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गंगा की तेज धारा में बहे तीन सहपाठी, दोस्त को बचाने के प्रयास में जगमाल बीघा के छात्र लापताबिहार
16 अग॰ 2026, 1:42 pm (40 दिन पहले)· 3

गंगा की तेज धारा में बहे तीन सहपाठी, दोस्त को बचाने के प्रयास में जगमाल बीघा के छात्र लापता

पटना के खुसरूपुर स्थित आदिलपुर घाट पर रविवार सुबह गंगा में नहाने गए तीन 15 वर्षीय छात्र डूब गए। एसडीआरएफ की टीम मोटरबोट से तलाश कर रही है।

बिहार की राजधानी पटना के निकट खुसरूपुर थाना क्षेत्र में रविवार की सुबह एक दुखद हादसा सामने आया। आदिलपुर घाट पर गंगा नदी में स्नान करने पहुंचे छह किशोरों के समूह में से तीन छात्र नदी की तेज धारा और अत्यधिक गहराई की चपेट में आकर लापता हो गए। नहाने के दौरान एक दोस्त को डूबता देख उसे बचाने के प्रयास में दो अन्य साथी भी गहरे पानी में उतर गए, जिसके बाद तीनों का कोई सुराग नहीं मिल सका। घटना की सूचना मिलते ही तट पर चीख-पुकार मच गई और पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

दोस्त को बचाने के प्रयास में बढ़ा हादसा

घटना रविवार सुबह लगभग 9:30 बजे की है। खुसरूपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जगमाल बीघा गांव से छह दोस्तों का एक समूह गंगा नदी में नहाने के लिए आदिलपुर घाट गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्नान करने के दौरान 15 वर्षीय अंकुश अचानक संतुलन खो बैठा और नदी के गहरे हिस्से में चला गया। उसे पानी में संघर्ष करता और डूबता देख उसके दो करीबी दोस्त, रौनक और सुंदरम, तुरंत उसे बचाने के लिए आगे बढ़े। दुर्भाग्यवश, नदी के तेज बहाव और अत्यधिक गहराई के कारण दोनों भी खुद को संभाल नहीं सके और तीनों किशोर देखते ही देखते पानी में अदृश्य हो गए। तट पर मौजूद अन्य साथियों ने तुरंत ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी।

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11वीं कक्षा के छात्र थे तीनों, दो परिवार के इकलौते चिराग

गंगा की धारा में लापता हुए तीनों किशोरों की उम्र 15 वर्ष थी और वे सभी इसी वर्ष 11वीं कक्षा में पहुंचे थे। इनकी पहचान जगमाल बीघा निवासी अंकुश (पिता जितेंद्र सिंह), रौनक (पिता राजीव सिंह) और सुंदरम (पिता रत्नेश सिंह) के रूप में हुई है। पारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार, अंकुश अपने माता-पिता का बड़ा पुत्र था और उसका एक छोटा भाई है। वहीं रौनक और सुंदरम दोनों ही अपने-अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। तीनों किशोरों के इस प्रकार अचानक गायब होने से उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन और ग्रामीणों का आक्रोश

घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने अपने स्तर पर नदी में उतरकर तीनों छात्रों की खोजबीन शुरू की। सूचना मिलने के बाद पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा, हालांकि परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन पर सूचना देने के बाद भी देरी से पहुंचने का आरोप लगाया। इसके पश्चात राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम को घटनास्थल पर तैनात किया गया। एसडीआरएफ के गोताखोर मोटरबोट और आधुनिक संसाधनों के साथ गंगा नदी में गहन खोज अभियान चला रहे हैं। हालांकि नदी में जल का तेज प्रवाह और गहराई रेस्क्यू टीम के कार्य में बड़ी बाधा बन रही है। फिलहाल तीनों में से किसी भी छात्र का सुराग नहीं मिल पाया है और तलाश लगातार जारी है।

सवाल-जवाब

यह हादसा पटना के किस स्थान पर हुआ?
यह घटना बिहार की राजधानी पटना के खुसरूपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आदिलपुर घाट पर गंगा नदी में हुई।
गंगा नदी में डूबने वाले तीन किशोरों की पहचान क्या है?
डूबने वाले तीनों किशोर 15 वर्षीय अंकुश (पिता जितेंद्र सिंह), रौनक (पिता राजीव सिंह) और सुंदरम (पिता रत्नेश सिंह) हैं, जो जगमाल बीघा गांव के रहने वाले थे।
हादसा किस समय और कैसे घटित हुआ?
हादसा रविवार सुबह करीब 9:30 बजे हुआ जब अंकुश गहरे पानी में डूबने लगा और उसे बचाने के प्रयास में रौनक और सुंदरम भी तेज धारा में बह गए।
लापता किशोर किस कक्षा में पढ़ाई करते थे?
तीनों किशोर आपस में दोस्त थे और इसी वर्ष 11वीं कक्षा में पहुंचे थे।
राहत और बचाव कार्य के लिए कौन सी टीम तैनात की गई है?
घटना के बाद एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को मोटरबोट और जरूरी संसाधनों के साथ नदी में सर्च ऑपरेशन के लिए उतारा गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में क्या चुनौतियां आ रही हैं?
गंगा नदी में जल का तेज बहाव और अत्यधिक गहराई होने के कारण एसडीआरएफ टीम को बचाव कार्य चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·39 दिन पहले

यह दुखद घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक सुरक्षा के बुनियादी ढांचे और नदी घाटों पर चेतावनी प्रणालियों की गंभीर कमी को उजागर करती है। खासकर मानसून या तेज बहाव के महीनों में घाटों पर बेरिकेटिंग, लाइफगार्ड और स्थानीय प्रशासन की निगरानी का अभाव ऐसी त्रासदियों को बुलावा देता है। भविष्य में ऐसी अनहोनी रोकने के लिए राज्य सरकार को संवेदनशील घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम और जन-जागरूकता अभियान चलाने की सख्त जरूरत है।

Ravikash Gupta@ravikash·39 दिन पहले

यह हादसा ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक उदासीनता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। जब तक नदी घाटों पर स्वचालित चेतावनी प्रणाली, त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और डिजिटल सर्विलांस जैसे सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए जाते, तब तक इस तरह की अनहोनी को रोक पाना कठिन होगा। सरकार और स्थानीय निकायों को ऐसे संवेदनशील घाटों की जियो-मैपिंग कर तत्काल प्रभाव से जीवन-रक्षक बुनियादी ढांचा विकसित करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी अपूरणीय क्षति न उठानी पड़े।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

यह घटना सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। गंगा के घाटों पर लगातार होने वाले हादसे यह दर्शाते हैं कि मानसून या तेज बहाव के समय जिला प्रशासन द्वारा चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और गोताखोरों की तैनाती जैसे एहतियाती कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील घाटों पर निगरानी बढ़ानी होगी ताकि ऐसी त्रादियां रोकी जा सकें।

Rohan Verma@rohan-verma·39 दिन पहले

यह हादसा इस बात का गंभीर संकेत है कि उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक गंगा के तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कागजों तक सीमित है। आदिलपुर घाट जैसी जगहों पर प्रशासन की सुस्ती और बैरिकेडिंग का अभाव हर साल कई परिवारों के इकलौते चिरागों को लील रहा है। केवल एसडीआरएफ की तलाशी से बात नहीं बनेगी; स्थानीय स्तर पर ग्राम स्तर से लेकर थाना प्रशासन तक को जवाबदेह बनाना होगा ताकि नदी के खतरनाक क्षेत्रों में किशोरों की आवाजाही को रोका जा सके।

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