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घर के बगीचे को महकाने के लिए सितंबर और अक्टूबर के महीनों में लगाएं ये पांच खुशबूदार पौधेझारखंड
18 सित॰ 2026, 3:18 pm (7 दिन पहले)· 2

घर के बगीचे को महकाने के लिए सितंबर और अक्टूबर के महीनों में लगाएं ये पांच खुशबूदार पौधे

सितंबर और अक्टूबर का मौसम बागवानी के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है, जिसमें आप मधु कामिनी, हरसिंगार और गंधराज जैसे सुगंधित पौधों को लगाकर अपने आशियाने को महका सकते हैं।

बागवानी के शौकीनों के लिए सितंबर और अक्टूबर का महीना अपने घर के बगीचे को नया रूप देने का सबसे बेहतरीन समय होता है। इस बदलते मौसम में कुछ खास खुशबूदार पौधों को अपने घर या बालकनी में जगह देकर आप पूरे माहौल को खुशनुमा बना सकते हैं। बोकारो के एक प्रसिद्ध नर्सरी एक्सपर्ट अभिषेक ठाकुर के अनुसार, इस मौसम में ऐसे कई बेहतरीन पौधों का चयन किया जा सकता है जो बहुत कम जगह में भी आसानी से पनप जाते हैं। ये पौधे न केवल आपके घर-आंगन को सुंदर फूलों से सजाएंगे, बल्कि अपनी भीनी-भीनी खुशबू से पूरे वातावरण को भी महका देंगे।

तेजी से बढ़ने वाला और सदाबहार पौधा है मधु कामिनी

अगर आप अपने बगीचे के लिए किसी ऐसे पौधे की तलाश में हैं जो जल्दी बड़ा हो जाए, तो मधु कामिनी एक बेहतरीन विकल्प है। यह पौधा लगभग हर स्थानीय नर्सरी में बहुत ही आसानी से मिल जाता है। मधु कामिनी अपनी घनी हरियाली और बेहद मनमोहक खुशबू के लिए जाना जाता है। इसे आप अपने घर के किसी भी सामान्य गमले में आसानी से लगा सकते हैं, जिससे कम जगह वाले घरों या बालकनी में भी इसे उगाना बेहद आसान हो जाता है। इसकी मीठी खुशबू न केवल इंसानों को आकर्षित करती है, बल्कि यह रंग-बिरंगी तितलियों और छोटे पक्षियों को भी आपके बगीचे की तरफ खींच लाती है। कीमत की बात करें तो किसी भी सामान्य नर्सरी में यह सुंदर पौधा मात्र 50 से 60 रुपये की शुरुआती कीमत में आसानी से मिल जाता है।

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हरसिंगार या पारिजात के आकर्षक और खुशबूदार फूल

इस मौसम में लगाया जाने वाला दूसरा सबसे शानदार पौधा हरसिंगार है, जिसे कई लोग पारिजात के नाम से भी पुकारते हैं। इसके सफेद रंग के छोटे फूल देखने में बेहद सुंदर लगते हैं, जिनके बीच में नारंगी रंग की डंडी होती है। इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके फूल मुख्य रूप से रात के समय खिलते हैं और अपनी खुशबू से पूरे वातावरण को सराबोर कर देते हैं। सितंबर और अक्टूबर का महीना इस पौधे को लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि इस पौधे को सही धूप, मिट्टी और नियमित रूप से पानी दिया जाए, तो महज एक महीने के भीतर ही इसमें सुंदर और सुगंधित फूल आने शुरू हो जाते हैं।

सुनहरे फूलों वाला ग्राफ्टेड सोन चंपा

अपने बगीचे में थोड़ी भव्यता और अनोखा रंग जोड़ने के लिए आप ग्राफ्टेड सोन चंपा के पौधे का चुनाव कर सकते हैं। इसके सुनहरे पीले रंग के फूल दिखने में बेहद खूबसूरत और शाही लगते हैं। इस पौधे को भी आप बड़े आराम से किसी मध्यम आकार के गमले में लगा सकते हैं, जिससे यह शहरी घरों की छतों या बालकनी के लिए बिल्कुल उपयुक्त बन जाता है। सर्दियों के मौसम में इसके फूलों से निकलने वाली मीठी खुशबू आपके मन को तरोताजा कर देगी। स्थानीय नर्सरी में ग्राफ्टेड सोन चंपा के पौधे की कीमत उसके आकार और सेहत के हिसाब से लगभग 100 रुपये से शुरू होती है।

गंधराज यानी सुगंधों का राजा

बगीचे को तेज और मनमोहक महक से भरने के लिए गंधराज का पौधा एक बेहतरीन विकल्प है। इसके बड़े और सफेद रंग के फूल अपनी बेहद तेज खुशबू के लिए जाने जाते हैं, यही वजह है कि इसे आमतौर पर सुगंधों का राजा भी कहा जाता है। सितंबर और अक्टूबर के महीनों में इस पौधे में बहुत ही सुंदर फूल खिलते हैं। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसे फलने-फूलने के लिए बहुत ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती है और इसे छोटे स्थानों पर भी आसानी से उगाया जा सकता है। जब यह पौधा सफेद फूलों से पूरी तरह लद जाता है, तो इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। नर्सरी में आकार के आधार पर गंधराज का पौधा लगभग 50 रुपये की शुरुआती कीमत पर मिल जाता है।

रात में अपनी महक बिखेरने वाली रात की रानी

हमारी सूची में अगला नाम रात की रानी का है, जो अपनी अनोखी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। इसके छोटे-छोटे सफेद फूल केवल सूर्यास्त के बाद यानी रात के समय ही खिलते हैं और हवा में एक बेहद सम्मोहक खुशबू छोड़ते हैं। इस पौधे को गमले में लगाना बेहद आसान है और इसकी देखरेख के लिए भी बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती है। शाम होते ही इसके फूल खिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अक्टूबर और नवंबर के महीनों के दौरान इस पौधे में सबसे बेहतरीन और घने फूल देखने को मिलते हैं, जिससे सर्दियों की शुरुआत में आपका घर महकता रहता है।

सदाबहार और पारंपरिक देसी गुलाब

इन पांच मुख्य खुशबूदार पौधों के अलावा, पारंपरिक देसी गुलाब भी आपके घर और बगीचे के लिए एक सदाबहार और बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। इसे उगाने के लिए बहुत बड़ी जमीन की जरूरत नहीं होती है, बल्कि इसे छोटे गमलों या हैंगिंग बास्केट में भी आसानी से उगाया जा सकता है। देसी गुलाब के खूबसूरत लाल-गुलाबी फूल और उनकी प्राकृतिक खुशबू आपके घर की बालकनी या मुख्य प्रवेश द्वार की सुंदरता में चार चांद लगा सकती है।

सवाल-जवाब

सितंबर और अक्टूबर में कौन से खुशबूदार पौधे लगाए जा सकते हैं?
इस मौसम में आप मधु कामिनी, हरसिंगार (पारिजात), ग्राफ्टेड सोन चंपा, गंधराज और रात की रानी जैसे खुशबूदार पौधे लगा सकते हैं।
मधु कामिनी पौधे की क्या खासियत है और इसकी कीमत कितनी है?
यह एक तेजी से बढ़ने वाला खुशबूदार पौधा है जिसे गमले में भी लगाया जा सकता है। नर्सरी में यह लगभग 50 से 60 रुपये की कीमत में मिल जाता है।
हरसिंगार के पौधे में लगाने के कितने समय बाद फूल आने लगते हैं?
सितंबर-अक्टूबर में लगाने के बाद, सही देखभाल मिलने पर हरसिंगार के पौधे में करीब एक महीने में फूल आने की शुरुआत हो सकती है।
गंधराज पौधे को 'सुगंधों का राजा' क्यों कहा जाता है?
गंधराज में बेहद खूबसूरत सफेद फूल आते हैं जिनकी खुशबू बहुत तेज और मनमोहक होती है, जो पूरे घर के वातावरण को महका देती है।
रात की रानी के पौधे में किस महीने में सबसे अच्छे फूल देखने को मिलते हैं?
रात की रानी के पौधे में अक्टूबर और नवंबर के महीनों के दौरान बेहतर और घने फूल देखने को मिलते हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच उत्तर भारत के शहरों में खुली जगहें लगातार सिमट रही हैं। ऐसे में गृह-बागवानी केवल एक शौक नहीं, बल्कि पर्यावरण और लोक नीति के लिहाज से भी एक जरूरी कदम है। हमारे शहरों में बढ़ते प्रदूषण और तापमान को नियंत्रित करने के लिए हरसिंगार और मधु कामिनी जैसे पारंपरिक पौधों को बढ़ावा देना आवश्यक है। यह ग्राउंड रिपोर्टिंग के नजरिए से स्थानीय नर्सरी उद्योग और क्षेत्रीय स्वरोजगार को भी मजबूत करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

रोहन की बात को आगे बढ़ाते हुए, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नजरिए से भी इसका एक बड़ा पहलू है। घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में सक्रिय रूप से इस्तेमाल होने वाली बालकनी और घरेलू बगीचे 'एक्टिव सर्विलांस' यानी प्राकृतिक निगरानी का काम करते हैं। जब लोग अपने पौधों की देखभाल के लिए बाहर आते हैं, तो आस-पास की गतिविधियों पर उनकी नजर रहती है, जिससे गली-मोहल्लों में चोरी और छिटपुट अपराधों की गुंजाइश कम होती है। साथ ही, हरियाली से कम होने वाला मानसिक तनाव घरेलू कलह और अवसाद जनित विवादों को रोकने में भी सहायक है।

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