वन्यजीव प्रेमियों और सैलानियों के लिए एक बेहतरीन खबर सामने आई है। असम का प्रसिद्ध मानस नेशनल पार्क आगामी 2 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए फिर से खुलने जा रहा है। मानसून के मौसम के दौरान सालाना बंद रहने के बाद, इस कदम के साथ ही साल 2026-27 के पर्यटन सीजन की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी।
उद्घाटन समारोह और जरूरी नियम
बांसबाड़ी रेंज के रेंजर नीतीश बोरो ने जानकारी दी है कि नेशनल पार्क के दूसरे मुख्य प्रवेश द्वार पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसके जरिए इस नए सीजन का औपचारिक शुभारंभ होगा। मानसून की विदाई के साथ ही देश-विदेशी सैलानी इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की खूबसूरती का दीदार करने के लिए यहां पहुंच सकेंगे। पार्क प्रशासन के अनुसार, मानस नेशनल पार्क अगले आदेश तक खुला रहेगा। यह पूरा संचालन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और असम वन्यजीव (संरक्षण) नियम, 1997 के तहत किया जाएगा।
रेंज के हिसाब से साप्ताहिक बंदी की लिस्ट
पार्क में घूमने की योजना बना रहे सैलानियों को विभिन्न रेंज की साप्ताहिक बंदी के नियमों का खास ध्यान रखना होगा। अधिकारियों द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न रेंज में साप्ताहिक बंदी इस प्रकार रहेगी
- भुयानपारा रेंज प्रत्येक गुरुवार को पर्यटकों के लिए बंद रहेगी।
- बांसबाड़ी रेंज में मंगलवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा।
- पानबाड़ी रेंज शुक्रवार को बंद रखी जाएगी।
- कुकलुंग रेंज में बुधवार को पर्यटकों का प्रवेश वर्जित रहेगा।
मानसून के दौरान क्यों बंद रहता है पार्क
वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यटकों के बचाव और बेहतर पार्क प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए इस नेशनल पार्क को 5 जून, 2026 से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था। इस मानसून बंदी के दौरान पार्क के भीतर चलने वाली तमाम गतिविधियां जैसे जीप सफारी, एलीफेंट (हाथी) सफारी और बोटिंग पूरी तरह से ठप थीं। हाल ही में इस पार्क से 'दुर्गा' नाम के एक हाथी को कथित तौर पर स्थानांतरित (ट्रांसफर) किए जाने को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं।
विविधता से भरा एक वैश्विक धरोहर स्थल
हिमालय की तलहटी में स्थित मानस नेशनल पार्क की सीमाएं पड़ोसी देश भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क से मिलती हैं। पूर्वोत्तर भारत का यह पार्क अपने अनोखे जैव विविधता हॉटस्पॉट और पर्यावरण-पर्यटन के लिए जाना जाता है। यहाँ असम रूफ्ड टर्टल (असमिया कछुआ), हिस्पिड हेयर (सफेद बालों वाला खरगोश), गोल्डन लंगूर और पिग्मी हॉग (छोटे जंगली सूअर) जैसे बेहद दुर्लभ और लुप्तप्राय जीव पाए जाते हैं।





















