घर का मुख्य द्वार सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रवेश का मुख्य बिंदु माना जाता है। दीपावली या किसी भी मांगलिक उत्सव पर घर की चौखट को सजाने के लिए तोरण या बंधनवार लगाने की पुरानी परंपरा चली आ रही है। बाजार में कई तरह के विकल्प मिलते हैं, लेकिन वास्तु के नियमों के अनुसार सही तोरण चुनने से घर में बरकत बनी रहती है।
आम के पत्तों का पारंपरिक तोरण
सनातन परंपरा में आम के पत्तों को बेहद पवित्र और शुभ माना गया है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, विवाह समारोह या बड़े त्योहार के मौके पर ताजे आम के पत्तों का बंधनवार लगाने का विशेष विधान है। मुख्य द्वार पर इन्हें सजाने से घर के भीतर का वातावरण सकारात्मक और ऊर्जावान रहता है। दीपावली के खास मौके पर भी चौखट की सजावट के लिए आम के पत्तों को चुनना एक बेहतरीन फैसला साबित होता है।
अशोक के पत्तों से सजाएं चौखट
आम के पत्तों के अलावा अशोक के पत्तों का इस्तेमाल भी मुख्य द्वार के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इन्हें हमेशा खुशहाली और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। त्योहारों या अन्य मांगलिक आयोजनों के दौरान अशोक के पत्तों का बना हुआ बंधनवार मुख्य द्वार पर लगाया जा सकता है। इसे लटकाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पत्ते पूरी तरह ताजे हों और तोरण चौखट पर कायदे से बंधा हुआ हो।
कौड़ी और सीप से बना सजावटी तोरण
यदि आप ऐसा बंधनवार लगाना चाहते हैं जिसे त्योहार खत्म होने के बाद फेंका न जाए और बार-बार इस्तेमाल किया जा सके, तो कौड़ी, सीप या मोतियों वाला तोरण एक बढ़िया विकल्प है। धार्मिक मान्यताओं में कौड़ी को मां लक्ष्मी और धन-संपत्ति का प्रतीक माना जाता है। इस तरह के डिजाइनर और टिकाऊ बंधनवार त्योहारों पर घर के मुख्य दरवाजे की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक सजावट का मुख्य हिस्सा भी बन जाते हैं।
रखरखाव और साफ-सफाई से जुड़े नियम
वास्तु के नियमों के अनुसार मुख्य द्वार पर हमेशा साफ-सुथरी और अच्छी हालत में मौजूद सजावट ही लगानी चाहिए। यदि तोरण पुराना हो जाए, टूट जाए, उस पर धूल जम जाए या वह गंदा दिखने लगे, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए। प्राकृतिक पत्तों से बने बंधनवार कुछ दिनों बाद सूख जाते हैं और मुरझाने लगते हैं। ऐसे सूखे हुए पत्तों को समय पर बदल देना जरूरी होता है, जिससे घर की सुंदरता भी बरकरार रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।



















