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हिमाचल के पहाड़ों में उड़ा 'इलेक्ट्रॉनिक कबूतर': मंडी में ड्रोन से शुरू हुई डाक डिलीवरी, दिनभर का सफर अब 7 मिनट मेंहिमाचल प्रदेश
13 जून 2026, 11:42 pm (136 दिन पहले)· 0

हिमाचल के पहाड़ों में उड़ा 'इलेक्ट्रॉनिक कबूतर': मंडी में ड्रोन से शुरू हुई डाक डिलीवरी, दिनभर का सफर अब 7 मिनट में

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में डाक विभाग ने Sky Air के ड्रोन से मेल और पार्सल पहुंचाने की पायलट सेवा शुरू कर दी है, जिससे पहले एक दिन में पूरी होने वाली डिलीवरी अब महज 6 से 7 मिनट में हो रही है।

एक दौर था जब लोग चिट्ठी और जरूरी संदेश दूर तक पहुंचाने के लिए कबूतरों पर भरोसा करते थे। फिर डाकिए और गाड़ियां आईं। अब डिजिटल युग में वही भूमिका हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक 'इलेक्ट्रॉनिक कबूतर', यानी आधुनिक ड्रोन ने संभाल ली है। डाक विभाग ने यहां पायलट प्रोजेक्ट के तहत ड्रोन आधारित मेल और पार्सल डिलीवरी सेवा का विधिवत और सफल शुभारंभ कर दिया है।

पहली उड़ान कहां से कहां तक

शुरुआत डाक विभाग के मंडी हेड ऑफिस से हुई। यहां से द्रंग विधानसभा क्षेत्र की दुर्गम रेहड़धार शाखा तक पहली ड्रोन डाक भेजी गई। हवाई मार्ग से यह दूरी करीब 5 से 6 किलोमीटर (एकतरफा) है, और ड्रोन ने इसे चंद मिनटों में तय कर वह काम निपटा दिया जिसमें पहले घंटों लगते थे।

डाक विभाग प्रधान कार्यालय के डिप्टी सुपरिटेंडेंट संजय कुमार के मुताबिक, इस पहाड़ी और कठिन भौगोलिक इलाके में पहले अकाउंट्स ब्रांच से सामान्य रास्ते से डाक पहुंचाने में पूरा एक दिन खप जाता था। अब Sky Air कंपनी के ड्रोन से वही डाक सिर्फ 6 से 7 मिनट में रेहड़धार पहुंच गई। इतना ही नहीं, दिनभर की डाक वापस मंडी भी इसी ड्रोन से लाई गई।

10 किलो वजन, 50 किलोमीटर तक की उड़ान

Sky Air के कर्मचारी सुभाष दुबे ने इस खास ड्रोन की तकनीकी ताकत के बारे में बताया। डाक सेवा के लिए लगाया गया यह ड्रोन 10 किलोग्राम तक का भारी पार्सल उठाने में पूरी तरह सक्षम है। एक बार में यह हवाई मार्ग पर 30 से 50 किलोमीटर की दूरी आराम से तय कर सकता है। साथ ही इसमें रीयल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा है, जिससे यह लाइव मॉनिटर किया जा सकता है कि डाक इस समय आसमान में ठीक कहां है।

मंडी के 10 सबसे कठिन गांव पहले चरण में

डाकपाल मंडी नेहा संख्यान ने जानकारी दी कि पूरे भारत में करीब 150 चुनिंदा स्थानों पर Sky Air कंपनी के जरिए यह आधुनिक सुविधा दी जा रही है। मंडी जिले की बात करें तो शुरुआती चरण में जिले के 10 सबसे दुर्गम और कठिन स्थानों को इसके लिए चुना गया है। इन इलाकों में कंपनी 8 अत्याधुनिक ड्रोन के जरिए नियमित डाक सेवा दे रही है। इसका सीधा फायदा बर्फीले और पहाड़ी गांवों के उन लोगों को मिलेगा, जिन तक अब मनीऑर्डर, दवाइयां और जरूरी दस्तावेज तुरंत पहुंच सकेंगे।

कैसे बनी यह योजना

विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस पर्यावरण के अनुकूल पहल पर खुशी जताई है। दिलचस्प बात यह है कि यह पूरी योजना कागजी फैसले से नहीं, बल्कि जमीनी फीडबैक से निकली है। आला अधिकारियों ने ग्रामीण डाक सेवकों और पोस्टल असिस्टेंट्स से बातचीत के दौरान जो सुझाव और परेशानियां सुनीं, उन्हीं का यह नतीजा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन के अनुरूप, डाक विभाग अब देश के सबसे आखिरी छोर पर बैठे नागरिक को भी आधुनिक तकनीक से तेज विकास और अवसरों से जोड़ने में जुटा है।

एक नजर में सवाल-जवाब

पहली ड्रोन डाक किन दो जगहों के बीच भेजी गई? मंडी हेड ऑफिस से द्रंग विधानसभा क्षेत्र की रेहड़धार शाखा के बीच।

कितनी जल्दी पहुंची डाक? हवाई रास्ते से 5 से 6 किलोमीटर की दूरी महज 6 से 7 मिनट में तय हुई, जबकि पहले परंपरागत रास्ते से इसमें पूरा एक दिन लगता था।

ड्रोन की क्षमता क्या है? यह 10 किलोग्राम तक का पेलोड उठा सकता है और एक उड़ान में 30 से 50 किलोमीटर तक जा सकता है।

अभी कुल कितनी जगहों पर सेवा है? पूरे भारत में करीब 150 स्थानों पर, और मंडी जिले में फिलहाल 10 दुर्गम स्थानों पर 8 ड्रोन के जरिए।

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