हजारों फीट की ऊंचाई पर आसमान में उड़ते विमान के भीतर सैकड़ों जिंदगियों की सुरक्षा पूरी तरह से कॉकपिट में बैठे पायलटों के निर्णय और धैर्य पर टिकी होती है। दुबई से तेल अवीव की तरफ बढ़ रही फ्लाईदुबई की कमर्शियल फ्लाइट FZ1073 में जब एक अप्रत्याशित संकट पैदा हुआ, तो वहां मौजूद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने अदम्य साहस का परिचय दिया। कॉकपिट के बंद दरवाजे के पीछे जब एक बड़ी अनहोनी को अंजाम देने की साजिश रची जा रही थी, तब इस जांबाज पायलट ने अपनी जान की परवाह किए बिना स्थिति पर नियंत्रण पाया और विमान में मौजूद करीब 180 मुसाफिरों को सुरक्षित रखा।
कॉकपिट में खूनी संघर्ष और 180 मुसाफिरों की हिफाजत
दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कथित तौर पर विमान को ध्वस्त करने की खतरनाक कोशिश की। कॉकपिट के सीमित दायरे में अचानक दोनों पायलटों के बीच सीधा संघर्ष छिड़ गया। इस झड़प के दौरान हमलावर ने कैप्टन स्मित मच्छार पर वार किया, जिससे वे चाकू लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए और खून से लथपथ हो गए। असहनीय दर्द और जानलेवा हमले के बावजूद कैप्टन ने होश नहीं खोया। उन्होंने पूरे आत्मसंयम के साथ हमलावर सह-पायलट का मुकाबला जारी रखा और नियंत्रण अपने हाथ से छूटने नहीं दिया। इसके बाद केबिन क्रू और यात्रियों के सहयोग से आरोपी को काबू में किया गया, जिससे आसमान में होने वाला एक भयानक हादसा टल गया।
कपड़ा उद्योग और इंजीनियरिंग छोड़ एविएशन में कदम
आमतौर पर अधिकांश कमर्शियल पायलट बचपन से ही विमान उड़ाने की हसरत दिल में संजोते हैं, मगर कैप्टन स्मित मच्छार की राह बिल्कुल जुदा थी। उनका पारिवारिक ताना-बाना टेक्सटाइल यानी कपड़ा कारोबार से गहराई से जुड़ा हुआ था। इसी वजह से बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की दिशा चुनी और आगे चलकर मैनेजमेंट की पढ़ाई भी शुरू की। जब वे 19 वर्ष के थे, तब अचानक एक एविएशन सेमिनार में शामिल होने का अवसर मिला। उस एक सेमिनार ने उनके सोचने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया और उनके भीतर आसमान नापने का जुनून भर दिया।
जब उन्होंने अपने परिवार के सामने पायलट बनने की इच्छा जाहिर की, तो उनके पिता ने किसी हिचकिचाहट के बिना इस फैसले का समर्थन किया। पिता ने उन्हें सलाह दी कि वे पूरी पड़ताल करें कि यह ट्रेनिंग कहां से और किस तरह मुमकिन हो सकती है। इसके बाद उन्होंने विदेशी जमीन का रुख किया और न्यूजीलैंड जाकर पेशेवर एविएशन ट्रेनिंग में दाखिला लिया। उस दौर में तकरीबन 16 से 17 लाख रुपये की लागत से उन्होंने अपनी कठिन पायलट ट्रेनिंग पूरी की और कमर्शियल लाइसेंस हासिल किया।
बोइंग 737 फ्लीट पर 13 वर्ष का अनुभव और 9,750 उड़ान घंटे
कैप्टन स्मित मच्छार के करियर का पेशेवर रिकॉर्ड बेहद शानदार और अनुशासन से भरा रहा है। लिंक्डइन प्रोफाइल पर उपलब्ध ब्योरे के अनुसार, उन्होंने बोइंग 737 फ्लीट पर 13 वर्षों से अधिक समय तक कमर्शियल विमान उड़ाने का व्यापक अनुभव संजोया है। उनके खाते में 9,750 से भी अधिक घंटों की सुरक्षित उड़ान का मजबूत रिकॉर्ड दर्ज है। अपने कमर्शियल फ्लाइंग करियर की शुरुआत उन्होंने वर्ष 2011 में घरेलू एयरलाइन स्पाइसजेट के साथ की थी।
स्पाइसजेट में काम करते हुए उन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुशासन के दम पर लाइन ट्रेनिंग कैप्टन और सीनियर कमांडर जैसी अहम जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया। इसके अलावा, भारत में अत्याधुनिक बोइंग 737 मैक्स विमानों को शामिल कराने वाले शुरुआती पायलटों के पहले बैच में भी वे भागीदार रहे। लगभग एक दशक से अधिक समय तक भारतीय एविएशन में सेवाएं देने के बाद, जून 2022 में वे संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी एयरलाइन फ्लाईदुबई के साथ डायरेक्ट एंट्री कैप्टन के रूप में जुड़े।
यात्रियों से सीधा संवाद और कॉकपिट की कार्यशैली
अपने शुरुआती पेशेवर दिनों को याद करते हुए कैप्टन स्मित मच्छार ने एक साक्षात्कार में अपने कार्यशैली से जुड़ा एक अहम वाकया साझा किया था। जब वे फर्स्ट ऑफिसर के पद पर तैनात थे, तब एक बार तकनीकी या परिचालन कारणों से उड़ान में अत्यधिक देरी हो गई। मुसाफिर बेहद नाराज थे और केबिन क्रू पर अपना गुस्सा उतार रहे थे। उस क्षण उन्होंने यह महत्वपूर्ण सबक सीखा कि यात्रियों से बातें छुपाने या अनिश्चितता बनाए रखने के बजाय सीधे कॉकपिट से पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से सच्चाई बता देना कहीं अधिक कारगर होता है।
जब वे पूर्ण कमांडर और कैप्टन बने, तो स्पष्ट संवाद का यही तरीका उनकी रोजमर्रा की कार्यशैली का अटूट हिस्सा बन गया। हवा में होने वाली किसी भी अप्रत्याशित मेडिकल इमरजेंसी, जैसे कि उड़ान के बीच बच्चे के जन्म की स्थिति हो या फिर आसमान में अचानक पैदा होने वाला भयंकर टर्बुलेन्स, कैप्टन स्मित हमेशा किसी भी किस्म की चूक न होने देने के सख्त सिद्धांत पर अमल करते रहे। उनके लिए विमान और उसमें सवार हर एक व्यक्ति की सुरक्षा हमेशा व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रही।















