उत्तर प्रदेश का आगरा शहर न केवल अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी असाधारण हस्तकला और बेजोड़ कारीगरी के लिए भी जाना जाता है। ताजमहल जैसी भव्य संरचनाओं के निर्माण में दिखने वाला अद्भुत हुनर आज भी यहां के स्थानीय कलाकारों में जिंदा है। इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए आगरा के मूर्तिकार अब आगामी गणेश चतुर्थी त्योहार की तैयारियों में पूरी तरह जुट गए हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित कार्यशालाओं में दिन-रात काम चल रहा है, जहां कलाकार भगवान गणेश की बेहद आकर्षक और सुंदर प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।
इन दिनों आगरा की विभिन्न कार्यशालाओं में गजब की रौनक देखने को मिल रही है। कोई कलाकार भगवान गणेश को अलग-अलग मनमोहक मुद्राओं में ढालने में लगा है, तो कोई उन्हें बेहद जीवंत रंगों और महीन डिजाइनों से सजाने में जुटा हुआ है। खास बात यह है कि आगरा में तैयार होने वाली इन खूबसूरत गणेश प्रतिमाओं की मांग केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर देखी जा रही है। स्थानीय कारीगरों का कहना है कि गणेश चतुर्थी के आगमन से काफी पहले ही उन्हें मूर्तियों के ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं, जिससे इस वर्ष बेहतरीन कारोबार की उम्मीद जगी है।
दो दशकों से जारी है इको-फ्रेंडली मूर्तियों का निर्माण
आगरा के सेंटर पार्क के समीप बड़े पैमाने पर मूर्तियों के निर्माण का कार्य किया जाता है। यहां एक समर्पित परिवार पिछले 20 वर्षों से लगातार भगवान गणेश की मूर्तियां बनाने के काम में लगा हुआ है। इस पारंपरिक कार्यशाला को चलाने वाली महिला मूर्तिकार लीला देवी ने बताया कि उनका पूरा परिवार इस काम में सक्रिय रूप से हाथ बंटाता है। वे विशेष रूप से पर्यावरण-अनुकूल यानी इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं। लीला देवी के अनुसार, पहले वे दूसरे स्थानों पर यह कार्य करती थीं, लेकिन पिछले दो दशकों से वे इसी जगह पर स्थापित होकर गणेश मूर्तियां बना रही हैं।
लीला देवी की कार्यशाला में बनने वाली मूर्तियां अपनी सुंदर बनावट और चटकीले रंगों के कारण ग्राहकों को खूब पसंद आती हैं। यही वजह है कि त्योहार आते ही लोग खुद यहां खिंचे चले आते हैं। मूर्तियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि वे इन मूर्तियों को तैयार करने के लिए POP और खड़िया मिट्टी का उपयोग करती हैं। यह मिश्रण पर्यावरण को किसी भी तरह से दूषित नहीं करता है और विसर्जन के दौरान आसानी से घुल जाता है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों समेत अन्य राज्यों में भारी मांग
आगरा के इन कुशल मूर्तिकारों की कला अब केवल स्थानीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसकी धाक देश के कई हिस्सों में स्थापित हो चुकी है। मूर्तिकार लीला देवी ने बताया कि उनके द्वारा तैयार की गई भगवान गणेश की मूर्तियों की मांग उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे लखनऊ, अलीगढ़, कानपुर, इटावा और मैनपुरी में अत्यधिक रहती है। उत्तर प्रदेश की सीमा से बाहर भी इनकी कला की बड़ी मांग है, जिसके तहत गुजरात के सूरत, महाराष्ट्र के मुंबई और राजस्थान के कई शहरों से प्रतिमाओं के लिए एडवांस ऑर्डर प्राप्त होते हैं।
त्योहार को ध्यान में रखते हुए इस समय कार्यशालाओं में काम की गति बहुत तेज हो गई है। ग्राहकों की पसंद और आयोजन के स्तर को ध्यान में रखते हुए यहां एक फुट से लेकर सात फुट तक की ऊंचाई वाली गणेश प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। लीला देवी ने कीमतों के बारे में बताते हुए कहा कि मूर्तियों की दर उनके आकार और उन पर की गई बारीक नक्काशी के आधार पर तय होती है। उनके यहां न्यूनतम 2 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 8 हजार रुपये तक की बेहद आकर्षक गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें समय पर पूरा करने के लिए पूरा परिवार दिन-रात काम कर रहा है।



















