हैदराबाद के पुराने शहर में इस साल गणेश चतुर्थी के दौरान भक्ति के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति का एक अद्भुत रंग देखने को मिल रहा है। उप्पुगुड़ा के लालिता बाग इलाके में स्थित मल्लिकार्जुन नगर यूथ वेलफेयर एसोसिएशन ने अपने गणेशोत्सव के 50वें साल को बेहद खास और ऐतिहासिक बना दिया है। इस समिति ने इस बार विकसित भारत 2047 की थीम पर एक भव्य पंडाल का निर्माण किया है, जो भगवान गणेश की आराधना के साथ-साथ देश को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को भी दर्शाता है। यह पंडाल केवल एक धार्मिक आयोजन स्थल नहीं है, बल्कि यह वर्ष 2047 तक भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के सपने को जीवंत करता है।
1947 से 2047 तक के सफर की अनूठी झांकी
इस अनोखे पंडाल के भीतर विराजे भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा के चारों ओर भारत के विकास की पूरी यात्रा को प्रदर्शित किया गया है। इसमें देश की स्वतंत्रता के वर्ष 1947 से लेकर आजादी के सौवें साल यानी 2047 तक के उतार-चढ़ाव और सफलताओं को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा गया है। पंडाल में भारत की तकनीकी ताकत, कृषि क्षेत्र में हुए नए प्रयोगों, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग और देश के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के विभिन्न मॉडल्स को सजाया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया बुलेट ट्रेन और आधुनिक परिवहन व्यवस्था का मॉडल आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जिसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
गोल्डन जुबली पर देशभक्ति का संदेश
मल्लिकार्जुन नगर यूथ वेलफेयर एसोसिएशन पिछले पांच दशकों से लगातार इसी तरह के सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर आधारित गणेशोत्सव का आयोजन करता आ रहा है। अपने स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर इस समिति ने एक ऐसा मंच तैयार किया है जो देश की युवा पीढ़ी और बच्चों में भविष्य के भारत के प्रति गौरव और जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है। यह पहला मौका नहीं है जब इस समिति ने ऐसा सराहनीय कदम उठाया है। पिछले साल भी इस समिति ने ऑपरेशन सिंदूर थीम पर आधारित एक शानदार पंडाल बनाकर समाज में राष्ट्रप्रेम का एक गहरा संदेश दिया था, जिसकी चारों ओर काफी सराहना हुई थी।
बप्पा के चरणों में विकसित भारत का संकल्प
पंडाल के आयोजकों का मानना है कि विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश बुद्धि, समृद्धि और नई सफलताओं के देवता हैं। इसी विश्वास के साथ उन्होंने विकसित भारत के इस दूरदर्शी सपने को बप्पा के चरणों में समर्पित किया है, ताकि देश लगातार तरक्की की राह पर आगे बढ़ता रहे और पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके। बप्पा के दर्शन करने और इस अनोखी झांकी को देखने के लिए हैदराबाद के कोने-कोने से हर रोज हजारों श्रद्धालु इस पंडाल में पहुंच रहे हैं।














