राजस्थान के विश्वविख्यात भरतपुर जिले में स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान सर्दियों का मौसम शुरू होते ही प्रवासी परिंदों की कलरव से गुलजार होने लगा है। यहाँ हर साल ठंडे प्रदेशों से हजारों की संख्या में देशी और विदेशी पक्षी डेरा डालते हैं, जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी पहुँचते हैं। इन दिनों पार्क की झीलों और जलक्षेत्रों में सुबह से लेकर शाम तक पर्यटकों की भारी भीड़ नजर आ रही है, जो यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच परिंदों की गतिविधियों को निहारने में व्यस्त हैं।
दुर्लभ नकटा बतख का अनोखा अंदाज
इस बार उद्यान में आने वाले मेहमानों के बीच एक विशेष आकर्षण दुर्लभ नकटा बतख बनी हुई है। पार्क के पानी वाले इलाकों में तैरती हुई यह प्रजाति अपनी विशिष्ट बनावट के कारण सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। इसे देखने के लिए आने वाले वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, और लोग इसकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं।
क्या है इस प्रजाति की पहचान
नकटा बतख की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता इसकी चोंच के ऊपरी हिस्से पर निकला हुआ एक मांसल उभार होता है। यही खास शारीरिक बनावट इसे अन्य सामान्य बतखों से बिल्कुल अलग और अनूठी पहचान देती है। चोंच पर मौजूद इसी विशिष्ट निशान के कारण इसे आम बोलचाल में नकटा बतख कहा जाता है। दूर से देखने पर भी इसे इसकी इसी बनावट के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है, जो प्रकृति प्रेमियों को काफी रोमांचित करता है।
प्रवासियों का स्वर्ग है यह उद्यान
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान अपनी समृद्ध जैव विविधता और अनगिनत पक्षी प्रजातियों के लिए पूरी दुनिया में एक विशेष स्थान रखता है। सर्दियों के इन महीनों में यहाँ विभिन्न देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी दलदली क्षेत्रों, झीलों और तालाबों को अपना अस्थायी आशियाना बनाते हैं। यही वजह है कि सर्दियों का यह सीजन इस पार्क को पर्यटकों और फोटोग्राफरों के लिए जन्नत बना देता है, जहाँ लोग प्रकृति के बेहद करीब पहुँचते हैं।
प्राकृतिक महत्व और पर्यटकों का उत्साह
पार्क का भ्रमण करने वाले पर्यटक यहाँ न केवल पक्षियों की हरकतों को बहुत नजदीक से देख रहे हैं, बल्कि अपने कैमरों में उनकी खूबसूरत तस्वीरें भी कैद कर रहे हैं। नकटा बतख जैसी दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि यह पार्क पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से कितना समृद्ध है। यहाँ आने वाले सैलानियों के लिए यह अनुभव बेहद यादगार साबित हो रहा है।
आगे और बढ़ेगी पक्षियों की संख्या
जैसे-जैसे सर्दी का मौसम आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे केवलादेव नेशनल पार्क में विदेशी पक्षियों की संख्या और उनकी प्रजातियों में भी इजाफा होने की पूरी उम्मीद है। आने वाले हफ्तों में पर्यटकों को कई और नए और दुर्लभ मेहमान देखने को मिल सकते हैं। पेड़ों पर गूंजती परिंदों की चहचहाहट और शांत प्राकृतिक वातावरण सैलानियों को बार-बार इस पार्क की तरफ खींच रहा है।

















