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हिमाचल प्रदेश में नकली एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध, जानें सेहत के लिए क्यों है खतरनाक और कैसे जांचें शुद्धताहिमाचल प्रदेश
21 अग॰ 2026, 11:30 am (78 दिन पहले)· 4

हिमाचल प्रदेश में नकली एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध, जानें सेहत के लिए क्यों है खतरनाक और कैसे जांचें शुद्धता

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में एनालॉग और गैर-डेयरी पनीर की बिक्री, भंडारण और निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। वनस्पति तेल और इमल्सीफायर से बनने वाला यह कृत्रिम उत्पाद असली डेयरी पनीर के मुकाबले पोषण रहित होता है।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बाजार में बेचे जा रहे नकली और कृत्रिम पनीर के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए गैर-डेयरी यानी एनालॉग पनीर पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। राज्य में खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए सरकार ने गुरुवार को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया। इस नए फैसले के बाद अब प्रदेश के किसी भी हिस्से में एनालॉग पनीर का निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन या बिक्री करना कानूनन अपराध माना जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि डेयरी उत्पादों के नाम पर मिलावटी सामान बेचे जाने से आम उपभोक्ताओं की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था, जिसे रोकने के लिए यह सख्त प्रशासनिक कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त अधिसूचना

खाद्य सुरक्षा आयुक्त की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई है। सरकार के संज्ञान में आया था कि राज्य के विभिन्न बाजारों में डेयरी पनीर के नाम पर गैर-डेयरी या एनालॉग पनीर धड़ल्ले से बेचा जा रहा था। कानून के मुताबिक पनीर एक मानक डेयरी उत्पाद की श्रेणी में आता है, इसलिए पनीर के रूप में बेचे जाने वाले किसी भी सामान का तय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य है। नए आदेश के अनुसार, किसी भी खाद्य कारोबार संचालक या व्यक्ति को ऐसे उत्पाद बनाने या बेचने की अनुमति नहीं होगी जो निर्धारित मापदंडों का उल्लंघन करते हैं।

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क्या होता है एनालॉग पनीर और यह असली से कैसे अलग है?

सामान्य तौर पर असली पनीर शुद्ध दूध से तैयार किया जाता है, जो शाकाहारी आबादी के लिए प्रोटीन का एक प्रमुख और प्राकृतिक स्रोत होता है। इसके विपरीत, एनालॉग पनीर को दूध के बजाय वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और विभिन्न प्रकार के इमल्सीफायर मिलाकर तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में दूध की प्राकृतिक वसा और ठोस घटकों को पूरी तरह या आंशिक रूप से सस्ते वनस्पति तेलों से बदल दिया जाता है। दिखने में यह उत्पाद बिल्कुल पारंपरिक पनीर जैसा ही लगता है, लेकिन इसमें दूध से मिलने वाले आवश्यक पोषक तत्व और प्रोटीन बिल्कुल नहीं होते हैं। अधिसूचना में साफ कहा गया है कि वनस्पति वसा से तैयार किसी भी उत्पाद को 'पनीर' नाम से विज्ञापित, प्रदर्शित या बेचा नहीं जा सकता।

घर पर असली और एनालॉग पनीर की पहचान कैसे करें?

उपभोक्ताओं की सुविधा और जागरूकता के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने असली और एनालॉग पनीर के बीच अंतर पहचानने के आसान तरीके भी बताए हैं। खरीदे गए पनीर के टुकड़े को पानी में डालकर उबालने से उसकी गुणवत्ता का पता लगाया जा सकता है। असली डेयरी पनीर छूने में बहुत नरम होता है और काटने या दबाने पर दानेदार महसूस होता है। इसके उलट, एनालॉग या कृत्रिम पनीर को जब हाथ से तोड़ा जाता है तो वह रबर की तरह खिंचने लगता है। इसके अलावा, खाते समय एनालॉग पनीर मुंह में चिपचिपा और कृत्रिम स्वाद देता है, जिससे इसकी मिलावट का आसानी से पता चल जाता है।

सवाल-जवाब

हिमाचल सरकार ने किस उत्पाद पर बैन लगाया है?
हिमाचल प्रदेश सरकार ने गैर-डेयरी यानी एनालॉग पनीर की बिक्री, निर्माण, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
एनालॉग पनीर क्या होता है?
एनालॉग पनीर दूध के बजाय वनस्पति तेल या वनस्पति वसा और इमल्सीफायर का उपयोग करके बनाया जाने वाला एक कृत्रिम उत्पाद है।
असली और एनालॉग पनीर में क्या अंतर है?
असली पनीर शुद्ध दूध से बनता है और प्रोटीन से भरपूर होता है, जबकि एनालॉग पनीर में वनस्पति वसा होती है और इसमें प्राकृतिक डेयरी पोषक तत्व नहीं होते।
यह प्रतिबंध किस कानून के तहत लगाया गया है?
यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत जारी अधिसूचना के अनुसार की गई है।
घर पर असली पनीर की पहचान कैसे कर सकते हैं?
पनीर को पानी में उबालकर देखें। असली पनीर नरम और दानेदार होता है, जबकि एनालॉग पनीर तोड़ने पर रबर की तरह खिंचता है और चिपचिपा लगता है।
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