देहरादून के बाजारों में इस त्योहारी सीजन में एक अनोखा उत्पाद काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के बाजारों में इन दिनों वाटर सेंसर वाले दीये ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इन खास दीयों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें जलाने के लिए न तो पारंपरिक तेल की जरूरत पड़ती है और न ही बाती लगाने की कोई झंझट उठानी पड़ती है। स्थानीय खरीदारों के बीच इन आधुनिक दीयों की मांग में लगातार तेजी देखने को मिल रही है और यह स्थानीय दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हैं।
इन आधुनिक उत्पादों की कार्यप्रणाली बेहद दिलचस्प और तकनीकी रूप से उन्नत है। पलटन बाजार की दुकानों में बिकने वाले ये वाटर सेंसर दीये असल में तकनीक से संचालित होने वाले एलईडी उपकरण हैं, जो पहली नजर में बिल्कुल पारंपरिक मिट्टी के दीयों जैसे ही प्रतीत होते हैं। इनके निचले हिस्से में विशेष सेंसर लगे होते हैं, जो पानी के संपर्क में आते ही सक्रिय हो जाते हैं और लाइट स्वतः जल उठती है। इसके विपरीत, जैसे ही पानी सूखता है, यह दीया अपने आप बंद हो जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इन्हें एक बार खरीदने के बाद बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह काफी किफायती भी साबित होते हैं।
बाजार में उपलब्ध इन दीयों की कीमत और इनकी विभिन्न वैरायटी ग्राहकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। स्थानीय दुकानदार विनोद कुमार अग्रवाल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बाजार में इन दिनों कई तरह की मोमबत्तियां और दीये आए हुए हैं, लेकिन इन सबमें पानी से जलने वाले ये दीये सबसे अलग और अनूठे हैं। इन वाटर सेंसर दीयों का एक पैकेट मात्र 100 रुपए की किफायती कीमत पर मिल जाता है, जिसमें कुल 6 दीये होते हैं। ये दीये पारंपरिक मिट्टी के दीयों के रंग रूप के अलावा अन्य कई रंगों में भी उपलब्ध हैं। इनकी आकर्षक डिजाइन और कम कीमत ही वह मुख्य वजह है जिसके चलते लोग इन्हें अपने घरों की सजावट के लिए चुन रहे हैं।
सुरक्षा और सहूलियत का यह एक बेहतरीन मेल साबित हो रहा है। दुकानदार ने आगे बताया कि इस उत्पाद का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ता इन्हें जलाकर निश्चिंत होकर सो सकते हैं क्योंकि इनसे किसी भी प्रकार की आग लगने का कोई खतरा नहीं रहता है। पारंपरिक दीयों में अक्सर तेल खत्म होने या बाती खिसकने की वजह से दुर्घटना होने का डर बना रहता है, लेकिन इस तकनीक आधारित विकल्प में ऐसी कोई परेशानी नहीं आती है। यह बच्चों और बुजुर्गों वाले घरों के लिए भी पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके अलावा, तेज हवा चलने पर भी ये दीये बुझते नहीं हैं, जिसके कारण इन्हें घर के मंदिर, बालकनी या मुख्य दरवाजे पर बेझिझक रखा जा सकता है।
त्योहार के इस पावन अवसर पर लोग अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की तरफ भी तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। देहरादून में बिकने वाले ये वाटर सेंसर दीये इसी सकारात्मक बदलाव का एक जीवंत उदाहरण पेश करते हैं। ये आधुनिक दीये न तो किसी प्रकार का धुआं पैदा करते हैं और न ही इनमें तेल की बर्बादी होती है, जिससे प्रदूषण की समस्या से भी राहत मिलती है। बाजार में आ रहे इस तरह के नवीन उत्पाद त्योहार की रौनक को और अधिक बढ़ा रहे हैं और ग्राहकों का मानना है कि यह तकनीक और परंपरा का एक बहुत ही सुंदर मिश्रण है।





















