राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित देवगढ़ थाना इलाके से एक अत्यंत स्तब्ध कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रकृति का रौद्र रूप एक बेबस किसान की जान पर भारी पड़ गया। मियाला गांव के खेतों में रोजमर्रा की तरह अपनी जमीन पर पसीना बहा रहे एक काश्तकार को मधुमक्खियों के अनियंत्रित और विशाल झुंड ने अचानक अपना निशाना बना लिया। यह हमला इतना तेज और अप्रत्याशित था कि खेत में काम कर रहे व्यक्ति को वहां से सुरक्षित दूरी बनाने या खुद को छिपाने का जरा भी अवसर नहीं मिल सका। कीड़ों के इस प्रचंड आक्रमण के चलते किसान की दुखद मृत्यु हो गई, जिसके बाद से पूरे इलाके में गहरे शोक और दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर प्राकृतिक जीवों की मौजूदगी रहती है, परंतु इस तरह के घातक और आक्रामक हमले ने सभी को हिला कर रख दिया है।
खेत में सामान्य रूप से चल रहा था काम, तभी हुआ हमला
इस दिल दहला देने वाले हादसे का शिकार बने किसान की शिनाख्त अमर सिंह के रूप में की गई है। प्राप्त विवरण के अनुसार, अमर सिंह मियाला गांव में स्थित अपने कृषि भूमि पर सामान्य दिनों की भांति खेती से जुड़े जरूरी कार्यों को निपटाने में तल्लीन थे। उस दौरान मौसम पूरी तरह शांत और सामान्य था, और वह बिना किसी आशंका के अपने काम में मग्न थे। इसी बीच न जाने कहां से मधुमक्खियों का एक बेहद बड़ा झुंड वहां आ धमका और देखते ही देखते अमर सिंह को चारों तरफ से घेर लिया। यह हमला इतनी तेजी से हुआ कि अमर सिंह संभल भी नहीं पाए।
खेत के अपेक्षाकृत सुनसान इलाके में स्थित होने की वजह से शुरुआती पलों में किसी को भी इस बात की भनक नहीं लग सकी कि वहां क्या घटित हो रहा है। जब तक कोई व्यक्ति स्थिति को समझ पाता या उनके पास सहायता लेकर पहुंचता, तब तक मधुमक्खियों की अनगिनत संख्या ने उनके पूरे जिस्म को अपने तीखे डंक से छलनी कर दिया था। अमर सिंह पूरी तरह असहाय होकर जमीन पर गिर पड़े और चीखने-चिल्लाने लगे।
चीख-पुकार सुनकर दौड़े पड़ोसी काश्तकार, धुआं कर भगाया झुंड
अमर सिंह की जोरदार चीख-पुकार जब आसपास के खेतों तक पहुंची, तो वहां काम कर रहे अन्य किसान और रास्ते से गुजर रहे राहगीर तत्काल हरकत में आए। जब लोग घटनास्थल की तरफ दौड़े, तो वहां का दृश्य देखकर उनके रोंगटे खड़े हो गए। अमर सिंह को मधुमक्खियों ने पूरी तरह ढका हुआ था। ग्रामीणों ने बिना अपनी जान की परवाह किए तुरंत बचाव के उपाय शुरू किए। लोगों ने सूखी लकड़ियों और पत्तों की मदद से भारी धुआं सुलगाया और मोटे कपड़ों का घेरा बनाकर जैसे-तैसे बेहद मशक्कत के बाद आक्रामक झुंड को वहां से खदेड़ने में सफलता पाई।
हालांकि, जब तक झुंड को दूर किया गया, तब तक भारी नुकसान हो चुका था। अमर सिंह गंभीर रूप से जख्मी हालत में थे और उनके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर मधुमक्खियों के सैकड़ों डंक गड़े हुए थे। इतनी बड़ी तादाद में डंक लगने की वजह से उनके शरीर में विष बहुत तेजी के साथ फैलने लगा। ग्रामीणों ने तनिक भी विलंब किए बिना उन्हें तत्काल उठाकर निकटतम अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की। मगर रास्ते में अत्यधिक असहनीय पीड़ा और तेजी से फैलते जहर के दुष्प्रभाव के कारण अमर सिंह की हालत लगातार बिगड़ती गई। अस्पताल के मुख्य दरवाजे तक पहुंचने से पूर्व ही उन्होंने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों की देखरेख मिलने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं।
देवगढ़ पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया
इस अप्रत्याशित हादसे की सूचना मिलते ही देवगढ़ थाना पुलिस का एक दल बिना देर किए मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शी किसानों तथा ग्रामीणों से पूरे घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी जुटाई। आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए पुलिस ने अमर सिंह के पार्थिव शरीर को अपने कब्जे में लिया और उसे सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में भिजवाया।
अस्पताल की मोर्चरी में चिकित्सकों के एक पैनल द्वारा शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया, ताकि शरीर में जहर के प्रसार और मृत्यु के सटीक चिकित्सीय कारणों का आधिकारिक दस्तावेज तैयार किया जा सके। पोस्टमार्टम की समस्त विधिक प्रक्रियाएं पूरी होने के उपरांत पुलिस ने शव को अंतिम विदाई के लिए उनके शोकाकुल परिजनों को सुपुर्द कर दिया।
गांव में पसरा सन्नाटा, प्रशासन से छत्ते हटाने की पुरजोर मांग
जैसे ही अमर सिंह का पार्थिव शरीर मियाला गांव में उनके आवास पर पहुंचा, पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले मुखिया को इस तरह अकस्मात खो देने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक की पत्नी और संतानों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, जिन्हें ढांढस बंधाने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं। दोपहर बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए गमगीन वातावरण में अमर सिंह का अंतिम संस्कार संपन्न कर दिया गया।
इस मार्मिक घटना के बाद से न केवल मियाला गांव, बल्कि पूरे देवगढ़ थाना क्षेत्र के काश्तकारों में एक अजीब सा डर समा गया है। लोग अपने खेतों की तरफ अकेले जाने से भी झिझक रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने उपखंड और जिला प्रशासन से यह मांग उठाई है कि इलाके के पेड़ों और सुनसान ढांचों पर लगे खतरनाक मधुमक्खियों के छत्तों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से हटवाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि कृषि और वन विभाग को सक्रिय होकर खेतों में कार्य करने वाले अन्नदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, जिससे भविष्य में किसी अन्य परिवार का सहारा इस तरह न छिन सके।



















