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गंगा दर्शन के बाद हरिद्वार के ये पारंपरिक जायके बनाएंगे आपकी यात्रा यादगारउत्तराखंड
20 सित॰ 2026, 8:56 am (1 घंटे पहले)· 0

गंगा दर्शन के बाद हरिद्वार के ये पारंपरिक जायके बनाएंगे आपकी यात्रा यादगार

हरिद्वार में हर की पैड़ी से लेकर कनखल और मोती बाजार तक दशकों पुराने ऐसे भोजनालय और दुकानें मौजूद हैं, जो अपने सात्विक भोजन, कचौरी, पेड़े और पारंपरिक नाश्ते के लिए पहचानी जाती हैं।

तीर्थनगरी हरिद्वार में गंगा स्नान और मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ-साथ यहां का खानपान भी सैलानियों के सफर को खास बनाता है। हर की पैड़ी के घाटों से लेकर अपर रोड, मोती बाजार और ऐतिहासिक कनखल क्षेत्र तक ऐसे कई पुराने भोजनालय और दुकानें हैं, जहां पीढ़ियों से पारंपरिक स्वाद परोसा जा रहा है। दर्शन के उपरांत सात्विक थाली की तलाश हो या सुबह के वक्त गरमागरम कचौरी और रसेदार सब्जी का नाश्ता, हरिद्वार की ये प्रसिद्ध दुकानें वर्षों से श्रद्धालुओं की पसंदीदा बनी हुई हैं।

कनखल का अन्नपूर्णा भोजनालय: 1938 से कायम है सात्विक थाली की पहचान

दक्षेश्वर मंदिर के समीप कनखल क्षेत्र में स्थित अन्नपूर्णा भोजनालय वर्ष 1938 से अपनी शुद्धता और सात्विक खानपान के लिए जाना जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के समय स्थापित इस भोजनालय में पिछले 87 वर्षों से बिना लहसुन और प्याज का भोजन तैयार किया जाता है। वर्तमान समय में परिवार की तीसरी पीढ़ी इस भोजनालय की बागडोर संभाल रही है। यहां बनने वाले पारंपरिक भोजन की गुणवत्ता और शुद्धता आज भी अपने शुरुआती दिनों जैसी ही बनी हुई है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के अलावा विदेशी सैलानी भी खूब पसंद करते हैं।

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ट्रेन के डिब्बे में भोजन का अनुभव: कपासा रेस्टोरेंट

हरिद्वार रेलवे स्टेशन परिसर में बना कपासा रेस्टोरेंट अपने अनूठे माहौल और भोजन शैली के कारण पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है। यह पूरा रेस्टोरेंट एक असली ट्रेन के कोच के भीतर तैयार किया गया है, जहां बैठकर भोजन करते हुए डिब्बे जैसा अहसास मिलता है। इस रेस्टोरेंट की दीवारों पर भारतीय रेल के इतिहास से जुड़ी विभिन्न तस्वीरें सजाई गई हैं। यहां किफायती कीमतों पर उत्तर भारतीय थाली, दक्षिण भारतीय डोसा और सांभर, बिरयानी, चाइनीज व्यंजन और पिज्जा उपलब्ध कराया जाता है। स्वादिष्ट भोजन के साथ-साथ यह स्थान तस्वीरें और सेल्फी लेने वाले यात्रियों का भी पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है।

अपर रोड पर भगवती छोले भंडार का तीखा स्वाद

हर की पैड़ी की ओर जाने वाले अपर रोड मार्ग पर नगर कोतवाली से महज 20 कदम की दूरी पर भगवती छोले भंडार स्थित है। यह दुकान अपने तीखे और चटपटे छोले-भटूरे, छोले-पूरी और छोले-चावल के लिए पहचानी जाती है। यहां आने वाले ग्राहकों को मुख्य थाली के साथ चने का गरमागरम सूप और तीखा सलाद भी परोसा जाता है, जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ा देता है। दशकों पुराने नियमित ग्राहक यहां के मसालों और विशेष स्वाद के मुरीद हैं, जिसके चलते यहां दिनभर लोगों का तांता लगा रहता है।

मोती बाजार में गोपाल जी पेड़े वाले: 20 दिनों तक खराब नहीं होते पेड़े

हर की पैड़ी के निकट मोती बाजार में राम गिरि की हवेली के पास स्थित गोपाल जी पेड़े वाले की दुकान वर्ष 1954 से शुद्ध मिठाइयों के लिए विख्यात है। गंगा आरती स्थल से कुछ ही दूरी पर मौजूद इस दुकान पर शुद्ध दूध को घंटों तक कड़ाही में औटाकर पेड़े बनाए जाते हैं। इन पेड़ों की सबसे मुख्य खासियत यह है कि इन्हें बिना फ्रिज में रखे भी लगभग 20 दिनों तक पूरी तरह ताजा और स्वादिष्ट बनाए रखा जा सकता है। यात्रा से लौटते समय प्रसाद और घर ले जाने के लिए श्रद्धालु यहां से पेड़े खरीदना पसंद करते हैं।

हर की पैड़ी के मुख्य द्वार पर मोहन जी पूरी वाले का नाश्ता

हर की पैड़ी के मुख्य बड़े गेट के ठीक सामने मोहन जी पूरी वाले की दुकान सुबह के समय से ही कचौरी और पूरी-सब्जी के शौकीनों से घिर जाती है। यहां गरमागरम फूली हुई पूरियां और विशेष हींग व साबुत मसालों के तड़के से तैयार की गई रसेदार आलू की सब्जी परोसी जाती है। हरिद्वार में गंगा स्नान करने पहुंचे यात्री सुबह के समय नाश्ते के लिए यहां कतारों में खड़े नजर आते हैं, क्योंकि यहां का पारंपरिक सात्विक नाश्ता लंबे समय से लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है।

मोती बाजार की ब्रिटिश कालीन धरोहर: प्राचीन मथुरा वाले

मोती बाजार क्षेत्र में ठंडे कुएं के निकट स्थित प्राचीन मथुरा वाले की दुकान ब्रिटिश काल से संचालित एक ऐतिहासिक स्वाद का केंद्र है। हर की पैड़ी से केवल 10 मिनट की दूरी पर स्थित यह दुकान अपने खस्ता समोसे, मलाई समोसा, आलू पूरी और शुद्ध मावे से तैयार पारंपरिक मिठाइयों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। दशकों का समय बीत जाने के बाद भी यहां के मसालों, बनाने की कारीगरी और पारंपरिक स्वाद में कोई बदलाव नहीं आया है। ब्रिटिश काल से चली आ रही इस दुकान पर हर मौसम में स्थानीय लोगों और पर्यटकों का हुजूम देखने को मिलता है।

सवाल-जवाब

कनखल का अन्नपूर्णा भोजनालय कब स्थापित हुआ था?
अन्नपूर्णा भोजनालय की स्थापना वर्ष 1938 में हुई थी और यह पिछले 87 वर्षों से बिना लहसुन-प्याज का सात्वic भोजन परोस रहा है।
हरिद्वार रेलवे स्टेशन परिसर में कौन सा अनोखा रेस्टोरेंट है?
रेलवे स्टेशन परिसर में कपासा (KAPASAA) नाम का रेस्टोरेंट है, जो ट्रेन के डिब्बे के अंदर बनाया गया है और वहां भारतीय रेल का इतिहास भी दर्शाया गया है।
गोपाल जी के पेड़ों की क्या खासियत है?
मोती बाजार में मिलने वाले ये पेड़े शुद्ध दूध से बनाए जाते हैं और बिना फ्रिज के भी लगभग 20 दिनों तक पूरी तरह ताजा बने रहते हैं।
भगवती छोले भंडार कहां स्थित है और वहां क्या खास मिलता है?
यह दुकान अपर रोड पर नगर कोतवाली से 20 कदम दूर है, जहां छोले-भटूरे और पूरी के साथ गर्म चने का सूप और तीखा सलाद परोसा जाता है।
हर की पैड़ी के मुख्य गेट के सामने नाश्ते के लिए कौन सी दुकान प्रसिद्ध है?
हर की पैड़ी के मुख्य बड़े गेट के ठीक सामने मोहन जी पूरी वाले की दुकान है, जो सुबह के समय फूली हुई पूरियों और हींग-मसालेदार आलू की सब्जी के लिए जानी जाती है।
प्राचीन मथुरा वाले की दुकान किस काल की है और वहां क्या मिलता है?
यह ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक दुकान है, जो मोती बाजार में ठंडे कुएं के पास स्थित है और अपने खस्ता समोसे, मलाई समोसा और शुद्ध मावे की मिठाइयों के लिए जानी जाती है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·17 मिनट पहले

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के साथ पुरानी खाद्य परंपराएं क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं। कनखल से लेकर मोती बाजार तक के ये ऐतिहासिक भोजनालय न केवल सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए हैं, बल्कि स्थानीय आजीविका और पर्यटन को भी दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की बीट पर काम करते हुए मैंने अक्सर देखा है कि धार्मिक मेलों और भारी भीड़ के दौरान स्थानीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा और जन-व्यवस्था बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। जब कनखल और मोती बाजार जैसे ऐतिहासिक क्षेत्रों में हज़ारों श्रद्धालु पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने उमड़ते हैं, तो प्रशासन के लिए मिलावटखोरी रोकने, फूड सेफ्टी ऑडिट कराने और सुचारू यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाता है। इस तरह के लोकप्रिय पर्यटन केंद्रों पर व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ-साथ उपभोक्ता अधिकारों और खाद्य मानकों की कड़ाई से निगरानी करना न्याय व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है।

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