प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में देश को संबोधित किया। इस संबोधन के दौरान उन्होंने साल की शुरुआत में मनाए गए 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय इतिहास की उस अटूट जीवटता और संघर्ष क्षमता को याद किया जिसने सदियों के अत्याचार और क्रूर हमलों के बाद भी अपनी सांस्कृतिक धरोहरों और राष्ट्रीय स्वाभिमान को हमेशा सहेज कर रखा है।
सोमनाथ और देश के स्वाभिमान की ऐतिहासिक गाथा
PM मोदी ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए देशवासियों को याद दिलाया कि आज से ठीक एक हजार साल पहले, यानी साल 1026 में, आक्रांता मोहम्मद गजनी ने भारत के गौरवशाली सोमनाथ मंदिर पर हमला कर उसे भारी नुकसान पहुँचाया था। उस समय विदेशी हमलावरों का मुख्य उद्देश्य भारत की आध्यात्मिक शक्ति, समृद्धि और सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह से मिटाना था। लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि सोमनाथ को नष्ट करने की मंशा रखने वाले हमलावरों का आज दुनिया में कोई वजूद तक नहीं बचा है। इसके विपरीत, सोमनाथ का भव्य मंदिर आज भी विशाल समुद्र के किनारे पूरी भव्यता, गरिमा और स्वाभिमान के साथ अडिग खड़ा है। यह पवित्र स्थल पूरे देश को अमरता और कभी न टूटने वाले हौसले का आशीर्वाद दे रहा है। इसी गौरवमयी इतिहास और जीवटता को सम्मान देने के लिए इस वर्ष सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भव्य आयोजन किया गया था।
मोढेरा सूर्य मंदिर का ऐतिहासिक संघर्ष और संकल्प
अपने संबोधन में PM मोदी ने इतिहास की एक और महत्वपूर्ण घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जिस वर्ष सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया गया था, यानी 1026 में, ठीक उसी समय गुजरात के मोढेरा में स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर को भी आक्रमणकारियों के भीषण कोप का सामना करना पड़ा था। इस तरह मोढेरा सूर्य मंदिर के विध्वंस को भी अब पूरे 1,000 साल बीत चुके हैं। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर उस समय बिल्कुल नया था। इसका निर्माण आक्रमण से ठीक एक साल पहले, यानी साल 1025 में राजा भीमदेव प्रथम ने करवाया था। राजा भीमदेव प्रथम ने इस मंदिर को बेहद खूबसूरती और वास्तुकला की बारीकियों के साथ बनवाया था, लेकिन निर्माण के मात्र एक साल बाद ही इसे खंडित कर दिया गया।
विपरीत परिस्थितियों में राजा भीमदेव प्रथम का साहस
PM मोदी ने कहा कि सोमनाथ जैसे परम आस्था के बड़े केंद्रों का विध्वंस और देश के अन्य हिस्सों में लगातार हो रहे हमले किसी भी समाज या शासन का मनोबल पूरी तरह से तोड़ने के लिए काफी थे। ऐसे विकट समय में अक्सर शासक हार मान लेते हैं, लेकिन राजा भीमदेव प्रथम ने विपरीत परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय अप्रतिम साहस और वीरता का परिचय दिया। उन्होंने न केवल मोहम्मद गजनी की सेना का डटकर मुकाबला किया, बल्कि अत्यंत कम समय के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो चुके मोढेरा सूर्य मंदिर का पुनर्निर्माण भी सुनिश्चित कराया। इसी जीवटता का परिणाम था कि बार-बार तोड़े जाने के बाद भी सोमनाथ और मोढेरा जैसे मंदिर बार-बार अपने पैरों पर खड़े होते रहे।
विरासत के संरक्षण से लेकर सौर ऊर्जा के सूर्य ग्राम तक का सफर
ऐतिहासिक रूप से मोढेरा मंदिर पर हमलों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। बाद के दौर में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने वास्तुकला के इस भव्य और उत्कृष्ट मंदिर को दोबारा भारी क्षति पहुँचाई। इसके बावजूद भारतीयों की आस्था को समाप्त नहीं किया जा सका। PM मोदी ने रेखांकित किया कि भारत के लोगों की सूर्य के प्रति आस्था सिर्फ पत्थरों के मंदिरों और वास्तुकला तक सीमित नहीं है। भारतीय संस्कृति में सूर्य उपासना का अर्थ प्रकाश, ऊर्जा, विज्ञान और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा से जुड़ा है। इसी वैज्ञानिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण के कारण आज का मोढेरा केवल अपने प्राचीन सूर्य मंदिर के ऐतिहासिक अवशेषों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह देश के सामने आधुनिक प्रगति की नई मिसाल बन चुका है। मोढेरा आज भारत का पहला 'सूर्य ग्राम' यानी पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला सोलर विलेज बन चुका है।
सांस्कृतिक उत्सव और पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील
आधुनिक दौर में मोढेरा को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है जहाँ पर्यटकों के लिए कई बेहतरीन सुविधाओं की शुरुआत की गई है। हर साल जनवरी के महीने में, मकर संक्रांति के त्योहार के बाद, ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के प्रांगण में भव्य मोढेरा नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस सांस्कृतिक उत्सव में भारत के सर्वश्रेष्ठ शास्त्रीय और पारंपरिक नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं। PM मोदी ने देशवासियों से भावुक अपील की कि वे इस ऐतिहासिक और आधुनिक गौरव के अद्भुत संगम को देखने के लिए मोढेरा की यात्रा अवश्य करें।














