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गोराकुंड चौराहे पर पाइपलाइन टेस्टिंग में धंसी 40 करोड़ की स्मार्ट सिटी रोड, पानी का तेज बहाव देख डरे राहगीरमध्य प्रदेश
18 अग॰ 2026, 11:41 pm (25 दिन पहले)· 1

गोराकुंड चौराहे पर पाइपलाइन टेस्टिंग में धंसी 40 करोड़ की स्मार्ट सिटी रोड, पानी का तेज बहाव देख डरे राहगीर

इंदौर में बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री के बीच 40 करोड़ की लागत से बनी आदर्श सड़क सोमवार सुबह पानी की पाइपलाइन प्रेशर टेस्टिंग के दौरान गोराकुंड चौराहे पर अचानक धंस गई।

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत निर्मित मॉडल रोड की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गए हैं। बड़ा गणपति क्षेत्र से कृष्णपुरा छत्री तक लगभग 40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार की गई इस सड़क पर सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। गोराकुंड चौराहे के समीप जलापूर्ति लाइन की प्रेशर टेस्टिंग की जा रही थी, उसी दौरान दबाव सहन न कर पाने के कारण सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। पाइपलाइन फटने से पानी भारी दबाव के साथ सड़क चीरकर बाहर बहने लगा, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के बीच हड़कंप मच गया।

प्रेशर टेस्टिंग के दौरान फटा पाइप, सड़क पर फैला पानी

स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री वाले मार्ग को अत्याधुनिक सुविधाओं और टिकाऊ तकनीक से युक्त बनाने का दावा किया गया था। इस मार्ग के नीचे पेयजल वितरण प्रणाली, सीवरेज लाइन और अन्य जनसुविधाओं के लिए underground नेटवर्क बिछाया गया था। सोमवार सुबह जब संबंधित विभाग द्वारा नई पाइपलाइन की प्रेशर टेस्टिंग की जा रही थी, तब अचानक अत्यधिक दबाव के कारण पाइपलाइन के आसपास की जमीन नीचे धंस गई। इसके तुरंत बाद पानी तेज धार के साथ सड़क फाड़कर ऊपर आ गया। राहगीरों और वाहन चालकों ने जब अचानक सड़क से पानी का तेज फव्वारा और जलभराव निकलते देखा तो वे घबराकर पीछे हट गए। सीसीटीवी कैमरे में पूरी घटना दर्ज हुई है, जिसमें जल का तेज प्रवाह स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है।

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निर्माण कार्यों के स्तर पर उठे गंभीर सवाल

सड़क के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उंगलियां उठने लगी हैं। इंदौर नगर निगम के एमआईसी सदस्य तथा जानकारी समिति प्रभारी राजेन्द्र राठौड़ ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हुए निर्माण कार्यों पर प्रत्यक्ष सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इंदौर में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के बजट से संचालित स्मार्ट सिटी योजना के कई कार्य आरंभ से ही गुणवत्ता की कमियों के चलते विवादों में रहे हैं। उन्होंने उजागर किया कि निर्माण काल के दौरान उन्होंने तत्कालीन नगर निगम आयुक्त और तत्कालीन महापौर को लगातार घटिया निर्माण की शिकायतें दी थीं, लेकिन अधिकारियों ने कठोर दंडात्मक कदम उठाने के बजाय केवल कारण बताओ नोटिस जारी करने तक ही मामला सीमित रखा।

अधिकारियों के तबादले पर चिंता और उच्च स्तरीय जांच की मांग

एमआईसी सदस्य राजेन्द्र राठौड़ ने यह भी आरोप लगाया कि जिन जिम्मेदारों और इंजीनियरों के कार्यकाल में यह कमजोर निर्माण कार्य संपन्न हुआ, वे बाद में अपना स्थानांतरण कराकर इंदौर से चले गए। अब उन गड़बड़ियों का खमियाजा शहर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जिस सड़क के निर्माण पर चार वर्ष पहले करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, उस पर नगर निगम को बार-बार डामरीकरण और पैचवर्क करना पड़ रहा है, जो इसकी खराब गुणवत्ता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मामले में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र भेजा है। उन्होंने इस पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

सवाल-जवाब

इंदौर में सड़क धंसने और पानी का तेज बहाव निकलने की घटना कहां हुई?
यह घटना इंदौर में बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री मार्ग पर गोराकुंड चौराहे के पास हुई।
सड़क टूटने और पाइप फटने का मुख्य कारण क्या था?
सोमवार सुबह सड़क के नीचे बिछाई गई नई पानी की पाइपलाइन की प्रेशर टेस्टिंग की जा रही थी, जिसमें अत्यधिक दबाव के कारण पाइपलाइन के आसपास की जमीन धंस गई।
इस स्मार्ट सिटी सड़क परियोजना की कुल लागत कितनी थी?
यह मॉडल रोड स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई थी।
मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग किसने और किससे की है?
नगर निगम एमआईसी सदस्य राजेन्द्र राठौड़ ने भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एमआईसी सदस्य राजेन्द्र राठौड़ ने निर्माण कार्य को लेकर क्या शिकायतें बताईं?
उन्होंने बताया कि 4 वर्ष पूर्व बनी इस सड़क पर नगर निगम को बार-बार डामरीकरण करना पड़ रहा है और निर्माण के समय तत्कालीन महापौर तथा आयुक्त को अवगत कराने के बावजूद केवल नोटिस जारी करने तक ही कार्रवाई सीमित रही।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

यह घटना सिर्फ एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे में वित्तीय संसाधनों के कुप्रबंधन का प्रत्यक्ष उदाहरण है। चालीस करोड़ रुपये की इस स्मार्ट सिटी परियोजना में प्रेशर टेस्टिंग के दौरान सड़क का धंसना यह साबित करता है कि परियोजना के क्रियान्वयन में गुणवत्ता मानकों की भारी अनदेखी की गई थी। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों पर केवल नोटिस देने के बजाय सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाती, तो जनता के धन का ऐसा नुकसान नहीं होता। आने वाले समय में ऐसी परियोजनाओं के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट और जवाबदेही तय करना अनिवार्य होना चाहिए, अन्यथा शहरी विकास के नाम पर किए जा रहे ऐसे निवेश अर्थव्यवस्था और जनसुरक्षा दोनों के लिए जोखिम बनते रहेंगे।

Meera Joshi@meera-joshi·24 दिन पहले

इस तरह की संरचनात्मक विफलताएँ और अचानक हुए हादसों के दृश्य नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य और जनसुरक्षा पर सीधा मनोवैज्ञानिक दबाव डालते हैं। जब विकास कार्यों में इस स्तर की लापरवाही सामने आती है, तो आम जनता का व्यवस्था और अपने ही शहर के बुनियादी ढांचे पर से भरोसा उठने लगता है। लगातार बने रहने वाला यह असुरक्षा का भाव नागरिकों में भय और मानसिक तनाव को जन्म देता है, जो एक स्वस्थ और संतुलित शहरी जीवनशैली के बिल्कुल विपरीत है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

इंदौर के गोराकुंड चौराहे पर 40 करोड़ रुपये की स्मार्ट सिटी सड़क का इस तरह पाइपलाइन प्रेशर टेस्टिंग के दौरान धंसना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि शहरी नियोजन और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। एक हजार करोड़ के बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट में शुरुआती चेतावनियों को नजरअंदाज करने का यह परिणाम बताता है कि निगरानी तंत्र कितना कमजोर रहा है। एमआईसी सदस्य के खुलासे से स्पष्ट है कि इंजीनियरों के तबादले से जवाबदेही तय नहीं होती। यदि इस मामले में उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच कर दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाले ऐसे मॉडल इन्फ्रास्ट्रक्चर भविष्य में भी प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ते रहेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

यह घटना सिर्फ एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि शहरी विकास में जवाबदेही के अभाव का स्पष्ट प्रमाण है। करोड़ों की लागत वाली स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में इस तरह की लापरवाही दिखाती है कि जमीनी स्तर पर निगरानी कितनी कमजोर है। जब तक घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार इंजीनियरों और अधिकारियों पर केवल तबादले की बजाय आपराधिक और वित्तीय दंड तय नहीं होगा, तब तक जनता के टैक्स के पैसों का ऐसा ही नुकसान होता रहेगा। आगे इस मामले में यदि उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच नहीं बैठाई गई, तो ऐसे हादसे बार-बार दोहराए जाएंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

यह घटना महज एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और आपराधिक लापरवाही का गंभीर मामला है, जिसमें सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ है। जांच एजेंसियों को अब टेंडर से लेकर क्रियान्वयन तक की फाइलों को जब्त कर उन इंजीनियरों और ठेकेदारों पर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करना चाहिए, जिन्होंने गुणवत्ता से खिलवाड़ किया। यदि इस मामले में केवल विभागीय औपचारिकताएं पूरी की गईं, तो ऐसी घटनाएं जनता की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनी रहेंगी।

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