भीलवाड़ा क्षेत्र में कई पशुपालक अधिक मुनाफे की उम्मीद के साथ मुर्गी पालन के व्यवसाय में उतरते हैं, लेकिन मुर्गियों की उचित वृद्धि न होने के कारण उन्हें कई बार घाटे का सामना करना पड़ता है। पोल्ट्री फार्मिंग से जुड़े लोगों के लिए पक्षियों की शानदार ग्रोथ और उनकी सेहत सबसे अहम पहलू होती है। मुर्गियों का वजन तेजी से बढ़े और वे संक्रमण या बीमारियों से सुरक्षित रहें, इसके लिए उनके खान-पान पर विशेष रूप से ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। केवल मक्का, गेहूं या अन्य सामान्य अनाज खिला देने मात्र से पक्षियों को वे सभी आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं जो उनकी शारीरिक वृद्धि के लिए अनिवार्य हैं।
उम्र के हिसाब से फीड का चयन
ब्रॉयलर मुर्गियों की बेहतर ग्रोथ के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें उनकी उम्र के विभिन्न पड़ावों के अनुसार अलग-अलग प्रकार का फीड दिया जाए। जीवन के शुरुआती दिनों में उच्च गुणवत्ता वाला ब्रॉयलर स्टार्टर फीड देना सबसे अच्छा माना जाता है, जिससे छोटे चूजों को अपनी शुरुआती वृद्धि के लिए आवश्यक पोषण आसानी से मिल जाता है। इसके पश्चात, जैसे-जैसे चूजों की उम्र बढ़ती जाती है, उनके आहार में ग्रोवर और फिनिशर फीड का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाता है। इस चरणबद्ध तरीके से फीड देने पर पक्षियों के शरीर का शारीरिक विकास और वजन तेजी से बढ़ाने में काफी मदद मिलती है।
प्रोटीन और संतुलित पोषक तत्वों का महत्व
मुर्गियों के दैनिक आहार में मक्का और गेहूं जैसे अनाज ऊर्जा की आपूर्ति के लिए अच्छे स्रोत माने जाते हैं, लेकिन इनके साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन होना भी उतना ही आवश्यक है। सोयाबीन खली जैसे बेहतरीन प्रोटीन स्रोत मुर्गियों के शरीर के ढांचे और मांसपेशियों की तेज ग्रोथ में काफी सहायता करते हैं। इसके अलावा, आहार में एक संतुलित मात्रा में मिनरल मिक्स, जरूरी विटामिन और आवश्यक अमीनो एसिड को भी शामिल किया जाना चाहिए। पक्षियों को सही और संपूर्ण पोषण मिलने से उनकी वृद्धि संतोषजनक होती है और वे स्वस्थ रहते हैं।
शुद्ध पानी और नियमित साफ-सफाई
मुर्गियों की बेहतरीन सेहत के लिए उनके सामने हमेशा साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराना उतना ही अहम है जितना कि गुणवत्तापूर्ण दाना देना। पक्षियों को हर समय पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना चाहिए, क्योंकि पानी की थोड़ी सी भी कमी होने पर वे दाना कम खाने लगती हैं और इसका सीधा असर उनकी ग्रोथ पर पड़ता है। विशेष तौर पर गर्मी के मौसम में पानी की पर्याप्त और ठंडी व्यवस्था करना बहुत जरूरी हो जाता है। इसके अलावा, पानी और दाने के बर्तनों की नियमित रूप से सफाई करना भी पोल्ट्री फार्म प्रबंधन का एक अनिवार्य हिस्सा है।
शेड प्रबंधन और टीकाकरण
मुर्गियों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए उनके रहने वाले शेड की साफ-सफाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए। पक्षियों को कभी भी गीला, सड़ा हुआ या फफूंद लगा हुआ दाना नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि ऐसा होने पर उनकी सेहत तेजी से बिगड़ सकती है। पोल्ट्री शेड के भीतर हवा का पर्याप्त आवागमन होना चाहिए और नीचे बिछाए जाने वाले बिछावन को हमेशा सूखा रखना आवश्यक है। इसके साथ ही, मुर्गियों की उम्र और उनके क्षेत्र में फैलने वाली संभावित बीमारियों के अनुसार समय-समय पर उनका टीकाकरण करवाना भी बेहद जरूरी होता है।
देखभाल से बढ़ेगी आमदनी
मुर्गी पालन के व्यवसाय में बंपर ग्रोथ हासिल करने के लिए किसानों को दाना, पानी, साफ-सफाई और स्वास्थ्य प्रबंधन जैसी सभी बातों पर एक साथ पूरा ध्यान देना चाहिए। संतुलित आहार देने के साथ-साथ मुर्गियों को उनकी आयु के हिसाब से सही मात्रा में ही फीड उपलब्ध कराना चाहिए। बिना किसी स्पष्ट जरूरत के पक्षियों को एंटीबायोटिक या अन्य रासायनिक दवाइयां देने से बचना चाहिए। सही देखभाल और उचित पोषण मिलने से मुर्गियों का स्वास्थ्य हमेशा बेहतर रहता है और किसानों को पोल्ट्री पालन के जरिए बेहतरीन पैदावार के साथ-साथ शानदार आमदनी भी प्राप्त होती है।


















