पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों कांवड़ यात्रा के कई अनोखे और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिल रहे हैं. हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री जैसे पवित्र धामों से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते कांवड़ियों के बीच एक विशेष मामला सामने आया है. अलीगढ़ निवासी एक शिवभक्त अपनी नन्हीं बेटी और भांजी को कांवड़ के पलड़ों में बैठाकर हरिद्वार से अलीगढ़ तक की कठिन पैदल यात्रा कर रहे हैं. इस अनोखे सफर के जरिए वह समाज को बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ और नारी शक्ति के सम्मान का एक सशक्त संदेश दे रहे हैं.
दोहरी कांवड़ लेकर चलने का अनोखा तरीका
हरिद्वार से अपने गृह जनपद अलीगढ़ की दूरी तय कर रहे इस श्रद्धालु की यात्रा का तरीका बेहद खास है. उन्होंने एक साथ दो अलग-अलग कांवड़ उठाई हैं. पहली कांवड़ के एक तराजू वाले पलड़े में उनकी भांजी बैठी है और दूसरे पलड़े में भांजी के वजन के बराबर पवित्र गंगाजल भरा हुआ है. इसी तरह दूसरी कांवड़ के एक पलड़े में उनकी अपनी बेटी बैठी है और संतुलन बनाने के लिए दूसरे पलड़े में बेटी के वजन के बराबर गंगाजल रखा गया है. रास्ते में एक साथ दोनों भारी कांवड़ों को उठाना संभव न होने के कारण उन्होंने एक विशेष तरीका अपनाया है. वह पहले अपनी भांजी वाली कांवड़ उठाकर कुछ दूरी तक आगे ले जाते हैं और उसे सुरक्षित स्थान पर रख देते हैं. इसके बाद वह वापस लौटकर अपनी बेटी वाली कांवड़ को उठाकर उसी स्थान तक लाते हैं. इसी क्रम को दोहराते हुए वह लगातार आगे बढ़ रहे हैं. इस पूरी पैदल यात्रा में उनकी पत्नी भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और व्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही हैं.
सामाजिक संदेश और अटूट धार्मिक आस्था
इस अनूठी कांवड़ यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाना है. यात्रा कर रहे श्रद्धालु का कहना है कि आज के दौर में लोगों को नारी शक्ति के महत्व को समझना चाहिए और अपने धर्म की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए. बेटियों को बोझ न समझकर उन्हें बराबरी का दर्जा देना ही सच्चा धर्म है. लगातार कई किलोमीटर भारी वजन के साथ चलने के बावजूद कांवड़िया को किसी तरह की थकावट महसूस नहीं हो रही है. उनका मानना है कि यह सब भगवान शिव की विशेष कृपा का परिणाम है, जिसके बल पर वह बिना थके हरिद्वार से मेरठ होते हुए अलीगढ़ की ओर निरंतर बढ़ रहे हैं.
माता-पिता के प्रति सम्मान और प्रशासनिक व्यवस्था
यह पहला मौका नहीं है जब इस श्रद्धालु ने कोई संदेश देने वाली यात्रा की हो. बीते वर्ष भी उन्होंने अपनी वृद्ध मां को इसी तरह कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से अपने घर तक की पैदल यात्रा पूरी की थी. उस समय उनका मकसद युवा पीढ़ी को माता-पिता के त्याग और कठिन परिश्रम का अहसास कराना था, ताकि वे अपने बुजुर्गों का सम्मान करें. इस बीच कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ मार्ग पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और यातायात के इंतजाम किए हैं. कांवड़ियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने और आम जनता को परेशानी से बचाने के लिए मेरठ प्रशासन ने 3 अगस्त से 12 अगस्त तक जिले के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया है, साथ ही भारी वाहनों और सामान्य यातायात के लिए कई प्रमुख रास्तों पर रूट डायवर्जन लागू कर दिया है.



















