कोडरमा के बंगाखलार में पुल का अभाव: कमर तक पानी में उतरकर स्कूल पहुंचते हैं मासूम छात्रस्टैंडर्ड चार्टर्ड का अनुमान: नीतिगत दरों में बढ़ोतरी के बाद धीमी होगी बैंक ऑफ जापान की सामान्यीकरण प्रक्रियाब्रिटेन के श्रम बाजार में नरमी से ब्याज दरें स्थिर रहने का अनुमान, एफओएमसी बैठक से पहले करेंसी और सोने में उतार-चढ़ावसितंबर 15 से 21 के बीच 5 राशियों को मिलेगा जबरदस्त फायदा, ग्रहों का शुभ प्रभाव लाएगा आर्थिक उन्नतिसड़क पर विवाद बनने लगे जानलेवा, गुरुग्राम रोड रेज घटना के बाद जानिए खुद को सुरक्षित रखने के 5 नियमराजस्थान के झालावाड़ में महसूस किए गए 3.0 तीव्रता के भूकंप के झटके, दहशत में घरों से बाहर निकले ग्रामीणगणेश चतुर्थी पर बप्पा की सेवा का सही टाइमटेबल: जानिए सुबह से रात तक किस समय क्या लगाएं भोगनैनीताल में सस्ते किराए के मकान: छात्र और नौकरीपेशा लोग इन 8 पॉकेट-फ्रेंडली इलाकों में पा सकते हैं कमरामणिपुर में NRC और मूल निवासियों की सुरक्षा पर सर्वदलीय बैठक, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह की अध्यक्षता में हुई चर्चाराजस्थान के पाली में फिर गहराया गंभीर जल संकट, 2250 करोड़ की जवाई परियोजना अटकने से दोबारा वॉटर ट्रेन का सहारा
झारखंड में मानसून के बाद आलू की खेती से बंपर पैदावार, 60 दिन में पकने वाली कुफरी किस्म से बढ़ाएं मुनाफाझारखंड
15 सित॰ 2026, 3:02 pm (1 घंटे पहले)· 0

झारखंड में मानसून के बाद आलू की खेती से बंपर पैदावार, 60 दिन में पकने वाली कुफरी किस्म से बढ़ाएं मुनाफा

मानसून की विदाई के बाद झारखंड में आलू की अगेती बोआई की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कृषि विशेषज्ञ वकील यादव के अनुसार, सही खेत तैयारी, धूप उपचार और 60 दिन में तैयार होने वाली कुफरी किस्म अपनाकर किसान सब्जी व चिप्स बाजार से बेहतरीन कमाई कर सकते हैं।

झारखंड के देवघर और आसपास के कृषि क्षेत्रों में मानसून की बारिश समाप्त होते ही रबी मौसम की फसलों के लिए सरगर्मी बढ़ जाती है। जैसे ही ठंड का अहसास शुरू होता है, राज्य भर के किसान बड़े पैमाने पर आलू की व्यावसायिक खेती में जुट जाते हैं। स्थानीय और क्षेत्रीय मंडियों में आलू की मांग साल भर बनी रहती है, जिसके चलते सही समय पर फसल बाजार में पहुंचाकर किसान अपनी लागत पर बढ़िया रिटर्न हासिल कर सकते हैं। हालांकि, जमीन के नीचे बड़े और गुणवत्तापूर्ण कंदों का विकास पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि बोआई से पहले खेत को किस तरह से तैयार किया गया है। कृषि विशेषज्ञ वकील यादव का कहना है कि आलू की भरपूर पैदावार लेने के लिए सबसे पहला और बुनियादी कदम सही तरीके से खेत का प्रबंधन करना है।

गहरी जुताई और भुरभुरी मिट्टी का महत्व

मानसून समाप्त होते ही खेतों को आलू की बोआई के अनुकूल बनाना बेहद आवश्यक हो जाता है। कृषि विशेषज्ञ वकील यादव के अनुसार, किसानों को सबसे पहले अपने खेतों की लगातार तीन से चार बार अच्छी तरह जुताई करानी चाहिए। बरसात के बाद जमा हुई मिट्टी की ऊपरी परत कठोर हो जाती है, जिसे तोड़ना बेहद जरूरी होता है। खेत की मिट्टी जितनी अधिक भुरभुरी और हवादार होगी, जमीन के अंदर आलू के कंदों (ट्यूबर्स) को फैलने, सांस लेने और अपना आकार बड़ा करने में उतनी ही आसानी होगी। यदि मिट्टी सख्त रहेगी तो कंद छोटे रह जाएंगे और पैदावार पर इसका सीधा बुरा असर पड़ेगा।

ये भी पढ़ें

जैविक खाद और धूप उपचार का सही तरीका

मिट्टी की बनावट में सुधार के लिए जुताई के दौरान ही पोषक तत्वों का समावेश करना आवश्यक है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खेत की अंतिम जुताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गोबर या वर्मी कंपोस्ट खाद पर्याप्त मात्रा में मिट्टी में मिलाएं। हालांकि, खाद डालने के तुरंत बाद आलू के बीज बोने से बचना चाहिए। गोबर या वर्मी कंपोस्ट डालने के बाद खेत को लगभग तीन से चार दिनों के लिए खुला छोड़ देना बेहद फायदेमंद माना जाता है। इस दौरान सीधी धूप लगने से मिट्टी और जैविक खाद में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया व फंगस नष्ट हो जाते हैं, साथ ही खाद के पोषक तत्व मिट्टी के साथ बेहतर तरीके से घुल-मिल जाते हैं। शुरुआती दौर में मिट्टी का यह वैज्ञानिक उपचार पौधे के तेजी से विकास की मजबूत नींव रखता है।

कुफरी किस्म: सब्जी और चिप्स उद्योग दोनों के लिए बेहतरीन विकल्प

खेत तैयार करने के साथ-साथ सही उन्नत किस्म का चयन भी उत्पादन और मुनाफा तय करने में मुख्य भूमिका निभाता है। बाजार में आलू की कई प्रजातियां उपलब्ध हैं, लेकिन कुफरी किस्म को किसानों के लिए बेहद उपयोगी और फायदे का सौदा माना जाता है। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, कुफरी किस्म अपने बड़े आकार और सुडौल कंदों के लिए जानी जाती है। इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका बहुआयामी उपयोग है। इसका इस्तेमाल केवल घरों में सब्जी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप्स और अन्य खाद्य प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) उद्योग में भी इसकी भारी मांग रहती है। जो किसान बाजार की मांग और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) को ध्यान में रखकर इस किस्म को चुनते हैं, वे कम समय में अपनी उपज का बेहतर दाम हासिल कर लेते हैं।

60 दिन की फसल अवधि और समय प्रबंधन से अधिक मुनाफा

कुफरी किस्म की एक और सबसे बड़ी ताकत इसकी कम समय सीमा है। यह किस्म महज 60 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इतनी कम अवधि में फसल तैयार होने से किसानों को अगेती फसल के रूप में इसे बाजार में उतारने का मौका मिलता है, जब मंडियों में नए आलू के दाम काफी ऊंचे होते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ अच्छी किस्म चुन लेने से ही मनचाहा उत्पादन नहीं मिलता। इसके साथ-साथ संतुलित खाद प्रबंधन, सही समय पर हल्की सिंचाई और कीट नियंत्रण पर भी ध्यान देना जरूरी है। इसीलिए सितंबर के अंतिम सप्ताह से ही खेत सुखाने और जुताई का काम शुरू कर देना चाहिए, ताकि ठंड की शुरुआत के साथ ही सही तापमान में बोआई पूरी की जा सके और बेहतर पैदावार से किसानों की आय में इजाफा हो सके।

सवाल-जवाब

आलू बोने से पहले खेत की कितनी बार जुताई करनी चाहिए?
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार आलू बोने से पहले खेत की अच्छी तरह से 3 से 4 बार जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बना लेना चाहिए।
खाद डालने के बाद खेत को कितने दिन खुला छोड़ना चाहिए?
सड़ा हुआ गोबर या वर्मी कंपोस्ट डालने के बाद खेत को लगभग 3 से 4 दिन तक धूप में खुला छोड़ देना चाहिए ताकि मिट्टी और खाद को अच्छी धूप मिल सके।
कुफरी किस्म का आलू कितने दिनों में पककर तैयार हो जाता है?
कुफरी किस्म का आलू बोआई के बाद महज 60 दिनों के भीतर पककर बाजार में बिक्री के लिए तैयार हो जाता है।
कुफरी किस्म के आलू का उपयोग किन चीजों में किया जाता है?
कुफरी किस्म का उपयोग घरेलू रसोई में सब्जी बनाने के अलावा व्यावसायिक रूप से चिप्स और अन्य वैल्यू-एडेड स्नैक्स बनाने में व्यापक रूप से होता है।
झारखंड में आलू की खेती की तैयारी कब शुरू कर देनी चाहिए?
झारखंड में मानसून खत्म होते ही यानी सितंबर के अंतिम दिनों में खेत की जुताई और तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR