कोटपूतली के भेरू बाबा मंदिर में 17वें लक्की मेले की तैयारी, मशीनों से तैयार होगा 800 क्विंटल चूरमाराजस्थान के अजमेर में बांदनवाड़ा टोल प्लाजा पर अंधाधुंध गोलियां बरसाकर भागे हमलावर, पुलिस ने लावारिस गाड़ी जब्त कीदेवेंद्र फडणवीस का राहुल गांधी पर हमला, पेट्रोल पंपों द्वारा यूपीआई बहिष्कार की चेतावनी पर भी रुख किया साफअरुणाचल प्रदेश की जलविद्युत क्षमता भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को देगी नई रफ्तार, बोले चाउना मेनबीकानेर में 1880 में बने लालेश्वर महादेव मंदिर की अनूठी विरासत, स्वर्ण आभूषणों से सजता है पंचमुखी स्वरूपफरीदाबाद के पास बसेगी 10 लाख की आबादी वाली नई टाउनशिप, 40 सेक्टर्स का मास्टर प्लान तैयारवडनगर से वाराणसी के बीच शुरू हुई 35,500 किलोमीटर की अनोखी सेवा यात्रा, 20 टीमें कर रहीं समाज सेवाबिना गैस जलाए सिर्फ 10 मिनट में तैयार करें भुने चने की स्वादिष्ट बर्फी, जानें आसान विधिगणपति स्थापना के दौरान कलश का महत्व और 10 दिवसीय गणेश उत्सव का पूरा कार्यक्रमभाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर बरसाना में जन्मोत्सव की गूंज, मध्याह्न काल में 2 घंटे 27 मिनट की खास पूजा अवधि
हरिद्वार के मोती बाजार में देसी घी के समोसे और पारंपरिक मिठाइयों की महक, ब्रिटिश काल से कायम है स्वाद की यह विरासतउत्तराखंड
20 सित॰ 2026, 6:35 pm (18 मिनट पहले)· 0

हरिद्वार के मोती बाजार में देसी घी के समोसे और पारंपरिक मिठाइयों की महक, ब्रिटिश काल से कायम है स्वाद की यह विरासत

हर की पौड़ी से कुछ ही दूरी पर स्थित सौ साल पुरानी दुकान अपने शुद्ध देसी घी में तैयार समोसों, चंद्रकला और खास मिठाइयों के लिए आज भी श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनी हुई है.

तीर्थनगरी हरिद्वार में गंगा दर्शन और पवित्र स्नान के बाद अक्सर श्रद्धालुओं के कदम शहर की ऐतिहासिक गलियों और पारंपरिक खानपान के ठिकानों की ओर मुड़ जाते हैं. धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के पश्चात जब सात्विक और लजीज भोजन की इच्छा जागती है, तो स्थानीय बाजारों की पुरानी दुकानें अपनी अनोखी महक से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं. हरिद्वार का स्वाद उसकी सदियों पुरानी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जहां पीढ़ी दर पीढ़ी वही प्रामाणिक जायका आज भी सुरक्षित रखा गया है. हर की पौड़ी पर आस्था की डुबकी लगाने वाले देश के कोने-कोने से पहुंचे तीर्थयात्रियों के लिए यह पारंपरिक खानपान यात्रा का एक अनिवार्य अनुभव बन जाता है.

मोती बाजार की संकरी गलियों में एक सदी का इतिहास

प्रसिद्ध हर की पौड़ी घाट से बमुश्किल दस मिनट पैदल चलकर जब बड़ा बाजार को पार करते हैं, तो आगे मोती बाजार का जीवंत इलाका शुरू होता है. इसी मोती बाजार की पतली गलियों के बीच ठंडे कुएं के समीप 'प्राचीन मथुरा वाले' नाम का एक पारंपरिक मिष्ठान भंडार मौजूद है. इस दुकान की शुरुआत ब्रिटिश हुकूमत के दौर में हुई थी और इसने समय के कई उतार-चढ़ाव देखते हुए अपने सफर का एक शतक पूरा कर लिया है. पिछले सौ वर्षों में जहां दुनिया का तौर-तरीका पूरी तरह बदल गया, वहीं इस प्रतिष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां समोसे से लेकर सभी तरह की पारंपरिक मिठाइयां आज भी पूरी निष्ठा के साथ शुद्ध देसी घी में ही बनाई जाती हैं.

ये भी पढ़ें

काजू-किशमिश और खास चटनी वाले देसी घी के समोसे

इस ऐतिहासिक दुकान पर तैयार होने वाले नमकीन व्यंजनों में शुद्ध देसी घी के समोसे सबसे ज्यादा मांग में रहते हैं. कड़ाही से गरमा-गरम छनकर निकलने वाले इन समोसों के अंदर आलू की विशेष मसालेदार पिट्ठी के साथ भरपूर मात्रा में काजू और किशमिश भरा जाता है. देसी घी में तलने के कारण इनकी बाहरी परत बेहद कुरकुरी होती है, जिसमें भारीपन के बजाय शुद्धता का एहसास मिलता है. इन समोसों को प्रतिष्ठान की खास ताजी चटनी के साथ परोसा जाता है, जो इसके जायके को और अधिक चटपटा और संतुलित बना देती है. सुबह से लेकर शाम तक इस खास स्वाद को चखने के लिए दूर-दराज से आए लोगों का तांता लगा रहता है.

चाशनी में डूबी चंद्रकला और मावे की मिठास

मिठाइयों की श्रेणी में 'प्राचीन मथुरा वाले' की चंद्रकला सबसे ज्यादा लोकप्रिय और सराही जाने वाली पेशकश है. शुद्ध देसी घी में धीमी आंच पर तैयार की जाने वाली चंद्रकला की ऊपरी परत खस्ता और कुरकुरी होती है. इसके भीतरी हिस्से में शुद्ध मावा, केसर के धागे और बारीक कटे सूखे मेवों का समृद्ध मिश्रण भरा जाता है. चाशनी की सौंधी मिठास में डूबी यह चंद्रकला खाने पर मुंह में घुल जाती है और इसमें केसर तथा मावे का संतुलित स्वाद उभरकर सामने आता है. गंगा दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु न केवल इस मिठाई का यहां आनंद लेते हैं, बल्कि अपने परिजनों और रिश्तेदारों के लिए भी इसे पैक करवाकर साथ ले जाते हैं.

धीमी आंच पर घंटों पकती है सात्विक लौकी की लौज

सब्जियों और मेवों के मेल से बनने वाली पारंपरिक मिठाइयों में यहां की लौकी की लौज यानी लौकी की मिठाई अपनी ताजगी के लिए जानी जाती है. इसे तैयार करने के लिए ताजी लौकी को शुद्ध मावे और देसी घी के साथ धीमी आंच पर घंटों तक पकाया जाता है, ताकि इसका पानी पूरी तरह सूख जाए और घी की महक भीतर तक समा जाए. इस मिठाई में चीनी की मात्रा बहुत संतुलित रखी जाती है, जिससे लौकी का अपना स्वाभाविक और प्राकृतिक स्वाद खत्म नहीं होता. उपवास और त्योहारों के मौकों पर श्रद्धालु इस शुद्ध और सात्विक मिठाई को पूर्ण विश्वास के साथ खरीदते हैं.

भुने बेसन की सौंधी महक और मुलायम लड्डू

दुकान पर बेसन से बनने वाली मिठाइयों को भी पारंपरिक विधियों के अनुसार ही कड़ाही में तैयार किया जाता है. शुद्ध देसी घी में धीमी आंच पर लंबे समय तक भुने गए बेसन की सौंधी खुशबू पूरे बाजार में फैल जाती है. बेसन के लड्डू अपनी बनावट और कोमलता के लिए प्रसिद्ध हैं. देसी घी और भुने बेसन का यह मेल इतना कोमल होता है कि लड्डू मुंह में रखते ही घुल जाता है. एक सदी पुरानी यह पाक कला आज भी उसी शुद्धता के साथ जीवित है, जिसके कारण दशकों से ग्राहक इस स्वाद के मुरीद बने हुए हैं.

भगवान गणेश को प्रिय मोदक और विरासत का एहसास

विघ्नहर्ता भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय माने जाने वाले मोदक भी यहां विशेष रूप से देसी घी और मावे के मिश्रण से बनाए जाते हैं. मोती बाजार की इस प्राचीन दुकान में बनने वाले प्रत्येक पकवान में आज भी वही पुराना ब्रिटिश कालीन स्वाद महसूस किया जा सकता है. सौ वर्षों से अपने स्वाद और शुद्धता के मानकों से कोई समझौता न करने वाली यह दुकान आज केवल एक कारोबारी प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि हरिद्वार के खानपान की एक जीवित विरासत बन चुकी है, जहां पहुंचकर लोग न केवल अपनी भूख शांत करते हैं बल्कि बीते दौर की मिठास को भी महसूस करते हैं.

सवाल-जवाब

मोती बाजार में यह ऐतिहासिक दुकान किस नाम से जानी जाती है?
यह 100 साल पुरानी दुकान 'प्राचीन मथुरा वाले' के नाम से प्रसिद्ध है.
यह दुकान हरिद्वार में किस स्थान पर स्थित है?
यह दुकान हर की पौड़ी से करीब 10 मिनट की पैदल दूरी पर मोती बाजार में ठंडे कुएं के पास स्थित है.
यहां मिलने वाले समोसों के अंदर क्या भरा जाता है?
शुद्ध देसी घी में तले जाने वाले इन समोसों में विशेष आलू की पिट्ठी के साथ काजू और किशमिश भरी जाती है.
दुकान की सबसे लोकप्रिय पारंपरिक मिठाई कौन सी है?
यहां की पारंपरिक चंद्रकला सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, जिसके अंदर मावा, केसर और सूखे मेवे भरे होते हैं.
व्रत और उपवास के लिए यहां कौन सी मिठाई विशेष रूप से पसंद की जाती है?
धीमी आंच पर शुद्ध मावे और देसी घी में बनने वाली लौकी की लौज को श्रद्धालु व्रत के दौरान खूब पसंद करते हैं.
भगवान गणेश के प्रिय कौन से व्यंजन यहां मिलते हैं?
दुकान पर विशेष रूप से शुद्ध देसी घी और मावे से तैयार किए गए मोदक उपलब्ध रहते हैं.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp