इम्फाल स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में सोमवार शाम को आयोजित एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक में मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने और उसे अपडेट करने के मुद्दे पर गहन मंथन हुआ। राज्य सरकार ने मणिपुर की स्वदेशी पहचान, सुरक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों के प्रमुख नेताओं को एक मंच पर आमंत्रित किया।
राजनीतिक सहमति और नागरिक समाज की भागीदारी
बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने की। इस सर्वदलीय परामर्श में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ विभिन्न नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बातचीत के दौरान राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने मणिपुर की सुरक्षा और इसके मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा रखे गए सुझावों और चिंताओं को विस्तार से सुना। बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह संवाद काफी सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री का संदेश और सार्वजनिक बयान
बैठक के समापन के बाद मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने सचिवालय में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में जनता के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए NRC को अपडेट करने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि राज्य की जनसांख्यिकी और स्वदेशी पहचान को किसी भी प्रकार के संकट से बचाया जा सके।
जनगणना से पहले NRC की उठती मांग और प्रदर्शन
यह बैठक मणिपुर में आगामी जनगणना से पहले NRC को अपडेट करने की बढ़ती मांगों के बीच आयोजित की गई है। हाल के दिनों में राज्य के कई हिस्सों में जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले NRC लिस्ट को अपडेट करने की मांग जोर पकड़ रही है। इसी महीने ककचिंग जिले में स्थानीय निवासियों ने इस मांग को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया था। वाबागाई, हियांगलाम और आसपास के इलाकों के सैकड़ों लोगों ने लगभग 3 किलोमीटर लंबी मशाल रैली निकाली थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने "नो NRC, नो सेंसेक्स" यानी एनआरसी नहीं तो जनगणना नहीं जैसे नारे लगाए थे। उस समय रैली के दौरान पथराव होने के बाद पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने सर्वदलीय बैठक के जरिए राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास किया है।


















