उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में नदियों के विकराल रूप ने ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मचाई है। जिले के बबुरी क्षेत्र के तहत आने वाला नगही गांव इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है। एक ओर जहाँ गंगा नदी का जलस्तर लगातार ऊपर उठ रहा है, वहीं दूसरी ओर चंद्रप्रभा नदी के उफान ने स्थानीय निवासियों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। दोहरी नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने से नगही गांव चारों तरफ से पानी से घिरकर एक जलमग्न टापू में तब्दील हो चुका है। गांव की आवासीय बस्तियों और मकानों के भीतर बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने के कारण ग्रामीण अपना घर-बार छोड़कर किसी तरह ऊंचे स्थानों पर तिरपाल तानकर या खुले आसमान के नीचे शरण लेने को विवश हैं। इस आपदा के कारण बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और पालतू मवेशियों के सामने जीवन रक्षा और भोजन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
चारों तरफ जमा पानी से कटा संपर्क, रात के समय मेडिकल इमरजेंसी का डर
बाढ़ के पानी के लगातार फैलने से नगही गांव के विभिन्न हिस्सों का मुख्य रास्तों से संपर्क लगभग पूरी तरह से टूट गया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि ग्रामीणों को अपनी रोजाना की जरूरतों के लिए गहरे और तेज बहाव वाले पानी के बीच से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। दिन की रोशनी में तो ग्रामीण जैसे-तैसे पानी के रास्ते से निकल जाते हैं, लेकिन सूरज ढलते ही स्थिति बेहद भयावह और चिंताजनक हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रात के समय किसी बच्चे या बुजुर्ग की अचानक तबीयत खराब हो जाए, अथवा किसी अति-आवश्यक सामग्री की जरूरत पड़े, तो गांव से बाहर निकलकर अस्पताल या बाजार पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस वर्ष बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जलस्तर अचानक बढ़ने की वजह से कई परिवारों को आधी रात को ही अपने-अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। अचानक आई इस विपदा में कई परिवार अपनी बकरियों, गायों और अन्य पालतू जानवरों को साथ लेकर जान बचाने के लिए ऊंचे टीलों और सड़कों के किनारों पर शरण लेने पहुंचे हैं।
लक्ष्मीना देवी का दर्द: घरों में भरा पानी, चूल्हा जलाने की जगह भी नहीं बची
बाढ़ की इस विभीषिका ने ग्रामीणों की रसोई और भोजन व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। पीड़ित महिला लक्ष्मीना देवी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनके सामने इस समय सबसे बड़ा संकट खाने-पीने का खड़ा हो गया है। घर के हर कमरे में पानी भर जाने के बाद अब भोजन पकाने के लिए सूखी जगह तक नहीं बची है। स्थिति यह है कि उन्हें अपने पूरे परिवार और बकरियों के साथ किसी अन्य स्थान पर जाकर शरण लेनी पड़ी है।
लक्ष्मीना देवी ने बताया कि घर के अंदर रखा भूसा, पशुओं का हरा चारा और अनाज का पूरा स्टॉक पानी में डूबकर सड़ चुका है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे परिवार के सदस्यों के लिए भोजन कहाँ तैयार करें और उन्हें दो वक्त की रोटी कैसे उपलब्ध कराएं। नगही गांव के कई अन्य ग्रामीण भी दूसरों के पक्के मकानों की छतों या ऊंचे सार्वजनिक स्थानों पर जाकर किसी तरह चूल्हा जलाने को मजबूर हैं। बाढ़ के कारण आम जनजीवन की गति पूरी तरह रुक गई है और दैनिक गतिविधियां अस्त-व्यस्त हो चुकी हैं।
सुबह नौ बजे घर में घुसा पानी, नंदलाल का बक्सा, बेड, फ्रिज और कूलर हुआ खराब
गांव के एक अन्य निवासी नंदलाल ने बाढ़ से हुए भारी आर्थिक नुकसान का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि सुबह लगभग 9 बजे अचानक बाढ़ का पानी तेजी से उनके मकान के अंदर दाखिल हो गया। देखते ही देखते घर के अंदर रखा तमाम कीमती सामान जलमग्न हो गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि बक्सा, बेड, कूलर और फ्रिज सहित घरेलू उपयोग की कई महत्वपूर्ण वस्तुएं पूरी तरह से भीगकर बर्बाद हो गईं।
नंदलाल ने कहा कि वर्तमान में गांव से बाहर जाने या एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचने के लिए केवल पानी के बीच से गुजरने वाले संकरे रास्तों और ऊंचे टीलों का ही एकमात्र सहारा बचा है। यद्यपि कुछ स्थानों पर जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद गांव के अधिकांश हिस्सों में हालात सामान्य नहीं हो सके हैं और जलजमाव की स्थिति बनी हुई है।
छोटे बच्चों और बेजुबान मवेशियों पर मंडराया स्वास्थ्य और भुखमरी का खतरा
बाढ़ से प्रभावित नगही गांव में सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति छोटे बच्चों और पालतू मवेशियों की बनी हुई है। चारों तरफ पानी से घिरे ऊंचे स्थानों पर अपने परिजनों के साथ तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर मासूम बच्चों के चेहरे पर दहशत साफ देखी जा सकती है। माता-पिता के सामने बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके लिए साफ पानी, पौष्टिक भोजन और संक्रामक बीमारियों से बचाव की चिंता सता रही है।
इंसानों के साथ-साथ बेजुबान मवेशी भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में बुरी तरह फंसे हुए हैं। कई किसान परिवार अपनी गायों और बकरियों को बचाकर ऊंचे स्थानों पर ले आए हैं, लेकिन चारों तरफ जलभराव होने के कारण पशुओं के लिए सूखा चारा जुटाना और उनके लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना एक विकट समस्या बन गया है। बिना चारे के पशु भूखे रहने को मजबूर हैं।
रामावंती और कालिंदी देवी ने लगाई गुहार: प्रशासन जल्द पहुंचाए राहत सामग्री और चारा
रामावंती देवी ने अपनी परेशानी व्यक्त करते हुए बताया कि इस बाढ़ में उनका घर और कृषि योग्य जमीन दोनों पूरी तरह से डूब गए हैं। जमीन जलमग्न होने से खेती-किसानी ठप हो गई है, वहीं घर में पानी होने से भोजन पकाने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से तत्काल राहत और वित्तीय सहायता की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन गरीब परिवारों के लिए स्थिति और भी अधिक कष्टदायक हो गई है जिनके घरों में पानी पूरी तरह भर चुका है और जिनके पास ऊंचे या सुरक्षित स्थानों पर जाने का कोई निजी साधन नहीं है।
कालिंदी देवी और गांव की अन्य महिलाओं ने भी बाढ़ से उत्पन्न भयावह परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पानी अभी भी रिहाइशी मकानों के चारों तरफ जमा है। किसी तरह अस्थाई तौर पर ऊंचे स्थानों पर चूल्हा जलाकर भोजन तैयार किया जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और वृद्धि होती है, तो नगही गांव में स्थिति नियंत्रण से बाहर और अधिक गंभीर हो सकती है। नगही गांव की वर्तमान स्थिति यह स्पष्ट दर्शाती है कि यहाँ फंसे ग्रामीणों को तुरंत तैयार भोजन, पीने का शुद्ध पानी, पशुओं के लिए सूखा चारा, तिरपाल और सुरक्षित आवागमन के लिए नावों की तत्काल आवश्यकता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बिना किसी विलंब के राहत सामग्री वितरण और चिकित्सा टीमें गांव में भेजी जाएं।

















