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हैदराबाद के किंग कोठी में 'नेकी की टोकरी' पहल से जरूरतमंदों को मिल रही मुफ़्त ताज़ा शीरमालभारत
24 अग॰ 2026, 1:20 pm (38 दिन पहले)· 2

हैदराबाद के किंग कोठी में 'नेकी की टोकरी' पहल से जरूरतमंदों को मिल रही मुफ़्त ताज़ा शीरमाल

हैदराबाद के किंग कोठी स्थित मुगल नान दुकान पर 'नेकी की टोकरी' अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत 18 रुपये की ताज़ा शीरमाल रोटी जरूरतमंदों को मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है.

हैदराबाद के ऐतिहासिक इलाके किंग कोठी में एक अनूठी सामाजिक पहल के जरिए भूखे और जरूरतमंद लोगों को बिना किसी शुल्क और पहचान पत्र के मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. यहां स्थित मुगल नान नामक दुकान की दीवार पर 'नेकी की टोकरी' लगाई गई है, जहां से कोई भी राहगीर या बेसहारा व्यक्ति ताजा शीरमाल रोटी सम्मानपूर्वक ले सकता है. यह व्यवस्था आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों और जरूरतमंदों के बीच सीधी और सम्मानजनक मदद का जरिया बन चुकी है.

सम्मान के साथ मुफ्त भोजन देने का तरीका

मुगल नान दुकान की बाहरी दीवार पर टांगी गई इस टोकरी के ठीक ऊपर उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में एक संदेश लिखा गया है. इस संदेश में लिखा है कि किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना पुण्य यानी सवाब का काम है. संदेश के माध्यम से जरूरतमंदों को वहां से शीरमाल लेने और ईश्वर द्वारा संपन्न बनाए गए लोगों को उसमें अतिरिक्त शीरमाल रखने का आह्वान किया गया है. इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भोजन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को न तो अपनी पहचान बतानी पड़ती है और ना ही किसी के सामने हाथ फैलाना पड़ता है.

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मात्र 18 रुपये की किफायती शीरमाल

दुकानदारों के अनुसार इस पारंपरिक शीरमाल नान की कीमत मात्र 18 रुपये है. यह रोटी न केवल सस्ती है, बल्कि लंबे समय तक ताजा भी रहती है. यदि इसे सूती कपड़े में लपेटकर रखा जाए तो यह अगले दिन तक पूरी तरह से नरम और खाने योग्य बनी रहती है. दुकान पर आने वाले सक्षम ग्राहक अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार 18 रुपये देकर अतिरिक्त रोटियां खरीदते हैं और उन्हें टोकरी में रख देते हैं. इसके बाद इलाके के गरीब, मजदूर या भूखे राहगीर अपनी जरूरत के मुताबिक रोटी लेकर अपनी भूख मिटाते हैं.

पूरे शहर में मॉडल लागू करने की मांग

स्थानीय निवासियों और समाजसेवियों का कहना है कि यह विचार अत्यंत व्यावहारिक और प्रभावी साबित हो रहा है. उन्होंने इस पहल को शहर के अन्य हिस्सों में भी शुरू करने की सिफारिश की है. जानकारों का मानना है कि यदि प्रमुख व्यावसायिक बाजारों, सरकारी अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और धार्मिक स्थलों के आसपास ऐसी नेकी की टोकरियां लगाई जाएं, तो शहर में कोई भी व्यक्ति भूखे पेट सोने पर मजबूर नहीं होगा.

आपसी भाईचारे और संवेदना की मिसाल

भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी में जहां लोग अक्सर दूसरों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे पाते, वहीं किंग कोठी की यह छोटी सी कोशिश समाज को एक बड़ा संदेश दे रही है. यह पहल साबित करती है कि छोटे और सादे प्रयासों से भी जरूरतमंदों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है और सामाजिक सरोकार को मजबूती दी जा सकती है.

सवाल-जवाब

नेकी की टोकरी पहल कहां शुरू की गई है?
यह पहल हैदराबाद के ऐतिहासिक इलाके किंग कोठी में स्थित 'मुगल नान' नामक दुकान पर शुरू की गई है.
नेकी की टोकरी काम कैसे करती है?
सक्षम लोग दुकान से 18 रुपये की अतिरिक्त शीरमाल नान खरीदकर दुकान के बाहर लगी टोकरी में रख देते हैं, जिसे जरूरतमंद बिना कोई भुगतान किए ले सकते हैं.
टोकरी से शीरमाल लेने के लिए क्या कोई दस्तावेज या पहचान पत्र चाहिए?
नहीं, कोई भी भूखा या जरूरतमंद व्यक्ति बिना किसी पूछताछ या पहचान पत्र के सम्मानपूर्वक टोकरी से रोटी ले सकता है.
मुगल नान की शीरमाल की क्या खासियत है?
इस शीरमाल नान की कीमत 18 रुपये है और सूती कपड़े में लपेटकर रखने पर यह अगले दिन तक पूरी तरह नर्म और खाने योग्य बनी रहती है.
स्थानीय निवासियों का इस पहल को लेकर क्या सुझाव है?
स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने इस मॉडल को अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और धार्मिक स्थलों जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थानों पर भी लागू करने का सुझाव दिया है.
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