सड़क मार्ग से दिल्ली से मुंबई तक का सफर तय करना कभी एक बेहद मुश्किल और थका देने वाली चुनौती माना जाता था। लंबी दूरी, भारी ट्रैफिक जाम, अलग-अलग शहरों के बीच से गुजरने वाले संकरे रास्ते और बार-बार गाड़ी रोकने की मजबूरी इस लंबी यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा हुआ करती थी। यही कारण था कि लोग इस सफर पर निकलने से पहले कम से कम एक पूरा दिन या उससे भी अधिक समय का मार्जिन लेकर चलते थे। लेकिन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के अस्तित्व में आने के बाद यह पूरी तस्वीर बहुत तेजी से बदल चुकी है। अब यह सफर पहले की तुलना में न केवल बेहद तेज हो गया है, बल्कि काफी आरामदायक और सुरक्षित भी बन चुका है।
इस नए एक्सप्रेसवे का फायदा सिर्फ यात्रा समय में कमी आने तक ही सीमित नहीं है। कम समय में यात्रा पूरी होने से वाहनों की ईंधन खपत में भारी गिरावट आ रही है, जिससे पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा मिल रहा है। इसके साथ ही, रास्ते में बार-बार रुकने और ठहरने की जरूरत भी काफी हद तक कम हो गई है। यही वजह है कि इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में देखा जा रहा है जो माल ढुलाई करने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनियों के संचालन खर्च को भी काफी कम कर रहा है।
यात्रा समय में भारी कटौती
पहले के समय में सड़क के रास्ते दिल्ली से मुंबई पहुंचने में आम तौर पर 24 से 26 घंटे का लंबा समय लग जाता था। कई बार हाईवे पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम या अन्य स्थानीय दिक्कतों की वजह से यह यात्रा 28 घंटे या उससे भी अधिक समय में पूरी हो पाती थी। हालांकि, नए बने एक्सप्रेसवे ने इस पूरी व्यवस्था को बदलकर रख दिया है। अब इस शानदार कॉरिडोर के माध्यम से यही सफर मात्र 12 से 14 घंटे के भीतर पूरा किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि यात्रियों को एक तरफ के सफर में करीब 10 से 12 घंटे की सीधी बचत हो रही है। इस समय की बचत का सबसे बड़ा फायदा उन व्यावसायिक यात्रियों और कामकाजी लोगों को मिल रहा है, जिन्हें काम के सिलसिले में अक्सर इन दोनों महानगरों के बीच यात्रा करनी पड़ती है।
ईंधन और सफर के खर्च में बड़ी बचत
इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे के फायदों का दायरा सिर्फ समय बचाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की जेब पर भी बहुत सकारात्मक असर डाल रहा है। जब गाड़ियां बिना किसी रुकावट के एक समान गति से चलती हैं, तो उन्हें बार-बार ब्रेक लगाने या गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। इस वजह से गाड़ियों के पेट्रोल और डीजल की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है। एक अनुमान के मुताबिक, इस एक्सप्रेसवे पर गाड़ी चलाने से ईंधन की खपत में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट आ सकती है। अगर कोई परिवार साल में एक या दो बार भी दिल्ली से मुंबई की सड़क यात्रा करता है, तो सिर्फ ईंधन के मद में ही उनकी बहुत बड़ी बचत हो जाएगी। इसके साथ ही, रास्ते में होटल में रुकने, रात के खाने और अन्य फुटकर खर्चों की जरूरत खत्म होने से यात्रा का कुल बजट भी पहले के मुकाबले काफी कम हो जाता है।
टोल टैक्स अधिक होने के बावजूद क्यों है यह फायदेमंद सौदा?
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लिया जाने वाला टोल टैक्स पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों की तुलना में थोड़ा अधिक जरूर है, लेकिन जब हम पूरी यात्रा के खर्च का हिसाब लगाते हैं, तो यह सौदा बिल्कुल भी महंगा साबित नहीं होता। यात्रा का समय आधा होने, ईंधन की बड़ी बचत होने और रास्ते में रुकने की मजबूरी खत्म होने के कारण यात्रा का कुल खर्च बहुत हद तक संतुलित हो जाता है। यही मुख्य कारण है कि समझदार यात्री थोड़ा अधिक टोल चुकाने के बाद भी इस नए एक्सप्रेसवे का उपयोग करना अधिक पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बचते हैं।
ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए गेम चेंजर
माल ढुलाई करने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए यह एक्सप्रेसवे एक बड़े बदलाव का जरिया बन चुका है। पुराने रूट पर एक मालवाहक ट्रक को दिल्ली से मुंबई की दूरी तय करने में एक दिन से भी अधिक का समय लग जाता था, जिससे सामान पहुंचने में देरी होती थी। अब माल की डिलीवरी बहुत कम समय में पूरी हो रही है, जिससे एक ट्रक महीने में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा फेरे लगाने में सक्षम हो गया है। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे पर सुचारू रूप से गाड़ी चलने के कारण ड्राइवरों की शारीरिक थकान बहुत कम हो रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी घट गई है। गाड़ियों के रखरखाव का खर्च भी काफी कम हो गया है, जिससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की परिचालन लागत में बड़ी गिरावट आई है।
दो बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच बढ़ेगा व्यापार
जब इस एक्सप्रेसवे का पूरा नेटवर्क और उससे जुड़ने वाली सहायक सड़कें पूरी तरह से तैयार हो जाएंगी, तब इसका प्रभाव और भी व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। भविष्य में यात्रा का समय और अधिक कम होने की संभावना है, जिससे माल की आवाजाही पहले से भी अधिक तेज हो जाएगी और उद्योगों की व्यापारिक लागत में कमी आएगी। देश के इन दो सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क सुदृढ़ होने से व्यापार और वाणिज्य को एक नई गति मिलेगी, जो अंततः देश की आर्थिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।



















