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गांधी नगर से दबोचा गया 14 महीने के बच्चे का हत्यारा, पैरोल खत्म होने के बाद 2 साल से चल रहा था फरारदिल्ली
14 अग॰ 2026, 8:33 pm (31 दिन पहले)· 4

गांधी नगर से दबोचा गया 14 महीने के बच्चे का हत्यारा, पैरोल खत्म होने के बाद 2 साल से चल रहा था फरार

दिल्ली में मासूम बच्चे के अपहरण और हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे अपराधी कलीम शेख को पुलिस ने गांधी नगर से गिरफ्तार कर लिया है। अक्टूबर 2024 में हाई कोर्ट से 45 दिन की पैरोल मिलने के बाद आरोपी फरार हो गया था।

दिल्ली के एक चर्चित और दर्दनाक मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहा अपराधी कलीम शेख आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। मासूम बच्चे के अपहरण और उसकी निर्मम हत्या के आरोप में सजा काट रहे इस अपराधी को पैरोल की अवधि समाप्त होने के बावजूद आत्मसमर्पण न करने पर गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस ने 12 अगस्त को गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके से हिरासत में लिया। वह पिछले लगभग दो वर्षों से लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था।

पैरोल की अवधि समाप्त होने पर नहीं लौटा था जेल

कानूनी प्रक्रिया के तहत कलीम शेख को अक्टूबर 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से 45 दिनों की पैरोल मंजूर की गई थी। इस अस्थायी रिहाई की अवधि पूरी होने के पश्चात आरोपी को जेल अधिकारियों के समक्ष वापस आत्मसमर्पण करना अनिवार्य था। हालांकि, पैरोल खत्म होने के बाद वह वापस जेल जाने के बजाय भूमिगत हो गया और फरार रहने लगा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, पुलिस टीम को आरोपी की गांधी नगर क्षेत्र में मौजूदगी की सटीक गुप्त सूचना मिली थी। इसी सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने 12 अगस्त को छापेमारी कर उसे दबोच लिया।

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2013 का मासूम अपहरण और हत्याकांड की पूरी कहानी

इस पूरे मामले की शुरुआत जनवरी 2013 में हुई थी, जब दिल्ली के खजूरी खास थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। खजूरी खास स्थित श्री राम कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार का 14 महीने का मासूम बच्चा अचानक अपने घर से गायब हो गया था। पुलिस ने शुरुआत में गुमशुदगी और अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। तफ्तीश के दौरान पुलिस को मासूम बच्चे का शव बरामद हुआ, जिसके बाद एफआईआर में हत्या से जुड़ी गंभीर कानूनी धाराएं जोड़ी गईं। गहन पड़ताल के बाद पुलिस ने कलीम शेख को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया।

2017 में कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कलीम शेख आपराधिक वारदात से पहले सफाईकर्मी और ऑटो-रिक्शा चालक के रूप में काम करता था। कड़कड़डूमा कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद 6 दिसंबर 2017 को कलीम शेख को दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा काटने के दौरान ही उसे हाई कोर्ट से पैरोल मिली थी, जिसका उल्लंघन कर वह फरार हो गया था।

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की एक और बड़ी सफलता

अपराध पर नकेल कसने की अपनी मुहिम के तहत दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक अन्य समानांतर कार्रवाई में तीन खतरनाक शूटरों को भी गिरफ्तार किया है। ये आरोपी मथुरा आधारित एक नवगठित आपराधिक गिरोह 'गैंगलैंड' के सक्रिय सदस्य बताए गए हैं। इस गैंग का सरगना कन्हा सिंह जडौल उर्फ कन्हा ठाकुर है, जिसके तार कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा गिरोह से जुड़े हुए बताए जाते हैं। पुलिस जांच के अनुसार, ये शूटर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में रंगदारी वसूलने के इरादे से गोलीबारी करने तथा स्थानीय कारोबारियों एवं वाहनों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। स्पेशल सेल ने समय रहते कार्रवाई करते हुए इन बदमाशों को किसी भी अप्रिय वारदात को अंजाम देने से पहले ही धर दबोचा।

सवाल-जवाब

कलीम शेख को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
कलीम शेख को जनवरी 2013 में खजूरी खास स्थित श्री राम कॉलोनी से 14 महीने के मासूम बच्चे के अपहरण और हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया है।
कलीम शेख कब से फरार चल रहा था?
अक्टूबर 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट से 45 दिन की पैरोल मिलने के बाद पैरोल अवधि खत्म होने पर वह वापस जेल नहीं गया और करीब दो साल से फरार चल रहा था।
कलीम शेख को उम्रकैद की सजा कब सुनाई गई थी?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 6 दिसंबर 2017 को कलीम शेख को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने किस गैंग के शूटरों को पकड़ा है?
विशेष कार्रवाई के तहत स्पेशल सेल ने मथुरा आधारित 'गैंगलैंड' गैंग के 3 शूटरों को पकड़ा, जिसका सरगना कन्हा सिंह जडौल उर्फ कन्हा ठाकुर है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·30 दिन पहले

इस मामले में पैरोल और फरारी के बीच का लंबा अंतराल न्याय प्रणाली और जेल सुधारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब उम्रकैद के अपराधी इस तरह कानून से बचते हैं, तो यह न केवल सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि पीड़ितों के परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा आघात करता है। भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए पैरोल के बाद डिजिटल ट्रैकिंग और त्वरित गिरफ्तारी तंत्र को और मजबूत करने की सख्त जरूरत है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 दिन पहले

उम्रकैद के सजायाफ्ता कैदी द्वारा पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद दो साल तक फरार रहना न्यायपालिका और जेल प्रशासन की निगरानी प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि अस्थायी रिहाई के मामलों में ट्रैकिंग मैकेनिज्म को और अधिक मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के सुरक्षा उपायों का दुरुपयोग रोका जा सके।

Riya Menon@riya-menon·30 दिन पहले

यह घटना याद दिलाती है कि समाज में सुरक्षा और व्यवस्था का प्रभाव हर क्षेत्र पर पड़ता है, विशेषकर तब जब अपराधी लंबे समय तक छिपकर रहें। इस प्रकार की चूकों से आम नागरिकों और स्थानीय समुदायों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है, जिससे यह आवश्यक हो जाता है कि प्रशासनिक और निगरानी प्रणालियों में पारदर्शिता तथा कड़ाई बढ़ाई जाए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·31 दिन पहले

यह घटना पैरोल प्रणाली की निगरानी और कैदियों के समय पर आत्मसमर्पण सुनिश्चित करने में प्रशासनिक खामियों को उजागर करती है। दो साल तक फरारी इस बात का प्रमाण है कि अस्थायी रिहाई के बाद लापता होने वाले अपराधियों पर नजर रखने के लिए एक मजबूत और एकीकृत ट्रैकिंग तंत्र की तत्काल आवश्यकता है, ताकि कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 दिन पहले

सहकर्मी की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला पैरोल प्रणाली के दुरुपयोग और कानूनी व्यवस्था की ढिलाई का गंभीर उदाहरण है। उम्रकैद के सजायाफ्ता मुजरिम का दो साल तक पुलिस की गिरफ्त से दूर रहना यह साबित करता है कि पैरोल अवधि पूरी होने के बाद कैदियों के भौतिक सत्यापन और निगरानी तंत्र में भारी चूक हो रही है। इस तरह की घटनाएं न्याय व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं, इसलिए पैरोल नियमों को और अधिक कड़ा करने के साथ-साथ फरार अपराधियों की ट्रैकिंग के लिए एक स्वचालित समन्वय प्रणाली का होना बेहद जरूरी हो गया है ताकि कोई भी अपराधी कानून की आंखों में धूल झोंककर आसानी से भूमिगत न हो सके।

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