गोंडा जिले में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए बरसात का मौसम एक साथ मौका भी है और चुनौती भी। बारिश से खेत को जरूरी नमी मिल जाती है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन अगर खेत में पानी ज्यादा दिन तक टिका रह गया तो वही बारिश गन्ने की पूरी फसल चौपट कर सकती है।
जलभराव से जड़ों को होता है सबसे ज्यादा नुकसान
प्रगतिशील किसान राघवेंद्र मिश्र के मुताबिक जलभराव गन्ने की जड़ों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। खेत में पानी भरा रहने से जड़ें सड़ने लगती हैं, पौधों का विकास थम जाता है और फसल में कई तरह की बीमारियां लगने का डर बना रहता है। ऐसे में उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है और किसान की मेहनत बेकार जा सकती है।
24 से 48 घंटे के अंदर निकालें खेत का पानी
राघवेंद्र मिश्र ने बताया कि गन्ने के खेत में 24 से 48 घंटे से ज्यादा पानी नहीं रुकना चाहिए। इससे ज्यादा समय तक पानी टिका रहा तो जड़ें कमजोर पड़ने लगती हैं और पौधे मुरझाने लगते हैं। इसलिए बारिश थमते ही सबसे पहला काम खेत से अतिरिक्त पानी निकालना होना चाहिए।
नालियां बनाकर करें निकासी, समय-समय पर करें निरीक्षण
उन्होंने सुझाव दिया कि खेत में जगह-जगह नालियां बनाकर पानी की निकासी लगातार होते रहनी चाहिए, ताकि बारिश का पानी खेत में जमा न हो। इसके साथ ही किसानों को समय-समय पर खेत का निरीक्षण करते रहना चाहिए। अगर किसी पौधे में कीट या बीमारी का असर दिखे तो देर किए बिना कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर सही दवा का छिड़काव कर देना चाहिए।
खरपतवार हटाना और गन्ने की बंधाई भी जरूरी
राघवेंद्र मिश्र के अनुसार बरसात के मौसम में खेत को खरपतवार से मुक्त रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि खरपतवार मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, जिससे गन्ने की बढ़वार धीमी पड़ जाती है। इसके अलावा तेज बारिश और आंधी में गन्ने के पौधे गिरने का खतरा रहता है, ऐसे में समय रहते पौधों की बंधाई कर देनी चाहिए ताकि फसल सुरक्षित बनी रहे।
सही समय पर उर्वरक डालना भी फायदेमंद
राघवेंद्र मिश्र बताते हैं कि इसी मौसम में गन्ने की फसल में उर्वरक डालना बहुत लाभदायक साबित होता है, क्योंकि यह समय गन्ने की बढ़वार के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान खेत में उर्वरक डाल दिया जाए तो फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार देखने को मिलता है। उनका कहना है, "समय पर पानी निकालने, साफ-सफाई और नियमित निगरानी से बरसात में भी गन्ने की अच्छी पैदावार मिल सकती है।" थोड़ी सी सतर्कता बरतकर किसान भारी नुकसान से बच सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।



















