जैसलमेर के रामदेवरा में दीपावली पर अनूठी सजावट, 500 किलो फूलों से महका बाबा रामदेव का दरबारसिरमौर के सराहां में धनतेरस पर दर्दनाक हादसा, खाई में बोलेरो गिरने से बड़े भाई की मौत और नौ घायलहिमाचल के सम्मू गांव में दिवाली पर क्यों पसरा रहता है सन्नाटा, जानिए सात पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपराबेंगलुरु में दामाद ने सिलबट्टे से की सात लोगों की हत्या, नंदी हिल्स से चिकबल्लापुर तक फेंके गए शवसुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश की बड़ी जीत, बीबीएमबी विवाद सुलझा, सालाना 1000 करोड़ तक का होगा फायदातकनीकी दबाव में फिसला यूरो, अमेरिकी डॉलर के सामने 1.1200 का अहम स्तर टूटाडायमंड स्टेट समिट 2026: राजस्थान की सियासत में जेनेरेशन जेड की एंट्री, कम उम्र के पार्षदों ने रखा विजनपलामू के किसान संतरे की बागवानी से कमा सकते हैं लाखों रुपये, जानिए एक एकड़ की लागत और कमाई का पूरा गणितमहज 100 रुपये से शुरू किया कारोबार, अब लाखों की कमाई कर रहे हैं मुरादाबाद के मोहम्मद फिरोजओबीसी क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र सरकार की अर्जी खारिज
गुरुग्राम में 450 करोड़ रुपये के जमीन सौदे पर दिल्ली की अदालत ने एम3एम इंडिया के खिलाफ धोखाधड़ी की कानूनी कार्यवाही रखी जारीभारत
26 अक्तू॰ 2026, 6:39 pm (11 दिन पहले)· 4

गुरुग्राम में 450 करोड़ रुपये के जमीन सौदे पर दिल्ली की अदालत ने एम3एम इंडिया के खिलाफ धोखाधड़ी की कानूनी कार्यवाही रखी जारी

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुग्राम के चौमा गांव में 31 एकड़ जमीन के सौदे से जुड़े मामले में एम3एम इंडिया और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश की कार्यवाही बरकरार रखी है। कंपनी ने इसे एक कारोबारी विवाद बताते हुए कहा है कि धारा 406 का आरोप खारिज हो चुका है।

गुरुग्राम के चौमा गांव में लगभग 31 एकड़ जमीन के सौदे को लेकर रियल एस्टेट कंपनी एम3एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। दिल्ली की एक अदालत ने निचली अदालत द्वारा कथित अपराधों पर संज्ञान लिए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी कार्यवाही को बरकरार रखा है। इस पूरे मामले में कथित धोखाधड़ी की रकम करीब 450 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है।

सत्र अदालत का फैसला और कानूनी कार्यवाही

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना ने एम3एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया। आरोपियों ने निचली अदालत के उस पूर्व आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनके खिलाफ दर्ज मामले का संज्ञान लिया गया था। सत्र अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और धारा 34 (साझा इरादा) के तहत कार्यवाही जारी रहेगी। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की सुनवाई में तेजी लाए, ताकि कानूनी प्रक्रिया बिना किसी अनावश्यक विलंब के आगे बढ़ सके। सभी संबंधित आरोपियों को 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।

ये भी पढ़ें

31 एकड़ जमीन और 450 करोड़ रुपये का विवाद

इस कानूनी विवाद की शुरुआत एमजीएफ डेवलपमेंट्स लिमिटेड द्वारा दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच जमीन की अदला-बदली को लेकर एक औपचारिक समझौता हुआ था। आरोप के अनुसार समझौते के तहत तय की गई पूरी धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, लेकिन इसके बावजूद एम3एम इंडिया और समूह की अन्य संबंधित कंपनियों ने गुरुग्राम के चौमा गांव स्थित लगभग 31 एकड़ भूखंड पर अपना कानूनी अधिकार हासिल कर लिया। शिकायत में यह भी रेखांकित किया गया है कि इस पूरे सौदे में कथित तौर पर लगभग 450 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

एम3एम इंडिया प्रबंधन का पक्ष और स्पष्टीकरण

अदालती आदेश के संदर्भ में एम3एम इंडिया के निदेशक यतीश वाहल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना पक्ष रखा है। यतीश वाहल का कहना है कि 17 अक्टूबर 2026 को तीस हजारी कोर्ट द्वारा पारित आदेश को मीडिया में एक झटके के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि वस्तुस्थिति इससे पूरी तरह भिन्न है। उन्होंने कहा कि अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत लगाए गए आपराधिक विश्वासघात के आरोप को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने विश्लेषण में पाया कि यदि प्राथमिकी में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए, तब भी धारा 406 के तहत अपराध का मामला नहीं बनता है।

यतीश वाहल ने आगे विस्तार से बताया कि शेष अन्य आरोपों के संबंध में अदालत ने कंपनी के विरुद्ध कोई अंतिम निष्कर्ष या प्रतिकूल टिप्पणी नहीं दी है। इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय संबंधित मजिस्ट्रेट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत ही करेंगे। वर्तमान स्थिति में न तो औपचारिक आरोप तय किए गए हैं और न ही किसी पूर्ण मुकदमे की शुरुआत का आदेश दिया गया है। उन्होंने दोहराया कि यह अनिवार्य रूप से दो कारोबारी समूहों के बीच का एक व्यावसायिक विवाद है, जो पहले से ही सक्षम कानूनी मंचों पर विचाराधीन है। एम3एम समूह को देश की न्यायिक प्रणाली पर पूर्ण विश्वास है और कंपनी कानून के तहत उपलब्ध सभी वैधानिक उपायों का उपयोग करेगी।

सवाल-जवाब

दिल्ली की अदालत ने एम3एम इंडिया के खिलाफ क्या आदेश दिया है?
अदालत ने एम3एम इंडिया और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420), आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) और साझा इरादे (धारा 34) के तहत कानूनी कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया है।
यह जमीन विवाद किस इलाके से जुड़ा है और इसमें कितनी जमीन शामिल है?
यह विवाद गुरुग्राम के चौमा गांव में स्थित लगभग 31 एकड़ जमीन के सौदे से जुड़ा हुआ है।
मामले में कथित धोखाधड़ी की कुल रकम कितनी बताई गई है?
शिकायत के अनुसार इस मामले में कथित धोखाधड़ी की कुल राशि करीब 450 करोड़ रुपये बताई गई है।
शिकायतकर्ता कंपनी कौन है और उसका मुख्य आरोप क्या है?
शिकायतकर्ता कंपनी एमजीएफ डेवलपमेंट्स लिमिटेड है, जिसका आरोप है कि समझौते के तहत पूरी रकम का भुगतान किए बिना एम3एम ने जमीन पर अधिकार कर लिया।
अदालत ने किस धारा के तहत लगे आरोप को खारिज कर दिया है?
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात के आरोप को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्राथमिकी के तथ्यों से यह अपराध नहीं बनता।
मामले में आरोपियों को अदालत में कब पेश होना है?
सत्र अदालत के निर्देशानुसार आरोपियों को 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होना है।
एम3एम इंडिया के निदेशक यतीश वाहल का इस आदेश पर क्या कहना है?
यतीश वाहल ने कहा कि यह एक विशुद्ध व्यावसायिक विवाद है जिसमें कोई आरोप तय नहीं हुए हैं और धारा 406 का आरोप खारिज हो चुका है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·10 दिन पहले

साढ़े चार सौ करोड़ का सौदा और अदालत के चक्कर, लालच इन कारोबारियों की नीयत खराब कर ही देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

साढ़े चार सौ करोड़ का पेंच है, मामला इतनी आसानी से रफ़ा-दफ़ा होने वाला नहीं लगता।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

रविकेश जी, सही कहा आपने, 450 करोड़ का मामला है तो तारीखों पर तारीखें लगनी ही हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

साढ़े चार सौ करोड़ का सौदा और इतनी आसानी से पैसों का भुगतान न होना थोड़ा अजीब लगता है। कंपनी कह रही है कि विश्वासघात का आरोप हट गया है, पर धोखाधड़ी का मामला चलना भी कम गंभीर नहीं है।

Rohan Verma@rohan-verma·10 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा। एनसीआर में जमीनों के ऐसे बड़े सौदों में अक्सर खेल हो जाता है, तभी कोर्ट को दखल देना पड़ा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp