हेयर फॉल की समस्या से राहत पाने के लिए खानपान में शामिल करें ये जरूरी न्यूट्रिएंट्स, जानें डाइट चार्टप्रतापगढ़ में मंदसौर रोड के ढाबों और होटलों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई, कीड़े मकोड़े और सड़ा मांस मिलने से मचा हड़कंपअसम के सोनितपुर में भीषण सड़क हादसा, ट्रक और कार की सीधी टक्कर में 5 लोगों की मौतमूलांक 9 राशिफल 12 सितंबर 2026: मंगल की ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं, विवाद से दूर रहेंनई दिल्ली में शी जिनपिंग की बख्तरबंद होंगची कार काले आवरण में क्यों नजर आई, समझिए इसका पूरा प्रोटोकॉल10,900 रुपए की गिरावट के बाद भारत में सोने के रेट संभले, 22K, 18K, 24K और चांदी के नए भावजालोर के कानीवाड़ा में 800 साल से खुले आसमान तले क्यों विराजमान हैं पातालेश्वर हनुमानजी, जानिए अनोखा इतिहाससर्दियां शुरू होते ही बीकानेर पहुंचे सैकड़ों फलाहारी चमगादड़, जानिए इनके अनोखे प्रवास का रहस्यसात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति, आज शाम नई दिल्ली में होगी प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीतगोरखपुर के प्राणी उद्यान में वन्यजीवों की अनोखी अठखेलियां बन रहीं पर्यटकों का मुख्य आकर्षण
शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियां विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में शामिल, वैश्विक पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तारराजस्थान
12 सित॰ 2026, 1:28 pm (52 मिनट पहले)· 0

शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियां विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में शामिल, वैश्विक पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार

राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों की भव्य भित्तिचित्रों वाली हवेलियों को विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में स्थान मिला है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

राजस्थान के शेखावाटी अंचल की अनूठी स्थापत्य कला और दीवारों पर उकेरे गए मनमोहक भित्तिचित्र अब वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाने जा रहे हैं। सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों में फैली ऐतिहासिक हवेलियों को विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में शामिल कर लिया गया है। इस महत्वपूर्ण कदम से न केवल इस पूरे इलाके के स्थापत्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना मिलेगी, बल्कि विदेशी और घरेलू पर्यटकों की आवाजाही में भी व्यापक इजाफा देखने को मिल सकता है।

खुली कला दीर्घा के रूप में प्रसिद्ध है यह अंचल

शेखावाटी का इलाका लंबे समय से एक खुली कला दीर्घा यानी ओपन आर्ट गैलरी के नाम से जाना जाता रहा है। यहां की पुरानी इमारतों और विशाल हवेलियों की दीवारों पर की गई पारंपरिक चित्रकारी बीते दौर के इतिहास, समृद्ध संस्कृति और लोकजीवन की दास्तान बयां करती है। इस क्षेत्र के 14 प्रमुख नगरों और कस्बों की हवेलियां अपनी नक्काशी और रंगों के लिए मशहूर हैं। इनमें सीकर, मंडावा, नवलगढ़, फतेहपुर, रामगढ़, लक्ष्मणगढ़, चूरू, झुंझुनूं, डूंडलोद, खेतड़ी, बिसाऊ, महांसर, अलसीसर और चिड़ावा शामिल हैं। अब तक कई सैलानी केवल मंडावा या नवलगढ़ जैसे लोकप्रिय पड़ावों तक ही सीमित रह जाते थे, लेकिन नई पहचान मिलने से बाकी छोटे कस्बों में भी सैलानियों की चहलकदमी तेज होगी।

ये भी पढ़ें

संरक्षण के लिए 660 हवेलियों का चयन

इन अनमोल धरोहरों को समय की मार और अनदेखी से बचाने के लिए सरकारी स्तर पर योजनाएं तैयार की गई हैं। बजट घोषणा के तहत शेखावाटी के विभिन्न इलाकों से 660 हवेलियों को संरक्षण कार्य के लिए चिन्हित किया गया है। इसके अलावा इन ऐतिहासिक गलियों को संवारने के उद्देश्य से हेरिटेज स्ट्रीट के रूप में विकसित करने की रूपरेखा भी बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन हवेलियों का जीर्णोद्धार और रखरखाव वैज्ञानिक तथा पारंपरिक तरीकों से किया जाए, तो आने वाली पीढ़ियां भी इस नायाब कला की गवाह बन सकेंगी और सदियों पुराने ढांचे सुरक्षित रहेंगे।

स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा संबल

पर्यटन के विस्तार का सबसे सीधा और सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ेगा। विदेशी और घरेलू पर्यटकों की तादाद बढ़ने से शेखावाटी के युवाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार देखने को मिलेंगे

  • होटल, होमस्टे और हेरिटेज रिसॉर्ट्स के कारोबार में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर अतिथि सत्कार क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
  • पर्यटक गाइड, वाहन चालक, टैक्सी संचालक और टूर ऑपरेटरों की मांग बढ़ेगी।
  • स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान, खानपान और ग्रामीण बाजारों के दुकानदारों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

हवेलियों का यह पुनरुत्थान केवल अतीत की यादों को संजोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास का एक मजबूत इंजन भी साबित होगा।

कागजों से आगे धरातल पर काम करने की जरूरत

विश्व धरोहर की प्रारंभिक सूची में शामिल होना एक बड़ा गौरवपूर्ण पड़ाव अवश्य है, लेकिन असली चुनौती इन ऐतिहासिक विरासतों के वास्तविक धरातल पर संरक्षण की है। जानकारों का कहना है कि संरक्षण की योजनाएं केवल प्रशासनिक फाइलों में बंद रहने के बजाय जमीन पर दिखनी चाहिए। हवेलियों के मूल भित्तिचित्रों, बारीक नक्काशी और चूने के गारे से बने स्थापत्य को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटकों के लिए आधारभूत सुविधाएं, सुगम सड़कें, स्वच्छता और आधुनिक जनसुविधाएं विकसित करना बेहद जरूरी है, ताकि शेखावाटी दुनिया भर के यात्रियों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन सके।

सवाल-जवाब

शेखावाटी की हवेलियों को किस सूची में शामिल किया गया है?
इन्हें विश्व धरोहर की प्रारंभिक (टेंटेटिव) सूची में शामिल किया गया है, जो मुख्य सूची में चयन का पहला अहम चरण होता है।
इस सूची में शेखावाटी के कौन से जिले शामिल हैं?
इस सूची में राजस्थान के तीन प्रमुख जिले सीकर, चूरू और झुंझुनूं शामिल हैं।
किन 14 प्रमुख क्षेत्रों की हवेलियों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है?
इनमें अलसीसर, बिसाऊ, चिड़ावा, चूरू, डूंडलोद, फतेहपुर, झुंझुनूं, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, मंडावा, महांसर, नवलगढ़, रामगढ़ और सीकर शामिल हैं।
संरक्षण योजना के तहत कितनी हवेलियों की पहचान की गई है?
सरकारी बजट घोषणा के तहत शेखावाटी की 660 हवेलियों को संरक्षण और हेरिटेज स्ट्रीट विकास के लिए चिन्हित किया गया है।
इस वैश्विक पहचान से स्थानीय लोगों को क्या आर्थिक लाभ होगा?
सैलानियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय गाइड, होटल, होमस्टे, टैक्सी संचालक और हस्तशिल्प दुकानदारों के लिए रोजगार व आमदनी के नए अवसर पैदा होंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR