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डेयरी कारोबार में जाफराबादी भैंस की भारी मांग, मजबूत कद-काठी और ज्यादा फैट से बढ़ती है कमाईभारत
23 सित॰ 2026, 3:15 pm (1 घंटे पहले)· 1

डेयरी कारोबार में जाफराबादी भैंस की भारी मांग, मजबूत कद-काठी और ज्यादा फैट से बढ़ती है कमाई

सुल्तानपुर में जाफराबादी भैंस अपनी भारी शारीरिक बनावट, प्रचुर दूध और उच्च फैट के चलते पशुपालकों के बीच मुनाफे का मजबूत जरिया बन रही है। जानकारों के अनुसार खरीदारी से पहले चारे, स्वास्थ्य और बाजार भाव का सटीक आकलन बेहद जरूरी है।

डेयरी व्यवसाय को लाभकारी बनाने के लिए पशुपालक ऐसी नस्लों की तलाश में रहते हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर दूध उत्पादन दे सकें। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में जाफराबादी भैंस अपनी खास शारीरिक बनावट और गुणवत्तापूर्ण दूध के कारण पशुपालकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। यहां के एक स्थानीय किसान ने इस नस्ल के पालन-पोषण, खानपान और दैनिक देखभाल से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए हैं, जिससे पता चलता है कि सही प्रबंधन मिलने पर यह मवेशी ग्रामीण परिवारों की आजीविका को नई मजबूती दे सकता है।

विशालकाय कद-काठी और आईसीएआर का आधिकारिक दर्जा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर के रिकॉर्ड में जाफराबादी को देश की सबसे भारी भैंस नस्ल के रूप में दर्ज किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉक्टर दिवाकर कुमार के अनुसार, इस नस्ल की गिनती भारत की अत्यंत प्रमुख और प्रतिष्ठित भैंस प्रजातियों में की जाती है। इसका अत्यंत चौड़ा ढांचा, मजबूत शारीरिक गठन और नीचे की ओर लटककर विशेष अंदाज में मुड़े हुए लंबे सींग इसे अन्य सभी घरेलू नस्लों से एकदम अलग दिखाते हैं। ग्रामीण अंचलों में यह भैंस अपनी विशालकाय उपस्थिति के कारण पहली नजर में ही लोगों का ध्यान खींच लेती है और इसकी शारीरिक शक्ति साफ तौर पर झलकती है।

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दूध की भरपूर मात्रा और घी-मक्खन के लिए उपयोगी फैट

जाफराबादी नस्ल की उपयोगिता केवल इसके विशाल शरीर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि डेयरी के पैमाने पर यह बेहद उत्पादक मानी जाती है। किसान और विशेषज्ञ हरिनाथ ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि इस भैंस के दूध में फैट की मात्रा काफी अच्छी पाई जाती है। उच्च वसा वाला यह दूध पारंपरिक घी, ताजा मक्खन और विभिन्न प्रकार के मूल्यवान डेयरी उत्पादों को तैयार करने के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दूध की कुल मात्रा और उसमें फैट का प्रतिशत प्रत्येक पशु में पूरी तरह एक समान नहीं रहता। पशु की वर्तमान आयु, उसे दिया जाने वाला पोषक आहार, उसका स्वास्थ्य, आसपास का मौसम और दैनिक देखभाल जैसे बुनियादी कारक दूध की उपज और गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं।

खरीदने से पहले संपूर्ण बजट और मुनाफे का व्यावहारिक गणित

यदि कोई पशुपालक जाफराबादी भैंस खरीदने की योजना बना रहा है, तो केवल उसकी मशहूर नस्ल देखकर त्वरित निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। किसी भी नए पशु का सौदा करने से पूर्व उसकी वास्तविक उम्र, शारीरिक तंदुरुस्ती, दूध देने की प्रमाणित क्षमता, गर्भधारण की मौजूदा स्थिति और नस्ल की शुद्धता की पूरी पड़ताल कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही पशु पर रोजाना होने वाले हरे-सूखे चारे, नियमित दवाओं और सामान्य देखरेख के खर्च का पहले से स्पष्ट खाका तैयार करना आवश्यक है। स्थानीय बाजार में मिलने वाला दूध का रेट भी वास्तविक लाभ तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। स्वस्थ और उत्तम नस्ल का पशु डेयरी को लाभ जरूर दे सकता है, लेकिन वास्तविक मुनाफा कुल लागत और दूध की कुल बिक्री के संतुलन पर ही निर्भर करता है।

सवाल-जवाब

आईसीएआर के अनुसार जाफराबादी भैंस की मुख्य पहचान क्या है?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार जाफराबादी भारत की सबसे भारी भैंस नस्ल है, जिसकी पहचान चौड़ा शरीर और लंबे मुड़े हुए सींग हैं।
जाफराबादी भैंस का दूध किन उत्पादों के लिए सबसे बेहतर माना जाता है?
इस नस्ल के दूध में फैट की मात्रा अधिक होती है, जो घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों के निर्माण के लिए बेहद उपयोगी है।
भैंस के दूध उत्पादन और फैट को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?
पशु की उम्र, उसका खानपान, स्वास्थ्य की स्थिति, मौसम और उसकी दैनिक देखभाल जैसे कारक दूध उत्पादन और फैट को प्रभावित करते हैं।
जाफराबादी भैंस खरीदने से पहले किन बातों की जांच करनी चाहिए?
पशु की उम्र, शारीरिक स्वास्थ्य, दूध देने की क्षमता, गर्भधारण की स्थिति, नस्ल की शुद्धता और दैनिक चारे के खर्च की जांच करनी चाहिए।
सुल्तानपुर में जाफराबादी भैंस की खूबियों पर किस विशेषज्ञ ने जानकारी दी?
कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर के पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉक्टर दिवाकर कुमार और किसान व विशेषज्ञ हरिनाथ ने इसकी विस्तृत जानकारी साझा की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·49 मिनट पहले

सुल्तानपुर में जाफराबादी के सींगों का मुड़ाव वाकई गजब का है, पहली बार में ही ध्यान खींच लेता है।

Ravikash Gupta@ravikash·49 मिनट पहले

अरे करण भाई, सींग तो ठीक हैं पर डॉक्टर दिवाकर कुमार ने जो फैट और दूध को लेकर बात कही है, उस पर भी थोड़ा ध्यान देना चाहिए!

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