहिए। इस नियम का मकसद अप्रमाणित या प्रयोगात्मक तकनीकों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है ताकि देश में केवल वही तकनीक आए जो पहले से सुरक्षित साबित हो चुकी हो।

प्रारंभिक मंजूरी की नई व्यवस्था

परमाणु परियोजनाओं में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया में एक व्यावहारिक बदलाव का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था के तहत सक्षम प्राधिकारी आवेदन स्वीकार करने के बाद आवेदक को सिद्धांत रूप में मंजूरी दे सकता है। खास बात यह है कि यह शुरुआती सैद्धांतिक स्वीकृति उस स्थिति में भी दी जा सकेगी जब संयंत्र के लिए अंतिम जगह या विशिष्ट तकनीक का चयन पूरी तरह न हुआ हो। इस मंजूरी के मिलते ही विकासकर्ता रिएक्टर तकनीक आपूर्ति करने वाली कंपनियों के साथ व्यावसायिक बातचीत आगे बढ़ा सकेगा और जमीन अधिग्रहण तथा आवश्यक बुनियादी ढांचे का काम शुरू कर सकेगा।

एकीकृत समग्र लाइसेंसिंग प्रणाली

मसौदा नियमों की एक बड़ी विशेषता एकल खिड़की प्रणाली जैसी एकीकृत लाइसेंसिंग व्यवस्था है। अब किसी परमाणु संयंत्र के निर्माण, स्वामित्व, संचालन और अंततः उसके परित्याग अर्थात डिकमीशनिंग के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पूरी जीवन अवधि के लिए एक ही समग्र लाइसेंस जारी किया जाएगा। मसौदे में साफ कहा गया है कि इन विभिन्न चरणों के लिए अलग से कोई लाइसेंस न तो मांगा जाएगा और न ही दिया जाएगा। लाइसेंस को टुकड़ों में बांटने पर पूरी तरह रोक रहेगी, जिससे नौकरशाही की लालफीताशाही खत्म होगी और सुरक्षा निगरानी एक जगह केंद्रित रहेगी।

सवाल-जवाब

शांति अधिनियम 2025 के तहत कौन से नियम जारी किए गए हैं?
परमाणु ऊर्जा विभाग ने परमाणु संयंत्रों के निर्माण, संचालन, विदेशी तकनीक की मंजूरी और नागरिक दायित्व की समीक्षा से जुड़े नए मसौदा नियम जारी किए हैं।
विदेशी डिजाइन वाले रिएक्टरों के लिए क्या शर्त रखी गई है?
विदेशी डिजाइन के रिएक्टर का अपने मूल देश के नियामक से स्वीकृत होना और वहां या किसी अन्य देश में पहले से चालू होना अनिवार्य है।
परमाणु नुकसान के लिए नागरिक दायित्व की समीक्षा कब होगी?
केंद्र सरकार हर पांच साल में विशेषज्ञों का समूह गठित करेगी जो संचालक के नागरिक दायित्व की अधिकतम सीमा की समीक्षा करेगा।
क्या परमाणु प्लांट के विभिन्न चरणों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की जरूरत होगी?
नहीं, नए नियमों के तहत संयंत्र के निर्माण, संचालन, स्वामित्व और परित्याग के लिए केवल एक ही समग्र लाइसेंस जारी किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·1 दिन पहले

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में इन सुधारों से भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति और बेसलोड बिजली की मांग को बड़ा बल मिलेगा। एसएचएएनटी अधिनियम 2025 के तहत एकल खिड़की लाइसेंसिंग और विदेशी रिएक्टरों के लिए कड़े सुरक्षा मानकों से वैश्विक निवेशकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं का भरोसा बढ़ेगा। हालांकि, साइट चयन से पहले सैद्धांतिक मंजूरी मिलने से भूमि अधिग्रहण और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी शुरुआती अड़चनें तो दूर होंगी, लेकिन क्षेत्रीय कूटनीति और परमाणु अप्रसार समझौतों के वैश्विक परिदृश्य में इन परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन ही इनकी असली सफलता तय करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में यह नीतिगत बदलाव भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और बेसलोड पावर की मांग के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। एसएचएएनटी आई अधिनियम, 2025 के तहत एकल खिड़की लाइसेंसिंग और पांच साल पर देयता समीक्षा से विनियामक अनिश्चितता कम होगी। इससे न केवल विदेशी तकनीकी साझेदारियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की परमाणु क्षमता विस्तार योजनाओं में वैश्विक निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·1 दिन पहले

यह विधाई ढांचा भारत को जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने में मदद करेगा। एसएचएएनटी आई अधिनियम, 2025 के इन नए प्रावधानों से घरेलू और विदेशी निवेशकों के बीच स्पष्टता आएगी। पांच-वर्षीय देयता समीक्षा और एकीकृत लाइसेंसिंग प्रणाली से लालफीताशाही पर अंकुश लगेगा, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को नया बल मिलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नए सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियम केवल प्रशासनिक सुधार नहीं हैं, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा और कानूनी दायित्वों के दृष्टिकोण से एक संवेदनशील कदम है। जब देश में नई तकनीकों और बड़े संयंत्रों का विस्तार होगा, तब किसी भी दुर्घटना या लापरवाही की स्थिति में नागरिक दायित्व और वित्तीय मुआवजे का यह ढांचा न्याय सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा। कानूनी और विधिक सुरक्षा के मोर्चे पर, यह आवश्यक है कि हर पांच साल में होने वाली समीक्षा पारदर्शी हो ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने में कोई प्रशासनिक या कानूनी अड़चन न आए।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में यह विधिक और लाइसेंसिंग बदलाव वैश्विक वित्तीय बाज़ारों और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण से बेहद अहम है। एकल-खिड़की लाइसेंसिंग और विदेशी रिएक्टरों के लिए कड़े पूर्व-अनुमोदन मानक निवेशकों और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के लिए नीतिगत अनिश्चितता को कम करेंगे। इससे भारत के कॉर्पोरेट और ऊर्जा क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण का मार्ग प्रशस्त होगा, साथ ही यह वैश्विक मानकों के अनुरूप एक अनुशासित और पारदर्शी वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR