पारंपरिक व्यंजनों और संस्कृति के शौकीनों के लिए अब विभिन्न राज्यों के स्वाद का आनंद लेने के लिए लंबी यात्राएं करने की कोई आवश्यकता नहीं बची है। देहरादून शहर में चल रहे एक विशेष आयोजन के माध्यम से देश के अलग-अलग कोनों के पकवान एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। देहरादून के हिमालयन कल्चर ग्राउंड में सजे इस मेले को स्वाद और संस्कृति का बेहतरीन मिलन माना जा रहा है। यहां आने वाले लोग एक ही परिसर में कई राज्यों की रसोई का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
विभिन्न राज्यों के खास पकवानों का अनूठा संगम
इस आयोजन में स्थानीय गढ़वाली व्यंजनों के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों के प्रसिद्ध खान-पान को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। स्थानीय मंडुए के पारंपरिक व्यंजनों के अतिरिक्त आगंतुकों को गुजरात के लोकप्रिय ढोकला और खांडवी का खट्टा-मीठा स्वाद भी चखने को मिल रहा है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक सिडू और नेपाल के गर्म मोमोज तथा गरमा-गरम थुकपा जैसी डिशेज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। राजस्थानी दाल-बाटी-चूरमा का शाही अंदाज इस पूरे आयोजन की शान को और अधिक बढ़ा रहा है।
आगंतुकों और आयोजकों की खास प्रतिक्रियाएं
इस फेस्ट में पहुंची प्रिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने यहां ऐसा गुजराती भोजन चखा जिसका स्वाद उन्होंने पहले कभी नहीं लिया था। उन्होंने फाफड़ा और जलेबी के साथ-साथ स्वादिष्ट ढोकला का भी लुत्फ उठाया और कहा कि इसका स्वाद बिल्कुल गुजरात जैसा ही महसूस होता है। आयोजकों का कहना है कि हर स्टॉल पर उसी राज्य के विशेष कारीगरों को बुलाया गया है जो अपने पारंपरिक मसालों और घरेलू तरीकों से इन व्यंजनों को खुद तैयार कर रहे हैं।
सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अनूठा माध्यम
रिच संस्था के संस्थापक और अध्यक्ष आरके सिंह ने जानकारी दी कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश की समृद्ध पाक कला को एक ही मंच पर लाना है। यह आयोजन केवल भूख शांत करने का जरिया नहीं है बल्कि लोगों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम भी साबित हो रहा है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को न केवल भोजन मिल रहा है बल्कि उसके साथ जुड़ी परंपरा और कहानी से भी परिचित कराया जा रहा है। खाने के साथ-साथ लोक संगीत और पारंपरिक हस्तशिल्प यानी हैंडीक्राफ्ट की झलक भी इस आयोजन में देखने को मिल रही है।
वीकेंड पर परिवारों और युवाओं के लिए खास आकर्षण
परिवार और दोस्तों के साथ अवकाश के दिन बिताने के लिए यह आयोजन एक आदर्श स्थल बन गया है। यहां हर आयु वर्ग के लोगों की पसंद का विशेष ध्यान रखा गया है। जहां एक ओर बुजुर्गों को पारंपरिक धाम का स्वाद बेहद पसंद आ रहा है, वहीं दूसरी ओर युवा वर्ग मोमोज और ढोकला की तरफ आकर्षित हो रहा है। बच्चों के बीच चूरमा और खांडवी विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। एक ही स्थान पर इतने सारे राज्यों के जायके मिलने से स्थानीय लोग काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
स्टॉल संचालकों का उत्साह और आयोजन की मुख्य जानकारियां
गुजरात से आए स्टॉल संचालक रमेश भाई ने बताया कि देहरादून के लोगों द्वारा ढोकला को बहुत पसंद किया जा रहा है। हिमाचल से आईं सुनीता देवी ने साझा किया कि यहां के निवासी सिडू को बड़े चाव के साथ खा रहे हैं। वहीं नेपाली स्टॉल की संचालिका राधिका के अनुसार ठंड के मौसम में थुकपा की मांग सबसे अधिक बनी हुई है। राजस्थानी दाल-बाटी के स्टॉल पर भी लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। यह विरासत फूड फेस्ट देहरादून के हिमालयन कल्चर ग्राउंड में सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक जनता के लिए खुला रहता है और इसमें प्रवेश शुल्क मात्र 50 रुपए रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका हिस्सा बन सकें।



















