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गोमती नदी पर साठ साल से खड़ा है बागेश्वर का यह पुल, चीन से जंग के बाद हुआ था निर्माणउत्तराखंड
7 सित॰ 2026, 7:20 pm (60 दिन पहले)· 1

गोमती नदी पर साठ साल से खड़ा है बागेश्वर का यह पुल, चीन से जंग के बाद हुआ था निर्माण

बागेश्वर की गोमती नदी पर बना यह पुल करीब 60 से 64 साल पुराना है और आज भी राष्ट्रीय राजमार्ग 309A पर भारी ट्रैफिक झेल रहा है, जिसकी नींव 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद पहाड़ों में सड़क संपर्क बढ़ाने की मुहिम से जुड़ी बताई जाती है.

उत्तराखंड के बागेश्वर शहर की पहचान सरयू और गोमती नदियों के संगम से जुड़ी है, और यहां खड़े कुछ पुराने पुल आज भी उस दौर की याद दिलाते हैं जब पहाड़ों में सड़कें बिछाने का काम जोर पकड़ रहा था. गोमती नदी पर बना गोमती मोटर पुल इन्हीं में से एक है, जिसकी उम्र करीब 60 से 64 साल के बीच आंकी जाती है. आज भी यह पुल शहर और आसपास के गांवों के बीच आवाजाही का मुख्य जरिया बना हुआ है.

1962 की जंग और सड़कों की नई सोच

जिला नागरिक समिति के सदस्य संजय शाह जगाती के मुताबिक, गोमती मोटर पुल 1960 के दशक में उस समय तैयार हुआ, जब पहाड़ी इलाकों में सड़क और यातायात ढांचे को मजबूत करने की कवायद तेज हो चली थी. उनका कहना है कि 1962 में हुई भारत-चीन जंग के बाद सीमा से सटे और पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क बढ़ाने की जरूरत को गंभीरता से महसूस किया गया, और इसी सोच के चलते बागेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल परियोजनाओं को रफ्तार मिली. गोमती मोटर पुल को भी इसी दौर की देन माना जाता है.

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बाजार तक पहुंच हुई आसान

पुल बनने से पहले आसपास के गांवों से बागेश्वर के बाजार तक सामान और लोगों को पहुंचाना आसान नहीं था. पुल तैयार होने के बाद यह दूरी काफी हद तक सिमट गई, जिससे स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिला. व्यापारियों के लिए यह रास्ता माल ढुलाई और खरीद-बिक्री, दोनों के लिहाज से अहम बन गया.

राजमार्ग 309A पर आज की अहमियत

मौजूदा वक्त में यह पुल राष्ट्रीय राजमार्ग 309A की एक जरूरी कड़ी है. बागेश्वर शहर से गुजरने वाले इस रास्ते पर हर दिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन दौड़ते हैं. पिछले कुछ दशकों में वाहनों की तादाद में जबरदस्त इजाफा हुआ है. एक वक्त था जब पुल पर आवाजाही सीमित हुआ करती थी, लेकिन अब बसें, ट्रक, मालवाहक गाड़ियां और निजी वाहन लगातार इस पर से गुजरते रहते हैं.

बढ़ते बोझ के बीच सुरक्षा पर सवाल

भारी वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या ने इस पुराने ढांचे पर दबाव भी बढ़ा दिया है. साठ साल से ज्यादा वक्त से बिना रुके इस्तेमाल में होने के चलते पुल की मजबूती और सुरक्षा को लेकर अलग-अलग मौकों पर चर्चा होती रही है. जानकारों की राय में किसी भी पुराने पुल को सुरक्षित बनाए रखने के लिए समय-समय पर तकनीकी जांच और जरूरत पड़ने पर मरम्मत का काम बेहद जरूरी होता है. लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए पुल की मौजूदा स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन भी उतना ही जरूरी माना जाता है, ताकि आगे किसी तरह का खतरा न बने.

गोमती के पुराने पुल से सरयू के झूला पुल तक

मौजूदा गोमती मोटर पुल से पहले इसी नदी पर एक और पुराना पुल हुआ करता था, जिसका ऐतिहासिक महत्व था. वक्त गुजरने के साथ वह ढांचा कमजोर पड़ता गया और आखिरकार 1970 के दशक में उसे हटाना पड़ा. उसके बाद से मौजूदा मोटर पुल ही इलाके की पूरी यातायात व्यवस्था संभाल रहा है. इसके अलावा बागेश्वर में सरयू नदी पर 1913 में बना झूला पुल भी शहर की विरासत का हिस्सा है. सदी भर से ज्यादा पुराना यह पुल बागेश्वर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा माना जाता है. इस तरह गोमती मोटर पुल और सरयू का पुराना झूला पुल, दोनों मिलकर बागेश्वर के बदलते दौर और विकास की अलग-अलग कहानियां बयां करते हैं.

सवाल-जवाब

गोमती मोटर पुल कितना पुराना है?
यह पुल करीब 60 से 64 साल पुराना है और 1960 के दशक में बना था.
यह पुल किस नदी पर और कहां बना है?
यह बागेश्वर शहर में गोमती नदी पर बना है.
पुल बनने की वजह क्या बताई गई है?
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में सड़क संपर्क मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई, जिसके चलते इस तरह के पुल बने.
आज यह पुल किस राजमार्ग का हिस्सा है?
यह वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग 309A का अहम हिस्सा है.
गोमती नदी पर पहले कौन सा पुल था?
मौजूदा पुल से पहले एक और पुराना ऐतिहासिक पुल था, जो जर्जर होने पर 1970 के दशक में हटा दिया गया.
बागेश्वर का सबसे पुराना पुल कौन सा माना जाता है?
सरयू नदी पर 1913 में बना झूला पुल शहर के सबसे पुराने पुलों में गिना जाता है.
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·60 दिन पहले

यह रिपोर्ट पहाड़ी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे और सामरिक महत्व को बेहतरीन ढंग से उजागर करती है। 1962 के बाद बनी ऐसी संपत्तियां आज भारी ट्रैफिक का दबाव झेल रही हैं, जिससे इनकी समयबद्ध तकनीकी जांच और लोड-असेसमेंट बेहद जरूरी हो गया है ताकि किसी भी अप्रिय हादसे को टाला जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·60 दिन पहले

यह ढांचा केवल आवाजाही का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्वतीय लॉजिस्टिक्स की एक संवेदनशील धुरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग 309A जैसे व्यस्त मार्ग पर साठ दशक पुराने इस मोटर पुल से भारी वाहनों का लगातार गुजरना कानून और लोक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती है। यदि समय रहते इसका स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं कराया गया, तो किसी भी आपात स्थिति में यह मार्ग अवरुद्ध हो सकता है, जिससे प्रशासनिक अमले और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा।

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