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हाथ से पटियाला जूती बनाकर चमकाई किस्मत, देश भर में हैं 20 हजार से अधिक ग्राहकझारखंड
4 सित॰ 2026, 4:38 pm (21 दिन पहले)· 2

हाथ से पटियाला जूती बनाकर चमकाई किस्मत, देश भर में हैं 20 हजार से अधिक ग्राहक

पारंपरिक पटियाला जूतियों को हाथ से तैयार करने वाले पवन आज देश भर में मशहूर हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले उनके ग्राहक उन्हें प्यार से जूती किंग पुकारते हैं।

पारंपरिक दस्तकारी और हुनर के दम पर कैसे मुकाम हासिल किया जाता है, इसकी एक बेहतरीन मिसाल पवन की कहानी पेश करती है। बचपन के दिनों से ही इस काम को देखते हुए बड़े होने के कारण उन्हें इस पारंपरिक कला की गहराई से समझ हो गई थी। हालांकि, उनके परिवार का यह काम पहले सीमित दायरे में था, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से इसे एक नया विस्तार दिया और कई तरह की नई डिज़ाइन तैयार करना शुरू किया।

हर अवसर के लिए तैयार होती हैं खास डिज़ाइन

उनके पास हर मौके और जरूरत के हिसाब से जूतियों की एक विशाल श्रृंखला मौजूद है। खरीदारों के लिए महारानी डिज़ाइन और कट डिज़ाइन से लेकर साधारण ऑफिस जाने के लिए उपयुक्त और कैजुअल जूतियां तक आसानी से मिल जाती हैं। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनकी बनाई जूतियां पूरी तरह से हाथों के जरिए ही तैयार की जाती हैं।

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कारीगरी और पारंपरिक लुक की खासियत

इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जूतियों का फ्लैट हिस्सा, सोल और उन पर उकेरे गए खूबसूरत मोर, फूल और जरी का बारीक काम कुशल कारीगरों द्वारा अपने हाथों से ही किया जाता है। इसी वजह से इन उत्पादों को एक बेहद पारंपरिक और असली रूप मिलता है। पवन के अनुसार उनके कारीगर जो जूतियां बनाते हैं, वैसी दूसरी जोड़ी मिलना बाजार में लगभग नामुमकिन है, क्योंकि हर पीस में अनूठापन होता है।

देश भर में फैला है ग्राहकों का नेटवर्क

उनकी बनाई इस पारंपरिक कला के चाहने वालों की संख्या 20 हजार से भी अधिक हो चुकी है। अपनी बेहतरीन कारीगरी के दम पर लोग उन्हें बेहद स्नेह के साथ जूती किंग के नाम से भी संबोधित करते हैं। अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए वे देश भर में आयोजित होने वाले सरकारी और निजी मेलों में अपने स्टॉल लगाते हैं।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक मिलते हैं खरीदार

उनके ग्राहकों का दायरा किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे देश में फैला हुआ है। जब महिलाएं उनके पास खरीदारी के लिए पहुंचती हैं, तो वे उनकी पसंद और जरूरत को ध्यान से समझती हैं। ग्राहक जिस भी पहनावे जैसे कि जींस, सलवार सूट या फिर लहंगे के साथ इसे पहनना चाहती हैं, उसी के अनुरूप उन्हें सही जोड़ी दिखाई जाती है।

सवाल-जवाब

पवन को किस उपनाम से बुलाया जाता है?
लोग उन्हें प्यार से जूती किंग कहकर बुलाते हैं।
इन जूतियों को तैयार करने में किस तकनीक का उपयोग होता है?
ये जूतियां पूरी तरह से हाथ से बनाई जाती हैं और इनमें किसी भी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता है।
पवन के पास ग्राहकों की संख्या कितनी है?
उनके पास 20,000 से अधिक ग्राहक हैं जो देश भर में फैले हुए हैं।
जूतियों पर किस प्रकार की कलाकारी की जाती है?
जूतियों के सोल और फ्लैट हिस्से पर मोर, फूल और जरी का खूबसूरत काम कारीगरों द्वारा हाथ से किया जाता है।
उनके ग्राहक भारत में कहां-कहां तक फैले हैं?
उनके ग्राहक कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक फैले हुए हैं।
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